रामनगर गन्नौर से अमेरिका तक — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें ThriftBooks.com USA पर उपलब्ध | Naresh Das Vaishnav Nimbark

एक सेवानिवृत्त फौजी की 18 वर्षों की शोध-साधना अब अमेरिका तक पहुँची — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा पर आधारित पुस्तकें ThriftBooks.com (USA) पर उपलब्ध। भारत, यूरोप और अब अमेरिका में पढ़ें।

सनातन धर्म एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्य4 min read

भारत से अमेरिका तक — एक सैनिक की कलम ने रच दिया इतिहास
अब ThriftBooks.com (USA) पर भी उपलब्ध — सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा की पुस्तकें


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कुछ महीने पहले तक यह केवल एक सपना था।
आज यह हकीकत बन चुका है।
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें — जो पहले Amazon (भारत), Flipkart, Notion Press, और Libristo.ie (आयरलैंड) पर उपलब्ध थीं — अब ThriftBooks.com, अमेरिका की प्रमुख और सर्वाधिक भरोसेमंद पुस्तक-बिक्री वेबसाइट पर भी सूचीबद्ध हो चुकी हैं। यह केवल एक पुस्तक-सूची नहीं — यह उस 18 वर्षों के अथक शोध की विजय-यात्रा का एक नया, गौरवशाली अध्याय है, जो रामनगर गन्नौर के एक छोटे से गाँव से शुरू होकर आज दो महाद्वीपों — यूरोप और उत्तर अमेरिका — तक पहुँच चुकी है।

वह यात्रा जो एक फौजी की कलम से शुरू हुई
रामनगर गन्नौर की उस मिट्टी से उठे जहाँ कभी दो जून की रोटी भी मुश्किल से मिलती थी। 1984 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। 325 रुपए की तनखा में से पूरी तनखा घर भेजते थे। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में Sierra Leone गए। चौबीस साल देश की सेवा की। और सेवानिवृत्त होने के बाद — कलम उठाई।
वही कलम जो आज भारत, यूरोप और अब अमेरिका तक पहुँच चुकी है। 18 वर्षों तक देश के कोने-कोने में गए। मठों में गए। गाँवों में गए। वंशजों से मिले। शिलालेख पढ़े। ताम्रपत्र खोजे। और इस सारे शोध का परिणाम है — वे पुस्तकें जो आज विश्व के तीन महाद्वीपों के पाठकों तक पहुँच रही हैं।

ThriftBooks.com (USA) पर उपलब्ध पुस्तकें एवं मूल्य
The Vaishnav Bairagi Kings of India: Warrior Saints of Sanatan Dharma — $12.27
वे बैरागी राजा जो योद्धा संत थे, जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण किया।
Mahant Bane Maharaja: Sanatan Vaishnav Bairagi Parampara — $15.56 (अन्य प्रति $23.96)
महंत से महाराजा बनने की वह यात्रा, जो निम्बार्क सम्प्रदाय की मठ परम्परा और शासन का अद्भुत संगम है।
Ramnagar: 422 Years of Untold History — $10.57
वह गाँव जहाँ लेखक का बचपन बीता, उसकी संस्कृति और इतिहास का जीवंत दस्तावेज़।
Jagatguru Nimbarkacharya: The Sun of Sanatan Dharma — $30.99 (Hardcover)
सनातन के वे सूर्य, जिनकी किरणें आज भी करोड़ों वैष्णवों के जीवन को आलोकित करती हैं।
Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers — $14.65 (अन्य प्रति $22.99, Hardcover)
माला और सिंहासन साथ लेकर चलने वाले उन बैरागी शासकों का इतिहास, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास ने भुला दिया।
Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition — $9.72
18 वर्षों के शोध का सार, निम्बार्क सम्प्रदाय की मठ परम्परा और योद्धा विरासत का विस्तृत अध्ययन।

क्यों है यह उपलब्धि इतनी महत्वपूर्ण
एक सेवानिवृत्त फौजी की कलम से लिखी गई सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा अब अमेरिका के पाठकों तक भी पहुँच रही है — निम्बार्क सम्प्रदाय, बैरागी योद्धा संतों, और भारतीय इतिहास के उन उपेक्षित अध्यायों को लेकर, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास ने भुला दिया था।
ThriftBooks.com जैसी विशाल अमेरिकी वेबसाइट पर पुस्तकों का सूचीबद्ध होना यह दर्शाता है कि भारतीय सनातन परम्परा पर आधारित प्रामाणिक शोध-साहित्य की माँग केवल भारत या यूरोप तक सीमित नहीं — यह अब वैश्विक स्तर पर पहचानी जा रही है।
यह उन सभी पाठकों के लिए भी एक अवसर है जो अमेरिका में रहते हुए भारत की सांस्कृतिक जड़ों, वैष्णव बैरागी योद्धा-परम्परा, और निम्बार्क सम्प्रदाय के गौरवशाली इतिहास को जानना चाहते हैं।

पुस्तकें कहाँ से प्राप्त करें
अमेरिका के पाठकों के लिए — ThriftBooks.com
यूरोप के पाठकों के लिए — Libristo.ie
भारत में — Amazon, Flipkart, Notion Press
खोजने का सरल तरीका — किसी भी वेबसाइट पर जाकर सर्च बॉक्स में लिखें: Naresh Das Vaishnav Nimbark

वेबसाइट: https://www.nareshswaminimbark.com
वेबसाइट: https://www.nareshswaminimbark.in

पिता को श्रद्धांजलि
जब यह पुस्तकें ThriftBooks.com पर दिखीं, तो मन में एक ही विचार आया — पिताजी नारायण दत्त वैष्णव आज होते तो कितने गर्वित होते। वह व्यक्ति जिसने कभी बीस-तीस रुपए की तनखा में गुज़ारा किया, जिनके बेटे ने 325 रुपए की पूरी तनखा घर भेजी — उन्हीं के आशीर्वाद से आज यह पुस्तकें भारत से यूरोप होते हुए अमेरिका तक पहुँच रही हैं। यह सफलता नहीं — यह श्रद्धांजलि है।

अंत में
एक सैनिक जब कलम उठाता है, तो वह सीमाएँ नहीं मानता — न भौगोलिक, न भाषाई। उसी अनुशासन से लिखता है जिस अनुशासन से वह युद्धभूमि में लड़ता था। आज भारत से यूरोप और अब अमेरिका तक सनातन धर्म की यह कलम-यात्रा निरंतर जारी है, और यह यात्रा अभी रुकने वाली नहीं।

जय श्री राधे। जय श्री कृष्ण।

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी | इतिहासकार | लेखक
सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के शोधकर्ता

AIMA न्यूज़ पर पढ़ें: https://aimamedia.org/newsdetails.aspx?type=Share&nid=684809

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