गागरोन के राजा पीपा जी ने राजपाट त्यागकर जगतगुरु रामानंदाचार्य जी की शरण क्यों ली? श्रीभक्तमाल के छप्पय, प्रियादास जी की टीका और आधुनिक शोध के आधार पर जानिए गुरु-आज्ञा, संत-सेवा और वैराग्य की यह गाथा। प्रमाण–57, सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा।
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 23वीं पुस्तक: 19 वर्षों के शोध पर आधारित वैष्णव बैरागी कुंभ, अखाड़ों और वृंदावन परंपरा का दस्तावेज़ी अध्ययन।
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 19 वर्षों की शोध-यात्रा: बंदा वीर बैरागी के 21 युद्धस्थलों का अध्ययन, दसवीं पीढ़ी से भेंट और प्रमाण-आधारित इतिहास।
राजा मोहगाँव और नांदगाँव बैरागी रियासत पर गजेटियर व जनगणना के प्रमाण। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, मानद नायब सूबेदार व इतिहासकार।
संत धन्ना भगत, श्रीभक्तमाल और रामानंदाचार्य की गुरु-परंपरा पर प्रमाण-आधारित अध्ययन। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क,
अयोध्या, गोरखपुर व नेपाल की शोध-यात्रा। 491 पृष्ठों के ग्रंथ में 120 प्रमाण। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार व इतिहासकार।
राष्ट्रीय कवि प्रमोद रामावत 'प्रमोद' का उपन्यास 'प्रहुति' Google Play, Amazon, Pothi, Internet Archive, Zenodo व Academia पर उपलब्ध। संपादक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
वैष्णव बैरागी परंपरा में गृहस्थ, गुरु-शिष्य, मठ और अखाड़ों की क्या भूमिका रही? Oxford और कुल्लू पर हुए शोध के आधार पर तथ्यों की पड़ताल।
शहीद जयकुवार स्वामी के पुत्र अमरदीप स्वामी ने निःशुल्क बनाई नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की वेबसाइट। तीन महीने में 118 देशों की Google खोज में दिखी।
वैष्णव बैरागी जाति और वर्ण का प्रश्न: रामानंद के 12 शिष्यों की परंपरा, हरियाणा का अभिलेख और स्रोतों की सीमाएँ। जानिए दस्तावेज़ क्या कहते हैं।
Nimbark Sampradaya History
निंबार्काचार्य की जन्मभूमि की परंपरा को समझने के लिए लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने गोदावरी तट के मुंगी गाँव (पैठण, छत्रपति संभाजी नगर) में सात दिन तक शोधकार्य किया। इसी शोधयात्रा से पुस्तक “जगतगुरु निंबार्काचार्य: सनातन के सूर्य” की रचना हुई। डिजिटल प्रकाशन मंचों के आँकड़ों के अनुसार लेखक की पुस्तकों की पहुँच 190 देशों तक दर्ज की गई है। पुस्तकें Google Books, Internet Archive, Academia.edu और Zenodo पर निःशुल्क पढ़ी जा सकती हैं।
इंद्रप्रस्थ के बैरागी राजा, वीर बंदा बैरागी, छुईखदान और राजनांदगांव रियासत का इतिहास। शोधग्रंथ की विषय-सूची। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह को पत्रकारिता एवं साहित्य सेवा में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि। लेखक एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दी हार्दिक बधाई।
क्या एक दादा अपने जीवन के अनुभव, संघर्ष, आस्था और अथाह प्रेम को पुस्तक के रूप में अपनी पौत्री के नाम समर्पित कर सकता है? ‘प्रहुति’ ऐसी ही भावनाओं से जन्मी एक आत्मीय कृति है। लेखक प्रमोद रामावत ‘प्रमोद’ ने अपनी 13 माह की पौत्री के लिए यह पुस्तक लिखी है, जिसका संपादन नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने किया है। ई-पुस्तक निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना है।
सनातन भारत नया सवेरा (Sanatan Bharat Naya Savera Magazine)
19 वर्षों के शोध की निःशुल्क पत्रिका: सनातन भारत "नया सवेरा" अंक 21। हिंदी 62 पृष्ठ, अंग्रेज़ी 47 पृष्ठ। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
88वें जन्मदिन पर कृषि अनुसंधान और देशी बीज संरक्षण में श्री नरेंद्र सिंह सिपानी जी का योगदान, भारत सरकार की PPV&FRA पुरस्कार-सूची 2012 के प्रमाण सहित।
क्या मथुरा का बैरागपुरा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बसाया था? जनगणना, इतिहास-ग्रंथों और पुरातत्त्व-अभिलेखों की जाँच के बाद प्रमाण संख्या–51 का शोध-निष्कर्ष।
Sanatan History & Heritage
हरियाणा के जिस शहर का पूर्व नाम स्वर्णप्रस्थ था, वह है सोनीपत। पांडवों द्वारा माँगे गए पाँच प्रस्थों में से एक, यही स्वर्णप्रस्थ आगे चलकर सोनीपत कहलाया। महाभारत से यौधेय गणराज्य, हर्षवर्धन, बांदा वीर बैरागी और आधुनिक स्मार्ट सिटी तक, इसकी 3526 वर्षों की गाथा अब तक अनसुनी रही है। दस्तावेज़ पहले, निष्कर्ष बाद में।
कारगिल युद्ध के समय सेना की रसद-शृंखला संभालने वाला एक सैनिक, वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र सेवा के अंतर्गत सिएरा लियोन गया, और आज उसकी 22 पुस्तकें मोज़ाम्बिक तक पहुँच चुकी हैं। रामनगर, गन्नौर की माटी से उठी यह कलम इतिहास, तीर्थ और सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा की गाथा कहती है। पढ़िए पूरी यात्रा।
"सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान। Google Play Books और Internet Archive पर निःशुल्क उपलब्ध। विमोचन: 6 दिसंबर 2026, अयोध्या धाम।"
पानीपत जिले के सिंक-पाथरी गाँव का ऐतिहासिक अध्ययन: महाभारत की यक्ष-प्रश्न परंपरा, कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि, निम्बार्क संप्रदाय और वैष्णव बैरागी संत-परंपरा। स्थानीय जानकारी, क्षेत्रीय भ्रमण और सरकारी संदर्भ, प्रमाण-आधारित शोध की मर्यादा सहित।
Henry Waterfield की 1875 की पुस्तक Memorandum on the Census of British India of 1871–72 के मुद्रित पृष्ठ 24 और 26 पर ‘Baisnabs’, ‘Baishtabs’ और ‘Bairagces’ का उल्लेख मिलता है। मूल स्रोत, उसकी सीमाएँ और शोध की अनिवार्य शर्तें।
यूरोपीय यात्रियों, ब्रिटिश प्रशासकों और आधुनिक इतिहासकारों ने भी वैष्णव बैरागियों के मठ, अखाड़े और साधु-संगठन का अध्ययन किया। जानिए अध्याय–13 के प्रमाण संख्या–48 का दस्तावेजी साक्ष्य।
1911 में H. A. Rose के ग्लॉसरी में कैथल तहसील के डींग गाँव के कृषि-भूमिधारी गृहस्थ बैरागियों का उल्लेख मिलता है। वहीं 2015 के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अभिलेख में वर्तमान Deeg, पुंडरी, कैथल के लोग "Bairagi Caste" के रूप में दर्ज हैं। दो कालखंडों के ये दस्तावेज़ डींग में बैरागी पहचान की निरंतरता सिद्ध करते हैं।
चुलकाना धाम के श्री श्यामजी मंदिर पर तीन दिन की शोध-पड़ताल। जगा-पोथी, दैनिक ट्रिब्यून, 2025 का हाई कोर्ट रिकॉर्ड और 1961 की जनगणना में जो दर्ज है, वह हर स्रोत के नाम से प्रस्तुत है।
1892 के Karnal District Gazetteer (पृ. 123) में निमावत, रामानंदी और राधाबल्लभी बैरागियों का उनके गाँवों सहित स्पष्ट उल्लेख है। सीतामाई के रामानंदी बैरागियों का यह दस्तावेज़ी प्रमाण पढ़िए।
Events & Public Appearances
4 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया क्रिकेट ग्राउंड, ओखला में देवभूमि स्पोर्ट्स महाकौथिग के 7वें टी-20 टूर्नामेंट के उद्घाटन पर पोते भावेश और पोती दिव्यांशी के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मानित होने का भावुक संस्मरण।
(History / Religious Research)
Joanne Waghorne की पुस्तक Diaspora of the Gods (Oxford University Press, 2004) में चेन्नई के Byragi Matam और महात्मा लाल दास जी महाराज का उल्लेख। मूल संदर्भ देखें।
प्रेरणादायक कहानी | वर्ल्ड रिकॉर्ड | भारत की उपलब्धियाँ | वैष्णव बैरागी समाज
भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 वर्ष बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। इस ऐतिहासिक टीम में वैष्णव बैरागी समाज की बेटी, सोनीपत की ज्योति रामावत भी शामिल हैं। पिता के निधन, आर्थिक अभाव और माँ के त्याग से स्वर्ण तक पहुँची उनकी प्रेरक कथा।
Census of India 2011 (C-01 Annexure) में "Bairagi" और "Baishnav/Vaishnav" नाम 26 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में दर्ज हैं। मूल रिकॉर्ड देखें।
क्या 'बैरागी' केवल आधुनिक शब्द है? मूल फ़ारसी स्रोतों के अनुसार नहीं। 'मआसिर-ए-आलमगीरी' में 3 जून 1669 को 'उद्धव बैरागी' का उल्लेख मिलता है, और 'सफ़ीना-ए-ख़ुशगू' में भूपत राय 'बीघम' बैरागी की जीवनी दर्ज है। यह प्रमाण 17वीं–18वीं शताब्दी के फ़ारसी स्रोतों में 'बैरागी' की ऐतिहासिक पहचान स्थापित करता है।
(History / Religious Research)
H. A. Rose के ग्रंथ (खंड–II, मुद्रित पृष्ठ 35–38) में बैरागी को विष्णु का भक्त बताया गया है। पृष्ठ 36 की पाद-टिप्पणी में नागा और गृहस्थ बैरागी का उल्लेख है। प्रमाण संख्या–40।
(History / Religious Research)
R. V. Russell के 1916 के ग्रंथ में "बैरागी" शब्द को वैष्णव धार्मिक आदेशों से जोड़ा गया है। पृष्ठ 97 से 108 तक चार मुख्य संप्रदायों में निमानंदी का उल्लेख, सात अखाड़े, बावन द्वार, तुलसी की माला और गोपीचंदन तिलक दर्ज हैं। प्रमाण–38।
(History / Religious Research)
28 दिसंबर 1633 को शाहजहाँ के फ़रमान में राजा जयसिंह को दी गई संपत्तियों में "Rupsi Bairagi" की हवेली आगरा के अतगा खान बाजार में दर्ज मिलती है। पढ़ें प्रमाण संख्या–36।
(History / Religious Research)
William Crooke की 1896 में प्रकाशित पुस्तक "The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh" में वैष्णव बैरागी परंपरा के चार प्रमुख संप्रदायों का उल्लेख मिलता है, जिनमें निम्बार्क सम्प्रदाय भी शामिल है। पृष्ठ 114-115 पर दर्ज यह ऐतिहासिक प्रमाण पढ़ें। प्रस्तुतकर्ता: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा
TTD के अपने प्रकाशित रिकॉर्ड में दर्ज एक चौंकाने वाला तथ्य — 1843 से 1933 तक, पूरे 90 वर्षों तक तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रशासन हाथीरामजी मठ के वैष्णव बैरागी महंतों के हाथों में रहा। जानिए सेवदासजी की सनद से लेकर TTD की स्थापना तक की पूरी दस्तावेज़ी कहानी।
18 जून 1858 — रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के दिन ही, गंगादास की बड़ी शाला के 745 वैष्णव बैरागी साधुओं ने भी शस्त्र उठाए और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज भी वहाँ उनकी ऐतिहासिक तोप, तलवारें और बंदूकें सुरक्षित हैं, पर इन 745 शहीदों की कोई स्वतंत्र समाधि नहीं। न उनके नाम, न उनकी पृष्ठभूमि — केवल एक संख्या जो परंपरा में जीवित है। क्या इतिहास के इन गुमनाम बलिदानियों को वह सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं?
6 दिसंबर 2026 को अयोध्या धाम में नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की दो ऐतिहासिक पुस्तकों — "सनातन अयोध्या" व "सनातन अयोध्या खंड-2" — के हिंदी-अंग्रेज़ी संस्करणों का संयुक्त विमोचन। रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों के बलिदान का दस्तावेज़-आधारित इतिहास। मुख्य अतिथि: श्री महंत धर्मदास जी महाराज।
एक सैनिक के हाथ में बंदूक हो तो वह सीमा की रक्षा करता है, परंतु वही सैनिक जब कलम उठाता है तो इतिहास की स्मृतियों को सुरक्षित करने का प्रयास करता है। भारतीय सेना की सेवा के पश्चात नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने सनातन परंपरा, वैष्णव बैरागी इतिहास और भारतीय सभ्यता के अध्ययन में स्वयं को समर्पित किया। आज उनकी यह यात्रा 22 प्रकाशित पुस्तकों के रूप में साकार हुई है — शौर्य से शब्द तक की एक अमर गाथा।
Sanatan History & Heritage
रामजन्मभूमि आंदोलन का इतिहास केवल घटनाओं की कथा नहीं, बल्कि न्यायालयीन अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों से सिद्ध सत्य है। 1986 की रिट याचिकाओं से लेकर 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय तक — निर्मोही अखाड़े सहित वैष्णव बैरागी परंपरा की संस्थागत भूमिका को दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर प्रस्तुत करता यह शोध, स्मृति नहीं, साक्ष्य पर आधारित इतिहास-लेखन का प्रयास है।
रामजन्मभूमि के लिए सचमुच 76 संघर्ष हुए थे? कौन-सी घटनाएँ अभिलेखों से प्रमाणित हैं, कौन-सी केवल मौखिक परंपरा में जीवित हैं, और वैष्णव बैरागी अखाड़ों की वास्तविक भूमिका कहाँ तक सिद्ध होती है? श्रीमान नरेश दास वैष्णव निंबार्क — सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, इतिहासकार व UN वेटरन — इस निर्भीक शोध में हर दावे को कसौटी पर कसते हैं। न श्रद्धा में बहकर, न प्रचार से डरकर — केवल प्रमाण के आधार पर। अभिलेख पहले, निष्कर्ष बाद में।
(History / Religious Research)
मणिराम दास छावनी, बड़ी छावनी, तपस्वी छावनी, संत तुलसीदास छावनी और हनुमानगढ़ी की चार पटी — अयोध्या के धार्मिक भूगोल में ये नाम बार-बार सुनने को मिलते हैं, पर इनमें से कौन सा वास्तव में प्रमाणित ऐतिहासिक छावनी है और कौन सा केवल स्थानीय परंपरा? यह प्रमाण–25, 1928 के फैजाबाद गजेटियर, न्यायालयीन अभिलेखों और लेखक की सितंबर 2026 की प्रत्यक्ष अयोध्या शोध-यात्रा के आधार पर प्रत्येक छावनी को प्रमाण के स्तर पर परखता है — कहाँ दस्तावेज़ बोलता है, कहाँ केवल मौखिक परंपरा है, और कहाँ अभी शोध बाकी है।
वैष्णव बैरागी अखाड़ों की पहचान केवल धार्मिक साधना तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी अपनी धर्मध्वजा, संगठनात्मक संरचना और शस्त्र-प्रशिक्षण की भी एक सुव्यवस्थित परंपरा रही है। यह प्रमाण–24, निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर — तीनों अणियों की अलग-अलग धर्मध्वजाओं, उनके रंगों और उनके प्रमुख केंद्रों का विवरण प्रस्तुत करता है। साथ ही 1870 के कार्नेगी के अयोध्या-संबंधी अभिलेख, 1916 के Russell-Hira Lal के औपनिवेशिक शोध, 1925 के हनुमानगढ़ी के पंजीकृत विधान तथा 1949 के न्यायिक अभिलेख — इन सभी दस्तावेजों को एक साथ रखकर अखाड़ों के संगठन, पंचायत-व्यवस्था और शस्त्र-प्रशिक्षण की परंपरा को प्रमाण-आधारित ढंग से समझने का प्रयास किया गया है।
एक सामान्य किसान परिवार से भारतीय सेना तक, और फिर 18 वर्षों की शोध-यात्रा में 20 पुस्तकें — जानें उन सभी सहयोगियों की कहानी जिन्होंने इस सफर में साथ दिया।
वैष्णव बैरागी सेना एवं इतिहास
संवत् 1536 में अनुभवानंदाचार्य से लेकर बालानंदाचार्य तक — वैष्णव बैरागी सेना, अणी-अखाड़ा व्यवस्था और 18 उप-अखाड़ों के संगठन की प्रमाण-आधारित कहानी। जानें रामजन्मभूमि से इसका ऐतिहासिक जुड़ाव।
सनातन अयोध्या खंड-2 के 21वें प्रमाण में महंत अभिराम दास बैरागी, महंत धर्मदास और निर्मोही अखाड़े के रामजन्मभूमि से जुड़े योगदान, अभिलेखीय प्रमाण और संत-परंपरा का शोध प्रस्तुत है।
Nimbark Sampradaya History
"18 वर्षों की स्थल-यात्रा पर आधारित शोध — निम्बार्काचार्य, विष्णुस्वामी व माधवाचार्य सम्प्रदाय की 16 द्वार-परंपराओं की वर्तमान स्थिति। लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा प्रामाणिक जमीनी रिपोर्ट।"
Sanatan Vaishnav Bairagi Saints
रामानंदी वैष्णव बैरागी परंपरा के 36 द्वारापीठों की वर्तमान स्थिति पर एक मैदानी शोध — कौन-से जीवित हैं, कौन-से स्थानांतरित हुए और कौन-से खो गए।
सनातन भारत नया सवेरा (Sanatan Bharat Naya Savera Magazine)
Sanatan Bharat Naya Savera's 20th issue is now free in 190 countries — spreading Indian history, culture, and Sanatan values worldwide in Hindi & English.
अयोध्या राम जन्मभूमि के इतिहास और वैष्णव बैरागी अखाड़ों के इस महत्वपूर्ण शोध लेख का Excerpt (सारांश) नीचे दिया गया है, जिसे आप अपनी वेबसाइट, ब्लॉग या सोशल मीडिया के परिचय के रूप में उपयोग कर सकते हैं:
Excerpt (सारांश):
अयोध्या को सामान्यतः केवल श्रीराम की जन्मभूमि और रामभक्ति की नगरी के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके धार्मिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनछुआ पक्ष वैष्णव बैरागी अखाड़ों की परंपरा भी है। हालिया शोध-अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि वैष्णव बैरागी परंपरा केवल तीन प्रमुख अणियों (निर्वाणी, निर्मोही और दिगंबर) तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके अंतर्गत 18 विभिन्न शाखाओं और उप-समूहों का विस्तृत इतिहास रहा है। यह लेख पुराने दस्तावेजों, न्यायिक अभिलेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर अयोध्या और देश के अन्य तीर्थों में इन 18 वैष्णव बैरागी अखाड़ों की वास्तविक उपस्थिति और उनकी 'बैठकों' के इतिहास पर प्रकाश डालता है।
7 से 11 सितंबर 2026 तक अयोध्या की चतुर्थ शोध-यात्रा में इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने हनुमानगढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, मणिराम दास छावनी, निर्मोही व दिगंबर अखाड़ा, दशरथ महल और कनक भवन तक पहुँचकर वैष्णव बैरागी परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों का संकलन किया। महंत धर्मदास जी महाराज के साथ हुए विस्तृत साक्षात्कार में राम जन्मभूमि आंदोलन, FIR तथा न्यायालयीन दस्तावेजों से जुड़ी लगभग 300 पृष्ठों की सामग्री प्राप्त हुई। यह वृत्तांत आगामी पुस्तक "सनातन अयोध्या खंड 2" की शोध-यात्रा की पहली झलक प्रस्तुत करता है।
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 21वीं पुस्तक — वैष्णव बैरागी अखाड़ों की संघर्ष-गाथा, अयोध्या से।
Sanatan History & Heritage
अयोध्या के इतिहास को समझने के लिए केवल पुस्तकों के पन्ने ही पर्याप्त नहीं—स्थल, परंपराएँ, अखाड़े, संत-परंपरा और उपलब्ध प्रमाण भी महत्वपूर्ण हैं। एक पूर्व सैनिक इतिहासकार की यह शोध-यात्रा अयोध्या के उन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पक्षों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का प्रयास है, जो सामान्य पुस्तकों में विस्तार से नहीं मिलते। यह यात्रा प्रमाणित तथ्यों, स्थानीय परंपराओं और मौखिक कथनों को अलग-अलग रखते हुए शोध-सामग्री संकलित करती है।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
पूर्व सैनिक अधिकारी व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की चौथी अयोध्या शोधयात्रा — हनुमानगढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि व मणिराम दास छावनी में महंत नृत्यगोपाल दास जी से भेंट, वैष्णव बैरागी परंपरा पर शोध जारी।
"For centuries, history said Naga sadhus and Vaishnav Bairagis were sworn enemies. Vedic texts, royal records, and Persian archives say otherwise."
1760 के हरिद्वार कुम्भ में हज़ारों वैष्णव बैरागियों का नरसंहार हुआ, फिर भी इतिहासकारों ने उन्हें संन्यासी-फ़क़ीर की श्रेणी में मिला दिया। जानिए बैरागी परंपरा की असली, दबी हुई पहचान — हरिद्वार 1760, नासिक-उज्जैन 1789, गृहस्थ बैरागी सत्य, और 190 देशों तक फैली विरासत — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क के शोध में।
491 पन्नों की शोध-पुस्तक "सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा" अब 190 देशों में पहुँच चुकी है। जानें कैसे एक सेवानिवृत्त सैनिक ने 120 प्रमाणों के साथ सनातन इतिहास को दुनिया तक पहुँचाया।
"गरीबी में अपने भी मुंह मोड़ लेते हैं" — 1978 की विनाशकारी यमुना बाढ़ में रामनगर, सोनीपत के एक परिवार की आंखों देखी सच्ची कहानी। पढ़ें इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निंबार्क का मार्मिक संस्मरण।
24 वर्ष 4 दिन की सैन्य सेवा, दो प्रशंसा-पत्र और मानद नायब सूबेदार का सम्मान — अब कलम से समाज-सेवा में समर्पित लेखक की 20 पुस्तकें प्रकाशित
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
"सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी नरेश दास वैष्णव निम्बार्क का सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा शोध अब नाइजीरिया पहुँचा — प्रमाण संख्या 11, 190 देशों की विश्व-यात्रा जारी।"
रामनगर गन्नौर से फिनलैंड तक — जानें कैसे सेवानिवृत्त सैनिक व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 9 हिंदी व 11 English मिलाकर 20 पुस्तकों में सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा को प्रमाणों सहित संजोया।
इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की "सनातन अयोध्या" पुस्तक श्रीराम जन्मभूमि व भारतीय सभ्यता पर हिंदी-अंग्रेज़ी में प्रकाशित। चौथी अयोध्या शोध-यात्रा 7 सितंबर 2026 से शुरू। पढ़ें पूरी खबर।
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा
क्या निम्बार्काचार्य परंपरा के पास भी थी भगवद्गीता की अपनी व्याख्या? पुस्तक "सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा" से एक चौंकाने वाला प्रमाण — अब 190 देशों की शोध-यात्रा जर्मनी पहुँची।
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा शोध-श्रृंखला का प्रमाण-7: ऋग्वेद से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले तक — जानिए बैरागी साधु व गृहस्थ, दोनों की ऐतिहासिक वैष्णव पहचान का प्रामाणिक विवेचन।
(History / Religious Research)
प्रमाण नंबर-5: 1937 के Privy Council निर्णय (AIR 1938 PC 59) में दर्ज रामानंदाचार्य के बैरागियों के ठाकुरद्वारा का ऐतिहासिक न्यायिक प्रमाण — रामनगर गन्नौर से पाकिस्तान के Bhikhi तक की शोध-यात्रा।
विदिशा के बेसनगर में स्थित हेलियोडोरस गरुड़ स्तंभ, जो लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का है, वासुदेव-भागवत उपासना का प्राचीनतम अभिलेखीय प्रमाण है। जानिए यह अभिलेख सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहास को किस प्रकार प्रमाणित करता है — इतिहासकार नरेश दास वैष्णव 'निम्बार्क' के शोध पर आधारित।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
रामनगर गन्नौर के पूर्व सैनिक लेखक नरेश दास वैष्णव निंबार्क की जगतगुरु निंबार्काचार्य और सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित 11 पुस्तकें अब Amazon.es के माध्यम से स्पेन में उपलब्ध। पढ़ें पूरी गाथा।
हरियाणा के गाँव रामनगर, गन्नौर से निकले इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 7 पुस्तकें अब ताइवान के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मंच San Min Book Store पर उपलब्ध हैं।
सनातन भारत नया सवेरा (Sanatan Bharat Naya Savera Magazine)
'सनातन भारत — नया सवेरा' का 19वाँ अंक अब निःशुल्क उपलब्ध है — महाभारत, रामायण, सैन्य अनुशासन, वैष्णव बैरागी परंपरा और स्वतंत्रता दिवस विशेष रिपोर्ट सहित। संपादक: नरेश दास वैष्णव 'निम्बार्क'।
16 अगस्त 2026 को महलाणा रोड स्थित शेर सिंह बैरागी धर्मशाला में आयोजित प्रबुद्ध मिलन समारोह की रिपोर्ट — शिक्षा, संस्कार और 200 वर्षों के बैरागी इतिहास पर ऐतिहासिक सम्मेलन।
झज्जर के भापड़ोदा गांव के एक वैष्णव बैरागी परिवार की प्रेरक गाथा — पुलिस-सेवा, डाक-विभाग, रक्षा-उत्पादन, NIC और लंदन की Queen Mary University तक की अनुशासित यात्रा। संस्कार और सेवा की मिसाल।
एक गरीब किसान परिवार में जन्मे पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क को 15 अगस्त 2026 को अपने ही गाँव के राजकीय उच्च विद्यालय, रामनगर (गन्नौर), सोनीपत में मुख्य अतिथि बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इसी अवसर पर 1857 के महान क्रांतिकारी स्वामी बिरड़ दास बैरागी की दसवीं पीढ़ी के वंशज को सम्मानित किया गया तथा 61 मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। पढ़ें, मिट्टी से मातृभूमि की सेवा तक की यह प्रेरक गाथा।
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र केवल एक भौगोलिक नाम नहीं — यह भारतीय सभ्यता की स्मृति का केंद्र है। "सनातन कुरुक्षेत्र" में लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, 48 कोस क्षेत्र के 182 तीर्थों का प्रमाण-आधारित इतिहास प्रस्तुत करते हैं — जहाँ आस्था और तथ्य दोनों का सम्मान किया गया है।
प्रेरणादायक / व्यक्तित्व विकास: एक पूर्व सैनिक द्वारा छात्रों का मार्गदर्शन।
"गवर्नमेंट हाई स्कूल, रामनगर (गन्नौर) में 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह में 21 मेधावी विद्यार्थियों व 40 सांस्कृतिक प्रतिभागियों सहित कुल 61 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।"
वैकल्पिक (संक्षिप्त संस्करण):
"रामनगर गन्नौर के सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर 61 बच्चों का सम्मान — मेधावी विद्यार्थी व सांस्कृतिक प्रतिभाएं, दोनों को स्मृति-चिह्न व मेडल।"
वैकल्पिक (भावनात्मक शैली):
"अपनी पेंशन से बच्चों का हौसला बढ़ाते एक सेवानिवृत्त फ़ौजी — रामनगर गाँव में स्वतंत्रता दिवस पर 61 बच्चों के सम्मान की प्रेरक कहानी।"
पहला संस्करण अनुशंसित है क्योंकि इसमें स्थान, तिथि, संख्या और कार्यक्रम का प्रकार — सभी प्रमुख तथ्य संक्षेप में समाहित हैं, जो सर्च इंजन एवं पाठक दोनों के लिए उपयुक्त रहेगा।
"बागपत के ग्राम जोनमाना में जन्मे संजय कुमार वैष्णव अखाड़े के जांबाज़ पहलवान से 9 पैरा के वीर सैनिक बने। जानिए उनके शौर्य, बलिदान और अमर विरासत की संपूर्ण गाथा — 'बंदूक से कलम तक' शृंखला में।"
रामनगर गन्नौर, सोनीपत की धरती से शुरू हुई नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की शोध-यात्रा अब Amazon France तक पहुँच चुकी है। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित उनकी पुस्तकें अब अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक भी पहुँच रही हैं।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
रामनगर की धरती से उठी एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की कलम आज 6 महाद्वीपों के 40 अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच चुकी है। अठारह वर्षों के अथक शोध से जन्मी यह यात्रा — "बंदूक से कलम तक" — सनातन धर्म, वैष्णव बैरागी परंपरा और भारतीय इतिहास को विश्व-पटल पर स्थापित कर रही है।
सनातन धर्म एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्य
रामनगर से 18 वर्षों के शोध की यात्रा अब छह महाद्वीपों तक। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, कुरुक्षेत्र व स्वर्णप्रस्थ के इतिहास पर आधारित निःशुल्क पुस्तकें अब Academia.edu, Amazon, Walmart सहित विश्व के प्रमुख मंचों पर उपलब्ध।
हरियाणा के छोटे से गाँव रामनगर (गन्नौर, सोनीपत) से स्विट्ज़रलैंड स्थित विश्वविख्यात शोध मंच Zenodo तक — यह एक पूर्व सैनिक की साधना और संकल्प की गाथा है। लगभग 24 वर्षों तक भारतीय सेना में मातृभूमि की सेवा करने के पश्चात्, नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने कलम को अपना नया शस्त्र बनाया और सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क सम्प्रदाय तथा भारत के प्राचीन इतिहास पर प्रमाण-आधारित शोध को विश्व-पटल पर प्रस्तुत किया। उनकी पुस्तकें आज अंतरराष्ट्रीय शोध समुदाय द्वारा DOI सहित उद्धृत की जा रही हैं — यह प्रमाण है कि सत्य की खोज और अनुशासित परिश्रम से गाँव का एक साधारण सैनिक भी विश्व-मंच तक पहुँच सकता है।
हरियाणा के सोनीपत जनपद स्थित छोटे से गाँव रामनगर (गन्नौर) से आरंभ हुई एक साहित्यिक साधना आज विश्व के सबसे बड़े डिजिटल पुस्तकालय — इंटरनेट आर्काइव — तक पहुँच चुकी है। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर केंद्रित तेरह पुस्तकें अब सर्वथा निःशुल्क उपलब्ध हैं।
रामनगर (गन्नौर) की पावन धरती से आरंभ हुई एक साधना, जहाँ 422 वर्षों का अनसुना इतिहास दस्तावेज़ों में क़ैद था, आज जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और डेनमार्क तक अपनी पहुँच बना चुकी है। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर केंद्रित चौदह शोध-ग्रंथ अब Amazon.co.jp पर सहर्ष उपलब्ध हैं। "बंदूक से कलम तक" के इस सफ़र में एक सेवानिवृत्त सैनिक ने रणभूमि से तीर्थभूमि तक की यात्रा तय
Sanatan Dharma & Philosophy
वैष्णव बैरागियों की अयोध्या में भूमिका पर प्रमाण-आधारित शोध — 1855 का हनुमानगढ़ी संघर्ष, 1885 का महंत रघुवर दास मुकदमा, निर्मोही अखाड़ा और 2019 का सर्वोच्च न्यायालय निर्णय। नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की आगामी पुस्तक "सनातन अयोध्या" की शोध-यात्रा।
कुरुक्षेत्र की धरती, सरस्वती नदी और भगवान श्रीकृष्ण की अमर भूमि पर आधारित प्रामाणिक शोध-ग्रंथ। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा 18 वर्षों के शोध का परिणाम — पुराण, पुरातत्व व इतिहास के प्रमाणों सहित। हिंदी व अंग्रेज़ी में निःशुल्क उपलब्ध।
Sanatan History & Heritage
पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 18वीं पुस्तक "सनातन कुरुक्षेत्र" प्रकाशित। 48 कोस, 400 किमी की शोध यात्रा से रचित 481 पृष्ठों का यह ग्रंथ सृष्टि, सरस्वती और श्रीकृष्ण की अमर भूमि का प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करता है।
हरियाणा के रामनगर गाँव के पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें अब ब्राज़ील के अमेज़न पर उपलब्ध। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित ये ग्रंथ अब भारत से दक्षिण अमेरिका तक पहुँचे
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
"चेक गणराज्य के पूर्व राजदूत श्री पी. आर. स्वामी जी ने नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तक 'सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा: वेदों से आधुनिक भारत तक' के प्रकाशन पर भेजा हार्दिक बधाई संदेश। पढ़ें पूरी
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
120 प्रमाणों और 492 पृष्ठों में समाहित सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का ऐतिहासिक शोधग्रंथ अब सात देशों की यात्रा तय कर दक्षिण अफ्रीका पहुँच चुका है। लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क का यह ग्रंथ वैदिक युग से आधुनिक भारत तक की प्रामाणिक गाथा प्रस्तुत करता है।
Sanatan History & Heritage
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — पूर्व सैनिक, इतिहासकार एवं सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा शोधकर्ता। 24 वर्ष सैन्य सेवा, 18 वर्ष शोध, 18 पुस्तकें, 190+ देशों में उपलब्ध। वेदों से आधुनिक भारत तक का गुमनाम इतिहास।
From Rifle to Pen: An Indian Soldier's Sanatan Dharma Journey Reaches America
After serving the nation in the Indian Army, including the Kargil conflict and the United Nations Peacekeeping Mission, retired Subedar Naresh Das Vaishnav Nimbark dedicated his life to documenting the forgotten history of the Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition. Based on nearly 18 years of research and more than 120 historical documents, his books are now reaching readers worldwide. His latest works are available through Amazon and Walmart in the United States, helping introduce India's spiritual and historical heritage to an international audience.
कारगिल के मोर्चे से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के शोध तक — पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव 'निम्बार्क' की वह प्रेरक यात्रा, जिसने भारत सहित 7 देशों के पाठकों को भावुक कर दिया। पढ़ें पूरी गाथा।
(History / Religious Research)
"दावों से नहीं, दस्तावेज़ों से बोलेगा इतिहास" — इसी उद्देश्य के साथ रचित यह ग्रन्थ सनातन वैष्णव बैरागी समाज के वैदिक कालखण्ड से लेकर आधुनिक भारत तक के गौरवशाली इतिहास को प्रामाणिक स्रोतों — वेद, उपनिषद्, पुराण, पांचरात्र साहित्य, शिलालेख, ताम्रपत्र तथा नृजातीय (ethnographic) अभिलेखों — के आधार पर प्रस्तुत करता है। लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार एवं स्वतंत्र इतिहासकार, ने वर्षों के अनुशासित शोध से इस कृति को समाज को समर्पित किया है।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इसे थोड़ा और संक्षिप्त (होमपेज बैनर हेतु एक पंक्ति) या और विस्तृत (पूर्ण About Page) रूप में भी तैयार कर दूँ?
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा जर्मनी के बाद अब नीदरलैंड्स पहुँची। पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की नई शोधकृति "वेदों से ब्रिटिश अभिलेखों तक" इसी महीने प्रकाशित होगी।
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर 100+ ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित शोध-ग्रंथ अब जर्मनी पहुँचा। पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 18 वर्षों की खोज — इसी महीने प्रकाशित।
1857 में सुबाथू के राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी रामप्रसाद बैरागी ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रांतिकारियों के लिए गुप्त संदेश-तंत्र तैयार किया था, जिसकी कीमत उन्हें फाँसी देकर चुकानी पड़ी। 169 साल बाद भी उनका स्मारक अधूरा है — पर एक सेवानिवृत्त सैनिक की 18 साल की मुहिम से आज उनकी गाथा 190 देशों के पाठकों तक पहुँच चुकी है।
Sanatan History & Heritage
सनातन वैष्णव बैरागी संतों-योद्धाओं की गुमनाम बलिदान-गाथा — जिन्हें इतिहास ने भुला दिया। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के 18 वर्षों के शोध पर आधारित प्रामाणिक इतिहास, निःशुल्क उपलब्ध।
सनातन कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र में छिपे भीष्म कुंड, कर्ण का टीला, ब्रह्म तीर्थ जैसे 17 से अधिक लुप्त तीर्थों की सत्य खोज। नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की ऐतिहासिक शोध यात्रा — सृष्टि से सतलुज तक श्रीकृष्ण की अमर भूमि का प्रमाणिक इतिहास।
Sanatan Dharma & Philosophy
"सनातन भारत नया सवेरा" मासिक ई-पत्रिका का अंक 18, जुलाई 2026 अब उपलब्ध। रामचरितमानस, महाभारत व निम्बार्क सम्प्रदाय पर आधारित यह निःशुल्क पत्रिका 190+ देशों में पढ़ी जा रही है।
Sanatan Dharma & Philosophy
"एक सैनिक जो कोमा से लौटा, बंदूक छोड़कर कलम उठाई, और आज उसकी 14 किताबें 190 देशों में पढ़ी जा रही हैं। जापान में 6 किताबें बिल्कुल FREE — जानिए वैष्णव बैरागी योद्धाओं की वह गाथा जिसे इतिहास ने भुला दिया।"
"पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 18 वर्षों की खोज से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर 14 पुस्तकें लिखीं — अब 190 देशों में उपलब्ध। पढ़ें भारत का भूला इतिहास।"
राजनीति / नियुक्ति समाचार
पटौदी रियासत व अंग्रेज़ों दोनों से लोहा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानी छोटेलाल वैष्णव की जेल-यातना की गाथा, जो आज उनके परिवार में उषा प्रियदर्शी की हरियाणा महिला आयोग अध्यक्ष नियुक्ति तक पहुँची।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
"नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, इतिहासकार। अठारह वर्षों का शोध, चौदह ग्रंथ, सनातन वैष्णव बैरागी राज-परंपरा के पुनर्जागरण की गाथा। सिएरा लियोन से सनातन तक की यात्रा।"
मूँगी ग्राम — जहाँ भगवान निम्बार्काचार्य ने अवतार लिया, आज वह तीर्थ उपेक्षित है। पढ़ें एक पूर्व सैनिक की वह मार्मिक यात्रा, जिसने इस भूली हुई जन्मभूमि को पुनः सम्मान दिलाने का संकल्प लिया।
रामनगर गाँव की 422 वर्षों की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक यात्रा का जीवंत दस्तावेज़ — सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, कुलगुरु शृंखला और गाँव की प्राचीन धरोहर की संपूर्ण गाथा।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
हम्पी-किष्किंधा की पावन भूमि पर शबरी ने भगवान राम को अर्पित किए जूठे बेर — जानिए वह मार्मिक प्रसंग जो वैष्णव बैरागी परंपरा की आधारशिला बना। एक सैनिक की अनुसंधान-यात्रा।
18 जून 1858, ग्वालियर — रानी लक्ष्मीबाई की अंतिम रक्षा में 745 बैरागी साधुओं ने प्राण न्योछावर किए। एक पूर्व सैनिक की शोध-यात्रा ने उजागर किया यह विस्मृत बलिदान। पढ़ें पूरी गाथा।
सोनीपत का प्राचीन नाम स्वर्णप्रस्थ था — महाभारत काल से जुड़ा 3,526 वर्षों का अनसुना इतिहास। 24 वर्ष सेना में सेवा देने वाले नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 18 वर्षों की शोध-यात्रा पर आधारित यह गाथा अब निःशुल्क उपलब्ध है।
वैष्णव बैरागी सेना एवं इतिहास
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, जिसे मुख्यधारा के इतिहास ने अनदेखा किया, अब Amazon.ae के माध्यम से UAE के पाठकों तक पहुँच रही है। जानें निंबार्क संप्रदाय के गौरवशाली इतिहास एवं वैष्णव बैरागी सैनिकों की अनकही गाथा।
सैन्य अनुभव एवं समाज-सेवा
कारगिल युद्ध के भूतपूर्व सैनिक व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की भगवानदास अस्पताल, सोनीपत में सफल उपचार-यात्रा — जहाँ अस्पताल के स्वामी डॉ. शेखर पामनानी स्वयं कुशलक्षेम पूछने पधारे। पढ़ें पूरी प्रेरणादायी गाथा।
इतिहास > सनातन धर्म > निम्बार्क संप्रदाय
हरियाणा की बुढ़िया बनी भूमि में छिपा है निम्बार्क संप्रदाय का 600 वर्ष पुराना इतिहास। हरिव्यासदेवाचार्य के शिष्य स्वभूरामदेवाचार्य से वृंदावन के काठिया बाबा तक की अटूट गुरु-परंपरा — पढ़ें पूर्ण शोध।
Sanatan History & Heritage
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित पुस्तकें अब दक्षिण कोरिया के Yes24 बुकस्टोर पर उपलब्ध। पूर्ण मूल्य-सूची व विवरण यहाँ पढ़ें।
सनातन धर्म एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्य
एक सेवानिवृत्त फौजी की 18 वर्षों की शोध-साधना अब अमेरिका तक पहुँची — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा पर आधारित पुस्तकें ThriftBooks.com (USA) पर उपलब्ध। भारत, यूरोप और अब अमेरिका में पढ़ें।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
जो इतिहास की किताबों में नहीं मिला — वह एक सेवानिवृत्त फौजी नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 18 वर्षों के शोध से लिखा। सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा और निम्बार्क सम्प्रदाय का वह अनसुना इतिहास जो आज भारत से आयरलैंड तक पहुँच चुका है। पढ़ें पूरी विजयगाथा।
Sanatan Vaishnav Bairagi Saints
एक फौजी बेटे की कलम से — पिता नारायण दत्त वैष्णव की वह सच्ची कहानी जिन्होंने 325 रुपए की पूरी तनखा घर भेजी और जिंदगी भर किसी का बुरा नहीं चाहा।
नेपाल में निम्बार्क संप्रदाय की वैष्णव बैरागी परंपरा सदियों से जीवित है। कारगिल योद्धा एवं UN वेटरन नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 14 पुस्तकें नेपाल सहित 190 देशों में Amazon, Flipkart, Notion Press पर उपलब्ध हैं।
Sanatan History & Heritage
Naresh Das Vaishnav Nimbark — Retired Subedar, Kargil War Veteran, UN Peacekeeper & Sanatan Historian. Author of 14 books on Vaishnav Bairagi tradition, read in 190 countries across 9 nations and 20+ bookstores.
48 कोस कुरुक्षेत्र — जहाँ सृष्टि आरम्भ हुई, सरस्वती बही, गीता जन्मी। कारगिल योद्धा नरेश दास वैष्णव निम्बार्क का ऐतिहासिक शोध-ग्रंथ। वेद और विज्ञान दोनों से प्रमाणित।
कारगिल योद्धा नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने रामनगर का 422 वर्षों का अनसुना इतिहास लिखा — अब जर्मनी के Hugendubel में उपलब्ध। 195 देशों में पढ़ा जाएगा।
भारत के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जिसे पाठ्यपुस्तकों से मिटा दिया गया। एक हाथ में तुलसी की माला, दूसरे में राजदंड — सनातन वैष्णव बैरागी शासकों की अजेय गाथा अब अंग्रेज़ी पुस्तक "Rosary and Thorns" में। 18 वर्षों के शोध पर आधारित — लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
सनातन कुरुक्षेत्र — जहाँ ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, सरस्वती नदी बही और श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का अमर उपदेश दिया। पूर्व सैनिक व सनातन वैष्णव इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 15वीं ऐतिहासिक कृति — 48 वर्षों की तीर्थयात्रा (1978 से 2026) का प्रत्यक्ष दस्तावेज़। Amazon, Flipkart, Notion Press पर 190 देशों में उपलब्ध।
ऑस्ट्रेलिया के Booktopia पर उपलब्ध
भारत का छुपा इतिहास — महंत बने
महाराजा, Rosary and the Throne और
स्वर्णप्रस्थ की गाथा। रोम से 1000 साल
पुराने सोनीपत का 3526 वर्षों का अनसुना
इतिहास। पूर्व सैनिक व सनातन वैष्णव
इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
की तीन ऐतिहासिक कृतियाँ — Amazon,
Flipkart, Notion Press पर 195 देशों में।
स्वर्णप्रस्थ की गाथा — रोम से 1000 साल
पुराने सोनीपत का 3526 वर्षों का वह अनसुना
इतिहास जो महाभारत काल से चला आ रहा है।
पूर्व सैन्य अधिकारी व सनातन वैष्णव इतिहासकार
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की ऐतिहासिक कृति —
Amazon, Flipkart, Notion Press पर उपलब्ध।
195 देशों में वितरण।
कारगिल योद्धा व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की शोध पुस्तक "बंदा बैरागी — इतिहास का पुनर्पाठ" के लिए राष्ट्रव्यापी अपील — आपके क्षेत्र में वीर बंदा बैरागी के नाम पर चौक, सड़क, विद्यालय, धर्मशाला या स्मारक की फोटो भेजें।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
रामनगर गन्नौर सोनीपत की चौपाल में 22 जून 2026 को कारगिल योद्धा व UN Peacekeeper नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकों का भव्य विमोचन — हरिभूमि व एक्शन इंडिया में प्रकाशित — 190 देशों में पठनीय।
लेखक और शोधकर्ता / सनातन वैष्णव इतिहास
"सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, कारगिल योद्धा व UN Peacekeeper नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — निम्बार्क संप्रदाय, वैष्णव बैरागी परंपरा व स्वर्णप्रस्थ के प्रामाणिक इतिहास के अंतरराष्ट्रीय लेखक। 18+ पुस्तकें — 190 देशों में उपलब्ध।"
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार एवं अन्तर्राष्ट्रीय लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने १९ जून २०२६ को गाँव रामनगर, तहसील गन्नौर, जिला सोनीपत की ऐतिहासिक चौपाल में ६ हिंदी एवं ५ अंग्रेज़ी — कुल ११ पुस्तकों का भव्य विमोचन किया। १८ वर्षों के अथक शोध पर आधारित नवीनतम कृति 'स्वर्णप्रस्था की गाथा' सोनीपत के ३५२६ वर्षों के महाभारतकालीन इतिहास को उजागर करती है। बंदूक से कलम तक की इस अद्भुत यात्रा में एक सैनिक ने सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास को विश्व के १९५ देशों तक पहुँचाया।
लेखक और शोधकर्ता / सनातन वैष्णव इतिहास
जिस नगर की माँग स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से की — और दुर्योधन बोला, सुई की नोक भर भी नहीं दूँगा। उसी एक हठ से महाभारत का महायुद्ध हुआ। वह नगर था स्वर्णप्रस्थ — आज का सोनीपत। 3526 वर्षों का यह अनसुना इतिहास पहली बार एक पुस्तक में। यौधेय गणराज्य का 1000 वर्षीय शासन, बंदा बैरागी का प्रथम सैनिक मुख्यालय सोनीपत 1709, सतकुंभा कुंड जो 5000 वर्षों से कभी नहीं सूखा — 18 वर्षों की शोध यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज़। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, सेवानिवृत्त नायब सूबेदार एवं UN वेटरन, भारतीय सेना। 195 देशों में पूर्णतः निःशुल्क।
Sonipat's original name is Swarnprastha. The untold history of 3526 years from Mahabharata to present. Free book by Naresh Das Vaishnav Nimbark.
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत) का 3526 वर्ष पुराना
अनसुना महाभारतकालीन इतिहास — सेवानिवृत्त
नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा
लिखित निःशुल्क पुस्तक। पढ़ें, शेयर करें,
इतिहास जानें।
बंदूक छोड़ी, कलम उठाई — और 190 देशों ने सुना। कारगिल वेटरन, UN शांति सैनिक, सनातन वैष्णव इतिहासकार। 13+ पुस्तकें | 53,100+ Google Results | CISF, Gita Press, Maj. Gen. Bakshi द्वारा मान्यता।
सनातन भारत नया सवेरा (Sanatan Bharat Naya Savera Magazine)
सनातन भारत नया सवेरा — नरेश दास वैष्णव 'निम्बार्क' की निःशुल्क हिंदी मासिक ई-पत्रिका। सनातन इतिहास, दर्शन और वैष्णव परम्परा — 195 देशों में उपलब्ध।
Sanatan Vaishnav Bairagi warriors have protected Hindu Dharma for over 5122 years — since Jagadguru Nimbarkacharya in 3096 BC. Retired Indian Army officer Naresh Das Vaishnav Nimbark uncovers this hidden history in 13 books now available in 195 countries.
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
हरियाणा के सेवानिवृत्त सैन्य इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क और पंजाब बैरागी वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन गुरमीत बावा जी के मध्य 15 मिनट की ऐतिहासिक वार्तालाप।
भारतीय सेना से सेवानिवृत्त, UN शान्ति सेना में
भारत का प्रतिनिधित्व, कोमा से वापसी और
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर २० पुस्तकें —
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की अजेय जीवन-गाथा।
पाँच महाद्वीपों तक पहुँचने वाली निःशुल्क पत्रिका
"सनातन भारत नया सवेरा" के संस्थापक-सम्पादक।
वीर बंदा बैरागी पर 356 वर्षों का अनसुना सत्य।
सेवानिवृत्त सैनिक-इतिहासकार नरेश दास वैष्णव
निम्बार्क की 18 वर्षों की शोध यात्रा। मुगल
अभिलेख, ब्रिटिश दस्तावेज़ और सनातन वैष्णव
बैरागी परंपरा के प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित
भारत की 14वीं पुस्तक।
महाभारत युद्ध की समाप्ति के पश्चात् भगवान
श्रीकृष्ण ने माता कुन्ती से कहा —
"बुआ, आज जो चाहो माँग लो।"
संसार की हर माँ सुख माँगती है।
पुत्रों की दीर्घायु माँगती है।
राज्य और वैभव माँगती है।
किन्तु माता कुन्ती ने माँगा — दुःख।
क्योंकि उन्हें पता था —
सुख में प्रभु भूल जाते हैं,
दुःख में प्रभु याद आते हैं।
विपदः सन्तु ताः शश्वत्
तत्र तत्र जगद्गुरो।
भवतो दर्शनं यत्स्याद्
अपुनर्भवदर्शनम्॥
— श्रीमद्भागवत १.८.२५
यही है सनातन भक्ति का
सर्वोच्च रहस्य।
7 जून 2026 को ग्राम लूम्ब, तहसील बड़ौत, जिला बागपत में वीर बंदा बैरागी का 310वाँ शहीदी दिवस मनाया गया। पूर्व नायब सूबेदार एवं अन्तर्राष्ट्रीय लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 9 पुस्तकों का लोकार्पण। 6 राज्यों से 700 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित।
शहीदी दिवस एवं ऐतिहासिक आयोजन
₹3,529 की पेंशन से शुरू हुई एक पूर्व सैनिक की यात्रा आज अन्तर्राष्ट्रीय लेखक तक पहुँची। 7 जून 2026 को ग्राम लूम्ब, बड़ौत, बागपत में वीर बंदा बैरागी के 310वें शहीदी दिवस पर 700+ लोगों की उपस्थिति में नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 9 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण हुआ।
तीर्थ-इतिहास / Tirth History
महाभारत काल में जिस पावन सरोवर के तट पर यक्ष ने युधिष्ठिर से धर्म के प्रश्न पूछे थे — वह सरोवर आज भी जीवित है। हरियाणा की इस पुण्यभूमि पर सन् १७५० में छुई खदान के प्रथम बैरागी राजा रूप दास बैरागी ने दीक्षा ग्रहण की — और एक ऐसी परम्परा की नींव पड़ी जो आज भी अखण्ड है। जानिए अस्थल तिरखु तीर्थ का वह अनसुना इतिहास — जो तीन युगों को अपने भीतर समेटे हुए है।
निंबार्क संप्रदाय के आचार्य एवं वैष्णव बैरागी संत
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, UN Peacekeeper, लेखक एवं इतिहासकार। 24 वर्षों की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा (1984–2008) के पश्चात् 18 वर्षों से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क सम्प्रदाय और संत-योद्धा परंपरा पर शोध एवं लेखन। 11+ पुस्तकें, 190+ देशों में उपलब्ध। बंदूक से कलम तक — यही मेरा मिशन, यही मेरी पहचान।
Naresh Das Vaishnav Nimbark — Global Presence Report 2026. International Author, Historian & Retd. Indian Army Veteran. 11+ Books on Amazon KDP, Google Play Books in 70+ countries. 53,100+ Google results. Sanatan Vaishnav Bairagi tradition researcher.
सन 2000 में सिएरा लियोन, पश्चिम
अफ्रीका में जब उग्रवादियों ने
नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव
निम्बार्क को बंदी बनाया — तब
मृत्यु सामने खड़ी थी।
उस रात उन्होंने एक वादा किया —
"यदि बचा तो सनातन परम्परा के
उन गुमनाम योद्धाओं को खोजूँगा
जिन्हें इतिहास ने भुला दिया।"
वे बचे। और उन्होंने अपना वादा
निभाया।
हरियाणा के गन्नौर, सोनीपत के
ग्राम रामनगर में जन्मे इस पूर्व
फौजी ने 24 साल देश की सेवा की।
कारगिल युद्ध लड़ा। UN Veteran
बने। और सेवानिवृत्ति के बाद
18 वर्षों तक गाँव-गाँव, मठ-मठ,
तीर्थ-तीर्थ भटककर सनातन
वैष्णव बैरागी परम्परा का वह
इतिहास खोजा जो सदियों से
दबा पड़ा था।
आज उनकी 11 पुस्तकें Amazon,
Google Play Books और Notion
Press पर उपलब्ध हैं और विश्व
के हर कोने में पहुँच रही हैं।
यह पुस्तकें केवल किताबें नहीं —
यह उस वादे का प्रमाण हैं जो
एक रात सिएरा लियोन में किया
गया था।
सनातन वैष्णव बैरागी राजाओं का वो इतिहास जो पाठ्यक्रम में नहीं — 18 वर्षों के क्षेत्र-शोध पर आधारित। लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।
हरियाणा के छोटे से गाँव रामनगर में एक गरीब वैष्णव किसान परिवार में जन्मे नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 24 वर्ष भारतीय सेना में देश की सेवा की। UN Veteran के रूप में विश्व-मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। सेवानिवृत्ति के बाद 18 वर्षों तक गाँव-गाँव, मठ-मठ, तीर्थ-तीर्थ भटककर सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के उस इतिहास को खोजा — जिसे सदियों से भुला दिया गया था। आज उनकी चार पुस्तकें अमेरिका में प्रकाशित होकर विश्व के हर कोने में पहुँच चुकी हैं।
महायोद्धा वीर बंदा बैरागी — वह वैष्णव सन्त जिन्होंने सरहिंद फ़तह किया, किसानों को भूमि दी और 9 जून 1716 को अमानवीय यातनाओं के बीच भी धर्म नहीं छोड़ा। जानिए उनकी अमर गाथा और 7 जून 2026 बागपत शहादत दिवस आयोजन की सम्पूर्ण जानकारी।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
पाण्डोरी धाम — वह रामानन्दी तीर्थ जिसके
सामने मुगल सम्राट जहाँगीर नतमस्तक हुआ।
५०० वर्ष पुरानी वैष्णव बैरागी परंपरा का
सम्पूर्ण इतिहास। लेखक: नरेश दास वैष्णव
निम्बार्क।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी ने
वैष्णव बैरागी समाज के सुपुत्र, वाणिज्यिक पायलट
कैप्टन योगेश बैरागी जी को हरियाणा राज्य सामाजिक
कल्याण बोर्ड, चण्डीगढ़ का चेयरमैन नियुक्त किया है।
कॉकपिट से चेयरमैन की कुर्सी तक — पढ़ें एक
प्रेरणादायी उड़ान की सम्पूर्ण गाथा।
५१२२ वर्ष पूर्व सतयुग में हंस भगवान ने गंडकी तट पर जो दिव्य परंपरा प्रज्वलित की — वह आज भी निम्बार्क धाम में अखंड जलती है। सनत कुमार से नारद, नारद से निम्बार्काचार्य — एक भी कड़ी नहीं टूटी।
एक बादशाह ने इस तीर्थ का नाम बदला। एक प्रधानमंत्री ने न्याय किया। और एक सैनिक ने — दशकों की साधना के बाद — यह सम्पूर्ण सत्य २७४ पृष्ठों में लिख दिया।
यह ग्रंथ केवल इतिहास नहीं — यह सनातन वैष्णव परंपरा का जीवित प्रमाण है।
Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
हरियाणा के एक साधारण वैष्णव परिवार से उठकर भारतीय सेना में देश सेवा करने वाले और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने वर्दी उतारने के बाद कलम उठाई। 18 वर्षों की निरंतर साधना, 11 पुस्तकें और 200 देशों तक पहुँच — यह है श्री राधा-कृष्ण की कृपा और एक सच्चे वैष्णव फौजी की अटल तपस्या की अविश्वसनीय गाथा।
सनातन वैष्णव बैरागी — वो योद्धा संन्यासी जिन्होंने एक हाथ में माला और दूसरे में तलवार थामी। पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की कलम से विस्मृत इतिहास का वैश्विक शंखनाद।
एक गरीब किसान का बेटा। एक सैनिक जो कारगिल और संयुक्त राष्ट्र तक गया। और एक इतिहासकार जिसने वह लिखा — जो सदियों से किसी ने नहीं लिखा।
सनातन वैष्णव बैरागी समाज के ७४५ शहीद — जिन्होंने १८५७ में प्राण दिए। जिनकी प्रतिमा किसी चौक पर नहीं। जिनका नाम किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं।
नायब सूबेदार (रिटायर्ड) नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने वह युद्ध लड़ा — जो सरकारें हार गईं। प्रधानमन्त्री से रेल मन्त्रालय तक। RTI से Secretariat तक। और १० पुस्तकों से अमेरिका तक।
Sanatan Vaishnav Bairagi Saints
*२४ मई २०२६। हरिद्वार। गंगा माँ के पवित्र तट पर।*
मैं वह बालक हूँ जो कभी गरीबी में पला।
मैं वह सैनिक हूँ जो कभी सीमा पर खड़ा रहा।
और आज — परमात्मा की अपरम्पार कृपा से — **सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा** की वह पुस्तक, जो **सदियों के दबे इतिहास को उजागर करती है,** "**मिनी अटल**" डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार जी के हाथों में पहुँची।
वह इतिहास — जिसमें **दिल्ली के सिंहासन पर वैष्णव बैरागी राजवंश के पचास वर्ष** हैं।
वह इतिहास — जिसमें **छत्तीसगढ़ की दो रियासतों पर दो सौ वर्ष का निम्बार्क शासन** है।
वह इतिहास — जो **पाठ्यपुस्तकों से मिटाया गया, पर मिटा नहीं।**
**"महन्त बने महाराजा"** — अमेरिका से प्रकाशित।
जय श्री राधे-कृष्ण 🙏
भारतीय इतिहास में अनेक ऐसे अध्याय हैं जो समय, राजनीतिक परिवर्तनों और वैचारिक संघर्षों के कारण धीरे-धीरे विस्मृत होते चले गए। वैष्णव बैरागी परम्परा का इतिहास भी उन्हीं में से एक है। सामान्यतः बैरागियों को केवल साधु-संत परम्परा से जोड़ा जाता है, किन्तु प्राचीन ग्रन्थों, वंशावलियों और उन्नीसवीं शताब्दी के दुर्लभ प्रकाशनों के अध्ययन से एक अलग चित्र उभरता है।
कुछ ऐतिहासिक स्रोत संकेत करते हैं कि इन्द्रप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली) में एक समय वैष्णव बैरागी राजवंश का प्रभाव था। विशेष रूप से “हरिप्रेम बैरागी” नाम का उल्लेख इस विषय को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बना देता है।
यह लेख उपलब्ध स्रोतों के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित एक शोधपरक प्रस्तुति है।
सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा को समर्पित मासिक ई-पत्रिका। अंक १६, मई २०२६। हिन्दी और अंग्रेज़ी में निःशुल्क उपलब्ध। सम्पादक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क। www.nareshswaminimbark.in
The untold story of Gulab Das Vaishnav — a fearless freedom fighter from Chhui Khadan, Chhattisgarh who led the Jungle Satyagraha against British rule. A pride of the Vaishnav Bairagi community. By Naresh Das Vaishnav Nimbark.
Nimbark Sampradaya History
जगद्गुरु भगवान श्री निम्बार्काचार्य जी — सुदर्शन चक्र के अवतार, द्वैताद्वैत दर्शन के प्रवर्तक, और श्री राधा-कृष्ण युगल उपासना की सर्वप्राचीन परंपरा के संस्थापक। सनातन वैष्णव बैरागी इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा शोधपूर्ण विवेचन।
इतिहास अक्सर महलों की चौखट पर जाकर दम तोड़ देता है, लेकिन सच आज भी उन मठों और अखाड़ों की धूल में सुरक्षित है जहाँ 'माला' और 'भाला' एक साथ तपस्या करते थे। मेरी यात्रा 'बंदूक से कलम तक' की शुरुआत किसी पुस्तकालय के बंद कमरों में नहीं, बल्कि ग्वालियर की उस पवित्र माटी से हुई, जहाँ आज भी हवाओं में 1857 के बारूद की गंध और संतों के बलिदान की गूंज सुनाई देती है
"12 मई 1710 का दिन भारतीय इतिहास में न्याय और प्रतिशोध की महागाथा है। जानिए कैसे महायोद्धा वीर बंदा बैरागी ने चप्पड़चिड़ी के मैदान में मुगलों के अहंकार को चूर-चूर कर साहिबजादों की शहादत का बदला लिया। सरहिंद विजय की पूरी सच्चाई और मेरी आगामी 9वीं पुस्तक 'वीर बंदा बैरागी' की पहली झलक के लिए यहाँ पढ़ें।"
"क्या आप जानते हैं कि सुदर्शन चक्र के अवतार भगवान निंबार्काचार्य का जन्मस्थान कहाँ है? महाराष्ट्र के मुंगी (पैठण) में स्थित 5125 साल पुराने इस पावन मंदिर की अनकही गाथा और मेरी उस प्रतिज्ञा की कहानी, जो इस पवित्र तीर्थ के सम्मान को पुनर्स्थापित करने के लिए है। पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें।"
Biography & Historical Research
"24 साल भारतीय सेना में सेवा के बाद, रिटायर्ड नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की गाँव की मिट्टी से इंटरनेशनल ऑथर बनने की अविश्वसनीय यात्रा। बैरागी रियासतों का इतिहास, निम्बार्क संप्रदाय और सैन्य अनुभवों पर आधारित उनकी विश्व प्रसिद्ध किताबों और शोध के बारे में जानें।"
24 साल देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद, अब एक पूर्व सैनिक ने अपने इतिहास की रक्षा के लिए कलम उठाई है। पढ़िए, कैसे एक फौजी भाई ने 18 साल के कठिन शोध के बाद बैरागी राजाओं और उनके 200 वर्षों के अखंड शासन के उस गौरवशाली इतिहास को खोज निकाला, जिसे दुनिया से छिपाकर रखा गया था।
"24 वर्षों तक सरहदों की रक्षा करने वाली एक फौजी की नज़र से देखिए भारत का वह इतिहास, जिसे मुख्यधारा की पुस्तकों ने भुला दिया। पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क के 18 वर्षों के गहन शोध से उपजी वीर संतों, बैरागी योद्धाओं और विस्मृत रियासतों की अनकही गाथाएँ। जब बंदूक की जगह कलम लेती है, तो जागती है सनातन चेतना।"
"सैन्य वर्दी से लेकर शोधकर्ता की कलम तक, 18 वर्षों का मेरा संघर्ष आज निमाना धाम की चौखट पर पूर्ण हुआ। सिएरा लियोन की अशांत धरती से लेकर अपने पूर्वजों की पावन तपस्थली तक की इस यात्रा में मुझे न केवल अपना इतिहास मिला, बल्कि वह अदृश्य आशीर्वाद भी मिला जिसने मेरे जीवन को सार्थक बना दिया। पढ़िए, कैसे एक पूर्व सैनिक ने अपनी जड़ों को खोजने के लिए सदियों पुराने इतिहास के पन्ने पलटे।"
"भारतीय सेना के गौरवशाली 24 वर्षों के सफर से लेकर 'वैष्णव सेवक' पत्रिका के पन्नों तक—लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की जीवन यात्रा अनुशासन, शौर्य और अटूट भक्ति का अद्भुत प्रमाण है। उदयपुर से प्रकाशित इस प्रतिष्ठित पत्रिका ने हाल ही में उनके सैन्य योगदान और सनातन धर्म के शोध कार्यों को विशेष स्थान दिया है। पढ़िए, कैसे एक सैनिक की 'बंदूक से कलम तक' की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है।"
"जब इतिहास की किताबों ने मौन साधा, तब एक सैनिक की कलम ने मोर्चा संभाला। जानिए 18 वर्षों के कठिन शोध का वह निचोड़, जिसने मुगलों से लोहा लेने वाले वैष्णव बैरागी योद्धाओं की विस्मृत गाथाओं को फिर से जीवित कर दिया है। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि हर सनातनी के स्वाभिमान का विजय शंखनाद है जो अब विश्व के 10+ बड़े संस्थानों पर अपनी धमक दे रहा है। क्या आप तैयार हैं उस सच को जानने के लिए जिसे सदियों तक दबाया गया?"
"दिल्ली की कड़ाके की ठंड से निकलकर रामेश्वरम के नीले समंदर तक—जानिए एक पूर्व सैनिक और शोधकर्ता की दृष्टि से भारत के दक्षिण धाम की दिव्य गाथा। पंबन ब्रिज का रोमांच, धनुषकोटि की वीरानगी और माता सीता द्वारा निर्मित रेत के शिवलिंग का पौराणिक सत्य। श्रद्धा और इतिहास के संगम की एक ऐसी यात्रा, जो आपको घर बैठे ही महादेव और श्री राम के चरणों में ले जाएगी।"
"पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने राजकीय उच्च विद्यालय रामनगर में बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सड़क सुरक्षा के गुर सिखाए। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का यह अनूठा मिशन देखें।"
प्रेरणादायक / व्यक्तित्व विकास: एक पूर्व सैनिक द्वारा छात्रों का मार्गदर्शन।
24 वर्ष सेना में देश सेवा के बाद अब कलम से समाज सुधार की राह पर। पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने गन्नौर के रामनगर स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। जानिए कैसे एक पूर्व सैनिक की प्रेरणा से 21 मेधावी छात्र हुए सम्मानित और युवाओं में जागी देशभक्ति की अलख।"
14 जनवरी 2019 को हरियाणा के रामनगर (गन्नौर) से शुरू हुई हमारी 9 दिवसीय द्वारका-सोमनाथ यात्रा का संपूर्ण वृत्तांत। एक पूर्व सैनिक और लेखक की दृष्टि से जानिए जामनगर की 'छोटी काशी', द्वारकाधीश के जगत मंदिर, भेंट द्वारका की समुद्री यात्रा और प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव के दर्शन का अनुभव। इस लेख में ठहरने की व्यवस्था, बजट और रास्तों की वह 'धरातल की जानकारी' है, जो आपकी आगामी यात्रा को सुगम बनाएगी।"
Ramnagar Ganaur से शुरू हुई यह बद्रीनाथ यात्रा 2021 केवल एक सफर नहीं, बल्कि आस्था, संघर्ष और दिव्य अनुभूति की कहानी है। रास्ते की कठिनाइयों और जोशीमठ की चुनौती के बीच जब बद्री विशाल के दर्शन हुए, तो हर कष्ट तुच्छ लगा। माना गांव, व्यास गुफा और सरस्वती नदी के दर्शन के साथ यह यात्रा जीवन को नई दिशा देने वाला अनुभव बन गई।
भक्तमाल की रचना में सुमेरु के रूप में श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के चयन की दिव्य कथा वृंदावन में हुए संत भंडारे और नाभादास जी के अद्भुत प्रसंग के माध्यम से प्रकट होती है, जहाँ उनकी अद्वितीय भक्ति और दीनता ने सभी संतों को भावविभोर कर दिया।
महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने खाटू श्याम जी (बर्बरीक) की कठिन परीक्षा ली थी। जानिए कैसे उनकी भक्ति, त्याग और विश्वास ने उन्हें अमर बना दिया।
रामनगर (गन्नौर, सोनीपत) में 14 अप्रैल 2026 को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर अंबेडकर भवन का शिलान्यास किया गया, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सामाजिक एकता, शिक्षा और जागरूकता का सशक्त संदेश दिया गया।
सन्यासी–बैरागी साधु–फक़ीर आंदोलन (1763–1800) भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम की एक अनसुनी वीर गाथा है, जिसमें संन्यासी, बैरागी साधु, फक़ीरों के साथ किसान, कारीगर और शोषित जनता ने अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष किया। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता चेतना की पहली सशक्त नींव बना।
महाभारत के चक्रव्यूह प्रसंग की सच्चाई जानिए, जिसमें अर्जुन नहीं बल्कि उनके पुत्र अभिमन्यु ने अद्भुत वीरता दिखाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह कहानी धर्म, साहस और युद्ध नीति का सबसे भावनात्मक अध्याय मानी जाती है।
1710 में सरहिंद की धरती पर वीर बंदा बैरागी ने अत्याचारी वज़ीर खान के शासन का अंत कर इतिहास बदल दिया। यह विजय केवल युद्ध नहीं थी, बल्कि धर्म, न्याय और सामाजिक क्रांति की जीत थी, जहाँ “जय सीताराम – राधे श्याम” के उद्घोष के साथ एक नई व्यवस्था की शुरुआत हुई, जिसमें किसानों को भूमि का अधिकार मिला और अत्याचार का अंत हुआ।
Discover Lohagarh Fort, the hidden capital of Veer Banda Bairagi Ji, a महान योद्धा who changed Indian history. Explore the untold story of his victories, reforms, and the historic 210 KM journey from Ramnagar to this powerful symbol of courage and justice
वैष्णव बैरागी समाज का ऐतिहासिक सत्य जानिए—1896 की प्रामाणिक पुस्तक के अनुसार बैरागी भगवान विष्णु के अनुयायी वैष्णव हैं। जानें सीताराम–राधेश्याम भक्ति, रामानंदाचार्य के 12 शिष्य, अखाड़ा परंपरा और धर्म रक्षा में बैरागी वीरों की भूमिका।
A historic meeting with Union Minister Ramdas Athawale Ji by Naresh Das Vaishnav Nimbark. Promoting Sanatan Vaishnav values, service, and inspiring books available on Amazon.
रामनगर गनौर सोनीपत में रामेश्वर मंदिर निर्माण की यह प्रेरणादायक कथा एक सैनिक के जीवन अनुभव, UN मिशन की कठिन परिस्थितियों और माता वैष्णो देवी के प्रति अटूट आस्था की वास्तविक यात्रा को दर्शाती है। यह लेख संघर्ष, विश्वास और भक्ति से भरे जीवन परिवर्तन की सच्ची कहानी प्रस्तुत करता है जिसमें मंदिर निर्माण और आध्यात्मिक संकल्प की दिव्य अनुभूति शामिल है।
Education / Education News
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं परीक्षा 2026 में विज्ञान वर्ग की छात्रा दीपिका स्वामी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.80% अंक प्राप्त किए हैं। यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है, जो हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
हनुमान जयंती 2026 पर विशेष लेख जिसमें भगवान श्री हनुमान जी के दिव्य जीवन, शक्ति, भक्ति और संकटमोचन स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह लेख लंका दहन, संजीवनी बूटी, सीता माता की खोज और श्रीराम भक्ति जैसे प्रसंगों के माध्यम से भगवान हनुमान की अद्भुत महिमा और सनातन धर्म में उनके महत्व को दर्शाता है। साथ ही यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति भक्ति, सेवा और धर्म में निहित है।
👉 हाथरस के टीकाराम पुजारी परिवार की यह प्रेरणादायक ऐतिहासिक गाथा स्वतंत्रता संग्राम में उनके सामूहिक योगदान को उजागर करती है। नमक सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक इस परिवार के सदस्यों ने विभिन्न चरणों में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह लेख बताता है कि कैसे एक परिवार ने जन-जागरण, संघर्ष और बलिदान के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को शक्ति दी और भारतीय इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 🇮🇳🚩
Sanatan Dharma / Spiritual Places
श्री नाभा दास जी और भक्तमाल की परंपरा से जुड़ा यह लेख सुदामा कुटी वृंदावन के आध्यात्मिक इतिहास और भक्ति साहित्य की दिव्य परंपरा को सरल रूप में प्रस्तुत करता है। यह सनातन संस्कृति और वैष्णव भक्ति परंपरा को समझने में मदद करता है।
रामनवमी पर ‘सनातन भारत – नया सवेरा’ का दिव्य प्रकाशन | सनातन चेतना का जागरण
**पावन रामनवमी (26 मार्च 2026) के शुभ अवसर पर ‘सनातन भारत – नया सवेरा’ मासिक ई-पत्रिका का भव्य प्रकाशन गन्नौर, सोनीपत से किया गया
Discover a powerful story of transformation from gun to pen, unveiled at a book launch event in Mathura on March 22, 2026.
यह पुस्तक एक सैनिक जीवन से आध्यात्मिक यात्रा की प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत करती है, जहाँ संघर्ष से शांति और कर्तव्य से ज्ञान की ओर एक सुंदर परिवर्तन दिखाई देता है।
This inspiring journey reflects Sanatan values, spirituality, and inner awakening, connecting discipline, service, and self-realization.
यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो जीवन में परिवर्तन और शांति की खोज कर रहा है।
A deeply inspiring narrative that is now reaching readers across India and the world.
The roots of the great war described in the sacred epic Mahabharata began long before the battlefield of Kurukshetra War.
A single act of greed in heaven—the theft of the divine cow Nandini—led to a powerful curse, the birth of Bhishma, and eventually the tragic destiny of the Kuru dynasty. This story reveals how karma, destiny, and dharma shaped one of the most dramatic histories in Indian spiritual literature.
Sanatan Vaishnav Bairagi Saints
श्रीविल्वमंगल जी सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के महान संत थे। उनका जीवन मोह से महाभक्ति तक की दिव्य यात्रा का प्रेरक उदाहरण है, जो श्रीकृष्ण प्रेम और वैराग्य का अद्भुत संदेश देता है।
ब्रिटिश शासनकाल के प्रशासनिक अभिलेखों, जिला गजेटियरों और 1891 की जनगणना रिपोर्ट में सनातन वैष्णव बैरागी समुदाय का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इन आधिकारिक दस्तावेज़ों से प्रमाणित होता है कि बैरागी परंपरा केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं थी, बल्कि उत्तर भारत में संगठित और प्रभावशाली धार्मिक समुदाय के रूप में स्थापित थी। रामानंदी, निंबार्क, श्रीवैष्णव और माध्व परंपराओं से जुड़े बैरागियों की पहचान, तिलक-चिह्न, सिद्धांत और सामाजिक उपस्थिति प्रशासनिक स्तर पर दर्ज की गई। विशेष रूप से मेरठ, अलीगढ़, सहारनपुर आदि जिलों में उनकी संख्या और प्रभाव का उल्लेख मिलता है। यह लेख ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर वैष्णव बैरागी परंपरा की प्रमाणित उपस्थिति को प्रस्तुत करता है।
P.R. Swami
International President – Global Sanatan Vaishnav Bairagi Seva Organization
International Business Expert & Philanthropist
👉 सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा भारत की एक प्राचीन और गौरवशाली आध्यात्मिक धरोहर है, जिसमें त्याग, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस लेख में इसके इतिहास, महत्व और परंपरा को सरल भाषा में समझाया गया है।
महायोद्धा वीर बंदा बैरागी का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अद्भुत गाथा है। 1670 में जन्म लेकर 9 जून 1716 तक उन्होंने मुगलों के अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया, सरहिंद विजय हासिल की और किसानों को अधिकार दिलाए। जानिए उनके पूरे इतिहास की सच्ची कहानी।
“Martyrs & National Heroes”
देशभक्ति और बलिदान की अमर गाथा—शहीद सचिन बैरागी ने हंसते-हंसते मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी हर भारतीय के दिल में गर्व और सम्मान की भावना जगाती है।
👉 Excerpt: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की यह प्रेरणादायक जीवन गाथा एक साधारण किसान परिवार से लेकर भारतीय सेना, UN Peace Mission और समाज सेवा तक की अद्भुत यात्रा को दर्शाती है। संघर्ष, अनुशासन और देशसेवा से भरा उनका जीवन आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।
Indian Author and Social Activist
Naresh Das Vaishnav Nimbark एक पूर्व सैनिक, समाजसेवी, लेखक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सनातन वैष्णव बैरागी समाज के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं पर महत्वपूर्ण शोध एवं लेखन किया है। उनके कार्य समाज में जागरूकता फैलाने, सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और युवाओं को प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान हैं।
🇮🇳 Indian Freedom Struggle
13 अप्रैल 1919 जलियांवाला बाग में पहली बार उठी वह आवाज़ जिसने इतिहास बदल दिया… शहीद मंगल दास बैरागी को उस “पहले स्वर” का प्रतीक माना जाता है जिसने स्वतंत्रता की चिंगारी जलाई।
वैष्णव बैरागी समाज की पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें “बैरागी” शब्द के साथ “वैष्णव” जोड़ने पर चर्चा तेज हो गई है। यह विषय समाज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है और इस पर विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श जारी है। यह लेख केवल सूचना एवं शोध आधारित प्रस्तुति है।
निधिवन का रहस्य आज भी लोगों के लिए एक बड़ा आकर्षण बना हुआ है। कहा जाता है कि यहाँ रात में दिव्य घटनाएँ घटती हैं, जिन्हें लेकर वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं। जानिए निधिवन से जुड़ी रहस्यमयी कहानियाँ, मान्यताएँ और इसके पीछे के तथ्य।
राष्ट्र सेवा एवं सामाजिक योगदान
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — भूतपूर्व सैन्य अधिकारी एवं मुख्य ड्राइविंग प्रशिक्षक (बुराड़ी, दिल्ली)। हजारों युवाओं को अनुशासित एवं सुरक्षित चालक बनाने का अनुभव। सड़क सुरक्षा जागरूकता में उल्लेखनीय योगदान।
👉 पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा सनातन वैष्णव बैरागी इतिहास पर शोध, पुस्तकें और सांस्कृतिक योगदान की विशेष वायरल रिपोर्ट।
प्रेरणादायक कहानी | वर्ल्ड रिकॉर्ड | भारत की उपलब्धियाँ | वैष्णव बैरागी समाज
146 KG दाँतों से वजन उठाकर इतिहास रचने वाले पिता-पुत्रों की यह प्रेरणादायक कहानी अब तक के 37 World Records के साथ पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन चुकी है। मेहनत, आस्था और संकल्प की मिसाल यह परिवार नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। 🚩