"सनातन कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र के 182 तीर्थों का सच्चा इतिहास | Naresh Das Vaishnav Nimbark"

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र केवल एक भौगोलिक नाम नहीं — यह भारतीय सभ्यता की स्मृति का केंद्र है। "सनातन कुरुक्षेत्र" में लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, 48 कोस क्षेत्र के 182 तीर्थों का प्रमाण-आधारित इतिहास प्रस्तुत करते हैं — जहाँ आस्था और तथ्य दोनों का सम्मान किया गया है।

सनातन परंपरा3 min read


**वो 182 तीर्थ जिनके बारे में शायद आप कभी नहीं जानते — कुरुक्षेत्र का असली इतिहास**

सनातन कुरुक्षेत्र | सृष्टि, सरस्वती और भगवान श्रीकृष्ण की अमर भूमि

हिंदी संस्करण आज प्रकाशित हो गया है। इससे पहले इसी ग्रंथ का अंग्रेज़ी संस्करण 2 तारीख को प्रकाशित हुआ था, जिसे पाठकों का भरपूर स्नेह मिला।

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र केवल एक भौगोलिक नाम नहीं है — यह भारतीय सभ्यता की स्मृति का केंद्र है। इसी पावन भूमि पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और माँ सरस्वती की लीलाएँ जुड़ी हैं, और यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया। इसी दिव्यता, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत को केंद्र में रखकर लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने "सनातन कुरुक्षेत्र" नामक एक अद्वितीय शोधग्रंथ की रचना की है।

**लेखक के बारे में**

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, इतिहासकार और स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। भारतीय सेना में 24 वर्षों (1984–2008) की गौरवपूर्ण सेवा के दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध (1999) में सक्रिय भागीदारी की तथा सिएरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UNAMSIL, 2000) में विशेष योगदान दिया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना जीवन सनातन धर्म, वैष्णव परंपरा और भारत के प्राचीन तीर्थों के गहन अध्ययन को समर्पित कर दिया। एक सैनिक का अनुशासन और एक शोधकर्ता की गहन जिज्ञासा — दोनों के संगम से यह ग्रंथ रचा गया है।

**पुस्तक में क्या है**

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग से लेखक ने 48 कोस कुरुक्षेत्र क्षेत्र के 182 तीर्थों की स्वयं यात्रा की। प्रत्येक तीर्थ का इतिहास, महत्व और वर्तमान स्थिति — तीनों को अलग-अलग परखकर इस ग्रंथ में दर्ज किया गया है। पुराणों, वेदों, महाभारत तथा प्राचीन अभिलेखों के प्रमाणों के साथ-साथ पुरातत्व, सरकारी अभिलेखों और मानचित्रों का भी उपयोग किया गया है। 444 पृष्ठों का यह ग्रंथ 95% शोध और प्रमाणों पर आधारित है — यानी परंपरा का सम्मान करते हुए भी हर कथन को स्रोत की कसौटी पर परखा गया है।

यह पुस्तक केवल एक भौगोलिक अध्ययन नहीं है। यह सनातन संस्कृति, आस्था और भारतीय ज्ञान-परंपरा के गौरव का जीवंत प्रमाण है — इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, तीर्थयात्रियों और धर्मप्रेमियों, सभी के लिए एक अमूल्य संदर्भ-ग्रंथ।

**पुस्तक की विशेषता**

अधिकांश तीर्थ-साहित्य या तो पूर्णतः धार्मिक कथा तक सीमित रहता है, या फिर पुरातत्व और इतिहास की भाषा में इतना उलझ जाता है कि सामान्य पाठक और श्रद्धालु के लिए दुर्गम हो जाता है। "सनातन कुरुक्षेत्र" इन दोनों के बीच एक संतुलित मार्ग अपनाती है। प्रत्येक तीर्थ के विवरण में लेखक ने तीन प्रश्न साथ रखे हैं — उस स्थान की धार्मिक परंपरा क्या कहती है, उपलब्ध ऐतिहासिक-पुरातात्त्विक प्रमाण क्या हैं, और वर्तमान में उस स्थल की स्थिति क्या है। इस पद्धति से पुस्तक न तो आस्था की उपेक्षा करती है, न ही प्रमाण की अनदेखी।

**क्यों पढ़ें**

आज जब कुरुक्षेत्र पर्यटन और तीर्थयात्रा के केंद्र के रूप में तेज़ी से विकसित हो रहा है, तब इसके पीछे की गहरी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परत को समझना और भी आवश्यक हो जाता है। "सनातन कुरुक्षेत्र" पाठक को केवल स्थानों की सूची नहीं देता, बल्कि यह बताता है कि प्रत्येक तीर्थ किस कथा, किस युग और किस प्रमाण से जुड़ा है। यह पुस्तक धर्म और इतिहास दोनों को एक साथ, संतुलित दृष्टि से प्रस्तुत करती है।

यह ग्रंथ उन सभी के लिए उपयोगी है जो कुरुक्षेत्र की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, जो अपने विद्यार्थियों या परिवार को इस पावन भूमि का सही परिचय देना चाहते हैं, अथवा जो केवल एक सुव्यवस्थित, प्रमाण-आधारित संदर्भ-ग्रंथ अपने पुस्तकालय में रखना चाहते हैं। सैन्य अनुशासन से निकली गहन शोध-दृष्टि इस पुस्तक को भारत के तीर्थ-साहित्य में एक विशिष्ट स्थान देती है।

**कहाँ से पढ़ें / खरीदें**

हिंदी संस्करण (Print / Digital):

Notion Press (Paperback ₹580 / Hardcover ₹770):
https://notionpress.com/in/read/sanatan-kurukshetra

Amazon.in:
https://www.amazon.in/dp/B0HF4QH2GM

Google Play Books (Digital Edition):
https://play.google.com/store/books/details?id=CuL8EQAAQBAJ

English Edition (निःशुल्क, Digital):

Internet Archive:
https://archive.org/search?query=creator%3A%22Naresh+Das+Vaishnav+Nimbark%22

Zenodo (Research Publication):
https://zenodo.org/search?q=%22Naresh%20Das%20Vaishnav%20Nimbark%22

Academia.edu:
https://www.academia.edu/search?q=Naresh%20Das%20Vaishnav%20Nimbark

अधिक जानकारी के लिए लेखक की आधिकारिक वेबसाइट देखें:
www.nareshswaminimbark.in

---

"जहाँ प्रमाण उपलब्ध हों, वहाँ प्रमाण बोलें; जहाँ आस्था हो, वहाँ आस्था का सम्मान हो।" — यही इस ग्रंथ की मूल भावना है। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की 182 तीर्थस्थली यात्रा अब आपके हाथों में — पढ़िए, साझा कीजिए, और इस सनातन विरासत से जुड़िए।

Internal linking suggestions
Related posts