जिस इतिहास को सदियों दबाया गया — अब वो जर्मनी में बिक रहा है
एक सैनिक जब सेवानिवृत्त होता है, तो अस्त्र त्याग देता है, परंतु अनुशासन कभी नहीं त्यागता। मैंने भी 24 वर्षों तक मातृभूमि की सेवा के पश्चात कलम उठाई, और वही अनुशासन, वही निष्ठा आज भी मेरे शोध-कार्य में जीवंत है। आज मुझे अत्यंत हर्ष और गौरव के साथ यह साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित मेरी साहित्यिक और ऐतिहासिक यात्रा अब भारत की सीमाओं को पार करते हुए 190 देशों तक पहुँच चुकी है, और अब इस कारवां का अगला पड़ाव है — जर्मनी।
"सनातन वैष्णव बैरागी: वेदों से ब्रिटिश अभिलेखों तक"
इसी महीने हिंदी और इंग्लिश — दोनों भाषाओं में प्रकाशित होने जा रही है!
यह ग्रंथ 100 से अधिक ऐतिहासिक प्रमाणों, मूल दस्तावेज़ों और प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित है — वेद, उपनिषद, विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, महाभारत, नारद पंचरात्र से लेकर जगद्गुरु रामानुजाचार्य, निम्बार्काचार्य एवं रामानंदाचार्य की परंपराओं तक; तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के अभिलेखों, ब्रिटिश भारत के गजेटियरों, 1872 से 1911 तक की जनगणना रिपोर्टों और Imperial Gazetteer of India जैसे प्रामाणिक स्रोतों तक — इस समस्त सामग्री का 18 वर्षों के क्षेत्रीय अध्ययन, RTI तथा सरकारी पत्राचार के माध्यम से गहन विश्लेषण किया गया है।
जैसा कि मैं सदैव कहता हूँ —
"दावे नहीं, दस्तावेज़ बोलेंगे।"
जर्मनी के प्रतिष्ठित मंच Amazon.de पर आज मेरी लगभग एक दर्जन कृतियाँ पाठकों के लिए उपलब्ध हैं — हार्डकवर, पेपरबैक और किंडल संस्करणों में। ये सभी पुस्तकें उस दीर्घकालिक और अनुशासित शोध का परिणाम हैं, जो मैंने विगत 18 वर्षों में वेदों, उपनिषदों, पुराणों, ऐतिहासिक अभिलेखों, ब्रिटिश गजेटियरों तथा क्षेत्रीय अध्ययनों के आधार पर किया है।
जर्मनी में उपलब्ध मेरी प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं —
"From the Bairagi Kings of Delhi to Bandaa Bairagi, Chhuikhadan and Rajnandgaon" दिल्ली के बैरागी राजाओं से लेकर बंदा बैरागी, छुईखदान और राजनांदगांव तक की गौरवशाली गाथा को उजागर करती है। इसी विषय का हिंदी संस्करण "महंत बने महाराजा: सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा" के रूप में भी उपलब्ध है, जो हिंदी पाठकों के लिए इस इतिहास को सुगम बनाता है।
"जगद्गुरु निम्बार्काचार्यजी: सनातन के सूर्य" जगद्गुरु निम्बार्काचार्य की दिव्य परंपरा और उनके अवदान पर केंद्रित है, तो वहीं "Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers" वैष्णव बैरागी शासकों के त्याग, तप और शासन के त्रिविध स्वरूप को प्रस्तुत करती है।
एक सैनिक के हृदय से लिखी गई "Ranbhoomi se Teerthbhoomi tak: Ek Sainik ki Amar Gatha" स्वतंत्रता सेनानियों, धार्मिक यात्राओं और सैनिक कविताओं का अनूठा संग्रह है, जिसका हिंदी संस्करण "यात्रा: बन्दूक से कलम तक" एक पूर्व सैनिक की साहित्यिक यात्रा को आत्मकथात्मक रूप में उकेरता है।
"Ramnagar: 422 Years of Untold History" रामनगर के 422 वर्षों के अनकहे इतिहास का प्रामाणिक अध्ययन है, जबकि "The Vaishnav Bairagi Kings of India: Warrior Saints of Sanatan Dharma" और "Jagatguru Nimbarkacharya: The Sun of Sanatan Dharma" सनातन धर्म के योद्धा-संतों की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पाठकों के समक्ष रखती हैं।
मेरी शोध-श्रृंखला "Sanātana Vaiṣṇava Bairāgī Heritage Series" के अंतर्गत "Sanatan Vaishnav Bairagi: Warriors and Soldiers" तथा "Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition" दो ऐसी कृतियाँ हैं, जो वैष्णव तपस्वियों के उस अनकहे सैन्य इतिहास को उजागर करती हैं, जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा हेतु शस्त्र भी धारण किए।
यह केवल पुस्तकों की सूची नहीं है — यह उस संकल्प का प्रमाण है, जिसे लेकर मैंने 24 वर्षों तक मातृभूमि की सेवा करने के पश्चात कलम उठाई थी। कारगिल युद्ध (1999) का सहभागी होना और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UNAMSIL) के अंतर्गत सिएरा लियोन (2000) में सेवा देना — इन अनुभवों ने मुझे सिखाया कि सत्य के लिए संघर्ष करना ही सच्ची सेवा है, चाहे वह रणभूमि में हो या इतिहास-लेखन में।
यह शोध-ग्रंथ किसी समाज, संप्रदाय या परंपरा के विरोध में नहीं, अपितु इतिहास को उसके मूल स्रोतों और प्रमाणों के आधार पर समझने और प्रस्तुत करने का एक ईमानदार प्रयास है। जहाँ प्रमाण हैं, वहाँ मूल संदर्भ दिए जाएंगे; जहाँ मतभेद हैं, वहाँ सभी मतों का उल्लेख होगा। निर्णय का अधिकार सर्वथा पाठकों का रहेगा।
मैं अपने समस्त पाठकों, शोधार्थियों और सनातन परंपरा से जुड़े सभी बंधुओं से अनुरोध करता हूँ कि इस यात्रा में मेरा साथ दें, अपनी कृतियों को समर्थन दें और इसी महीने प्रकाशित होने जा रहे इस नए ग्रंथ की प्रतीक्षा करें।
पूरी खबर Aima Media पर पढ़ें: https://aimamedia.org/newsdetails.aspx?type=Share&nid=699931
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना | अंतर्राष्ट्रीय लेखक एवं इतिहासकार
कारगिल युद्ध 1999 | संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन UNAMSIL, सिएरा लियोन 2000
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nareshkumarswami741964@gmail.com
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