एक फोन की घंटी बजी — और 18 वर्षों की साधना को मिला वह सम्मान जो कोई पुरस्कार नहीं दे सकता था।

हरियाणा के सेवानिवृत्त सैन्य इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क और पंजाब बैरागी वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन गुरमीत बावा जी के मध्य 15 मिनट की ऐतिहासिक वार्तालाप।

Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition6 min read

एक फोन की घंटी बजी — और 18 वर्षों की साधना को मिला वह सम्मान जो कोई पुरस्कार नहीं दे सकता था।
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15 मिनट की वह फोन-कॉल जिसने हरियाणा को पंजाब से जोड़ा
बैरागी इतिहास का नया अध्याय
11 जून 2026 | नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
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11 जून 2026। दोपहर तीन बजे।
हरियाणा के सोनीपत जिले की गन्नौर तहसील के छोटे से गाँव रामनगर में एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का हाथ फोन पर था। दूसरी ओर पंजाब के नवनियुक्त बैरागी वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन गुरमीत बावा जी की प्रतीक्षा थी।
यह कोई सामान्य फोन-कॉल नहीं थी।
यह 18 वर्षों की शोध-साधना, 24 वर्षों की सैन्य-सेवा और सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के प्रति एक जीवन-भर के समर्पण का वह क्षण था — जब इतिहास और प्रशासन पहली बार एक सूत्र में बँधे।
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परिचय का वह क्षण
गुरदासपुर के सक्रिय कार्यकर्ता हरीश बावा जी ने यह पुल बनाया था। उन्होंने चेयरमैन का फोन नम्बर नरेश दास वैष्णव निम्बार्क जी को दिया था — इस विश्वास के साथ कि हरियाणा के इस इतिहासकार और पंजाब के इस नवनियुक्त पदाधिकारी के मध्य संवाद होना चाहिए।
जब निम्बार्क जी ने अपना परिचय दिया — सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के शोधकर्ता, 13 से अधिक पुस्तकों के लेखक, 200 से अधिक देशों तक पहुँचने वाली मासिक पत्रिका के सम्पादक — तो चेयरमैन गुरमीत बावा जी की प्रतिक्रिया में वह गर्व था जो एक सच्चे समाजसेवी के हृदय में तब उत्पन्न होता है जब उसे अपने समाज की शक्ति का भान होता है।
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वह वाक्य जो हृदय को छू गया
चेयरमैन साहब बोले —
आप समाज के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। अपने समाज का इतिहास लिखना कोई छोटी बात नहीं। यह सबके बस की बात नहीं है।
यह सुनकर निम्बार्क जी को वे 18 वर्ष स्मरण हो आए — वे यात्राएँ जो उन्होंने देश के कोने-कोने में की, वे रातें जो पाण्डुलिपियों और पुरातन दस्तावेज़ों के साथ जागते हुए बिताईं, और वह क्षण जब सिएरा लियोन की बन्दी से लौटकर यह संकल्प लिया था —
जो बंदूक से नहीं हो सका, वह कलम से होगा।
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पत्रिका, पुस्तक और अन्तरराष्ट्रीय पहुँच
वार्तालाप में सनातन भारत नया सवेरा पत्रिका की चर्चा हुई। यह पत्रिका केवल भारत तक सीमित नहीं — यह अनेक महाद्वीपों के पाठकों तक पहुँचती है। बैरागी परम्परा, सनातन धर्म और भारतीय इतिहास के उन अध्यायों को यह पत्रिका प्रकाशित करती है जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास ने उपेक्षित किया है।
जब हमारे समाज की आवाज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचती है तो समस्त बैरागी समाज का मस्तक ऊँचा होता है।
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जगतगुरु निम्बार्काचार्य और एक वचन
जब निम्बार्क जी ने अपनी नवीनतम पुस्तक जगतगुरु निम्बार्काचार्य : सनातन के सूर्य के विषय में बताया — जो मात्र चार दिन पूर्व 7 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के लूम्ब में लोकार्पित हुई थी — तो चेयरमैन साहब ने कहा —
मैं यह पुस्तक आज ही Amazon पर खोजूँगा।
एक व्यस्त प्रशासनिक पदाधिकारी का यह कहना — कि वे उसी दिन पुस्तक खोजेंगे — यह किसी पुरस्कार से कम नहीं।
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बंदा बैरागी — इतिहास का अपूर्ण न्याय
वार्तालाप का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षण वह था जब निम्बार्क जी ने घोषणा की कि वे बंदा बैरागी पर एक विस्तृत पुस्तक लिखेंगे। 18 वर्षों के शोध के उपरान्त वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं — बंदा बैरागी के साथ इतिहास ने न्याय नहीं किया। उन्हें एक पंथ विशेष की सीमा में बाँध दिया गया जबकि वे सम्पूर्ण सनातन भारत के महान सपूत थे।
यह अत्यंत आवश्यक कार्य है। हमारे समाज को अपने महापुरुषों की सच्ची पहचान चाहिए।
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पहचान का संकट — एक कटु सत्य
वार्तालाप का सबसे गहरा और विचारोत्तेजक क्षण वह था जब चेयरमैन साहब ने कहा —
हमारे बैरागी समाज में बहुत सामर्थ्यवान लोग हैं। किन्तु अनेक लोग अपनी बैरागी पहचान छुपाने लगे हैं। कोई गोत्र लगाता है, कोई नाम के साथ शर्मा लिखने लग गया।
निम्बार्क जी का उत्तर सरल किन्तु तीक्ष्ण था —
जब बंदा बैरागी मृत्यु के क्षण में भी कह सके — मैं बैरागी हूँ — तो आज का बैरागी अपना नाम क्यों छुपाए?
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दिल्ली में भेंट का वचन
ठीक 3:15 बजे वार्तालाप समाप्त हुआ। चेयरमैन साहब ने वचन दिया — शीघ्र ही दिल्ली आऊँगा। आपसे अवश्य मिलूँगा।
फोन रखने के उपरान्त निम्बार्क जी के मन में वह संतोष था जो एक सैनिक को कर्तव्य निभाने के उपरान्त मिलता है — पुरस्कार की प्रतीक्षा किए बिना।
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उपसंहार
यह 15 मिनट केवल दो व्यक्तियों का वार्तालाप नहीं था। यह उस ऐतिहासिक क्षण का प्रतीक था जब एक ओर पंजाब सरकार ने बैरागी वेलफेयर बोर्ड की स्थापना कर प्रशासनिक स्वीकृति दी — और दूसरी ओर हरियाणा में एक इतिहासकार की कलम उस परम्परा को अमर कर रही है।
जब इतिहास और प्रशासन एक दिशा में चलें — तो समाज का उत्थान निश्चित है।
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नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं इतिहासकार | सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के शोधार्थी
www.nareshswaminimbark.in
जय हिंद | जय भारत | जय श्री राधे-कृष्ण


पंजाब बैरागी वेलफेयर बोर्ड — सम्पूर्ण सदस्य-सूची
मुख्यमंत्री कार्यालय, पंजाब द्वारा नियुक्त | दिनांक : 11 जून 2026
क्र.
नाम
पद
जिला | मोबाइल

1
श्री भगवान दास
राज्य सदस्य
होशियारपुर | 9417531181

2
श्री सुखविंदर बावा
राज्य सदस्य
अमृतसर | 9815268452

3
श्री नवदीप राज
राज्य सदस्य
मोगा | 7009310414

4
श्री दारा दास
राज्य सदस्य
पटियाला | 9815143703

5
श्री मोहित
जिला अध्यक्ष
होशियारपुर | 9417504112

6
श्री परमजीत सिंह
जिला अध्यक्ष
SBS नगर | 9501800339

7
श्री धरम पाल
जिला अध्यक्ष
कपूरथला | 9855678171

8
श्री परदीप कुमार
जिला अध्यक्ष
जालन्धर | 9417090938

9
श्री किशन सिंह
जिला उपाध्यक्ष
जालन्धर | 7710154155

10
श्रीमती अंजलि
जिला अध्यक्षा
अमृतसर | 7973634958

11
श्री राज कुमार
जिला उपाध्यक्ष
अमृतसर | 6284655569

12
श्री हरजिंदर बावा
जिला अध्यक्ष
गुरदासपुर | 9814647272

13
श्री पवन बावा
जिला अध्यक्ष
पठानकोट | 9463149531

14
श्री दलबीर सिंह
जिला अध्यक्ष
तरन तारन | 9876305325

15
श्री दलविंदर सिंह बावा
जिला अध्यक्ष
फरीदकोट | 9876476306

16
श्री सरबजीत दास बावा
जिला अध्यक्ष
फतेहगढ़ साहिब | 9888849631

17
श्री गुलशन बावा
जिला अध्यक्ष
लुधियाना | 9888417620

18
श्री राम शरण
जिला उपाध्यक्ष
लुधियाना | 8872517903

19
श्री करमजीत सिंह
जिला उपाध्यक्ष
लुधियाना | 9855506645

20
श्री हरविंदर दास
जिला अध्यक्ष
रूपनगर | 8968070561

21
श्री निर्मल बावा
जिला अध्यक्ष
SAS नगर | 9914165066

22
श्री नेतर सिंह
जिला अध्यक्ष
मलेरकोटला | 9142651000

23
श्री जगदीश सिंह
जिला अध्यक्ष
पटियाला | 9780007696

24
श्री सेवा दास
जिला उपाध्यक्ष
पटियाला | 8872750000

25
श्री भीम दास
जिला अध्यक्ष
संगरूर | 9417466984

26
श्रीमती संदीप कौर
जिला अध्यक्षा
बठिंडा | 8968680858

27
श्री सुखविंदर सिंह
जिला अध्यक्ष
मानसा | 9815501816

28
श्री भूपेंदर कुमार
जिला अध्यक्ष
मुक्तसर साहिब | 9417006353

29
श्रीमती रुपिंदर कौर बावा
जिला अध्यक्षा
फिरोजपुर | 9781453974

30
श्री कुलविंदर सिंह
जिला अध्यक्ष
बरनाला | 9876511165


बैरागी वेलफेयर बोर्ड के नवनियुक्त चेयरमैन गुरमीत बावा जी तथा सभी 30 पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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हरियाणा के छोटे से गाँव रामनगर में एक गरीब वैष्णव किसान परिवार में जन्मे नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 24 वर्ष भारतीय सेना में देश की सेवा की। UN Veteran के रूप में विश्व-मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। सेवानिवृत्ति के बाद 18 वर्षों तक गाँव-गाँव, मठ-मठ, तीर्थ-तीर्थ भटककर सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के उस इतिहास को खोजा — जिसे सदियों से भुला दिया गया था। आज उनकी चार पुस्तकें अमेरिका में प्रकाशित होकर विश्व के हर कोने में पहुँच चुकी हैं।
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