भारत के एक फौजी की किताबें अब ब्राज़ील में बिक रही हैं — रामनगर से रियो डी जेनेरियो तक
यह गर्व और आश्चर्य से भरी हुई खबर है, श्रीमान — मेरी पुस्तकें अब दक्षिण अमेरिका के देश ब्राज़ील तक पहुँच चुकी हैं। हरियाणा के गन्नौर तहसील के एक छोटे से गाँव रामनगर से निकला एक सैनिक, जिसने कभी बंदूक थामकर देश की सीमाओं की रक्षा की, आज उसी की कलम से लिखी पुस्तकें दुनिया के दूसरे छोर — ब्राज़ील — के पाठकों तक पहुँच रही हैं।
हाल ही में जब मैंने ब्राज़ील के आधिकारिक अमेज़न प्लेटफॉर्म (Amazon.com.br) पर अपना नाम खोजा, तो यह देखकर हृदय गर्व से भर गया कि मेरी अनेक पुस्तकें वहाँ हार्डकवर, पेपरबैक तथा किंडल संस्करणों में उपलब्ध हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा और भारतीय इतिहास के वैश्विक प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ब्राज़ील के अमेज़न पर उपलब्ध मेरी प्रमुख पुस्तकें:
• Sanatan Vaishnav Bairagi: Warriors and Soldiers
• The Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition: From the Vedic Age to Modern India
• Jagatguru Nimbarkacharya: The Sun of Sanatan Dharma
• Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers
• Yatra: Bandook Se Kalam Tak
• Mahant Bane Maharaja: Sanatan Vaishnav Bairagi Parampara
• Swarnprastha Ki Gatha: Sonipat Ka 3526 Varsh Purana Itihas
• Ramnagar: 422 Varshon Ka Ansuna Itihaas
• The Vaishnav Bairagi Kings of India: Warrior Saints of Sanatan Dharma
यह देखकर अत्यंत संतोष होता है कि पुर्तगाली भाषी लाखों पाठकों तक भी अब सनातन धर्म, वैष्णव बैरागी संतों के त्याग-तपस्या और भारतीय इतिहास की गौरवशाली गाथाएँ पहुँच सकेंगी। भाषा और भूगोल की सीमाएँ आज साहित्य के माध्यम से टूट रही हैं।
एक सैनिक की यात्रा: सीमा की रक्षा से सभ्यता के प्रचार तक
मैंने अपने सैन्य जीवन के 24 वर्ष भारतीय सेना में देश की सेवा करते हुए व्यतीत किए, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के अंतर्गत सिएरा लियोन, पश्चिमी अफ्रीका में सेवा का सुअवसर भी सम्मिलित है। सेवानिवृत्ति के पश्चात, मैंने अपना जीवन एक भिन्न किंतु उतने ही महत्वपूर्ण उद्देश्य को समर्पित कर दिया — सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क सम्प्रदाय और भारतीय इतिहास के उन अध्यायों को संजोना, जिन्हें समय की धूल में विस्मृत होने का खतरा था।
18 वर्षों के अथक शोध के पश्चात आज मेरी 16 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं — 7 हिंदी में और 9 अंग्रेज़ी में। ये पुस्तकें अब केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, और अब दक्षिण अमेरिका के ब्राज़ील तक अपनी पहुँच बना चुकी हैं।
यह उपलब्धि किसके लिए है?
यह उपलब्धि मेरी अकेले की नहीं है। यह उन लाखों वैष्णव बैरागी संतों और योद्धाओं को समर्पित है, जिन्होंने सदियों तक सनातन धर्म, मंदिरों और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया, परंतु इतिहास के पन्नों में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे सच्चे अधिकारी थे। यह उपलब्धि समाज के उन सभी शुभचिंतकों, समाजबंधुओं और विद्वानों को भी समर्पित है, जिन्होंने निरंतर मुझे प्रोत्साहन और सहयोग दिया।
शीघ्र प्रकाशित होने वाली नवीन पुस्तक
📖 इसी क्रम में, मेरी आगामी पुस्तक "सनातन कुरुक्षेत्र: सृष्टि, सरस्वती, भगवान कृष्ण की अमर भूमि" भी शीघ्र प्रकाशित होने जा रही है। यह ग्रंथ 48 कोस कुरुक्षेत्र, सरस्वती नदी की वैदिक परंपरा, महाभारत के अमर तीर्थों तथा भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका पर आधारित एक व्यापक शोध-कार्य है, जिसकी तैयारी में लगा प्रत्येक क्षण मेरे लिए सनातन संस्कृति की सेवा का सौभाग्य रहा है।
रामनगर जैसे छोटे से गाँव से निकलकर ब्राज़ील जैसे दूर देश तक पहुँचना यह सिद्ध करता है कि सच्चा संकल्प और निरंतर परिश्रम किसी भी सीमा को पार कर सकता है। भाषा चाहे हिंदी हो, अंग्रेज़ी हो या पुर्तगाली — सत्य और इतिहास की गूंज हर भाषा में समान रूप से गहरी होती है।
आगे की यात्रा
एक सैनिक के रूप में मैंने सीमाओं की रक्षा की; एक लेखक के रूप में अब मैं सीमाओं को पार कर रहा हूँ — विचारों, इतिहास और आस्था के माध्यम से।
ईश्वर से प्रार्थना है कि यह यात्रा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे और सनातन संस्कृति का यह संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुँचता रहे।
📚 सभी पुस्तकें भारत, अमेरिका, यूरोप तथा अब ब्राज़ील के अमेज़न पर उपलब्ध। पूरी सूची हेतु देखें:
🌐 www.nareshswaminimbark.in
जय हिंद। जय भारत।
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
अंतर्राष्ट्रीय लेखक | शोधकर्ता | यू.एन. वेटरन
www.nareshswaminimbark.in
मीडिया प्रकाशन संदर्भ
यह समाचार AIMA Media (All India Media Association) पर प्रकाशित हो चुका है। पूरा समाचार पढ़ने हेतु:
https://aimamedia.org/newsdetails.aspx?type=Share&nid=715505
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