भगवानदास अस्पताल, सोनीपत — सेवा, समर्पण और सम्मान की जीवंत गाथा
एक कारगिल योद्धा के अनुभवों से
लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना
कारगिल युद्ध योद्धा | संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक, सिएरा लियोन 2000
संस्थापक-संपादक, सनातन भारत नया सवेरा पत्रिका (18वाँ अंक)
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in
भूमिका
चौबीस वर्षों तक भारतीय सेना में सेवारत रहते हुए, कारगिल की दुर्गम एवं हिमाच्छादित पहाड़ियों पर शत्रु का सामना करते हुए, तथा संयुक्त राष्ट्र के नीले ध्वज तले सिएरा लियोन की धरती पर शांति-स्थापना का गुरुतर दायित्व निभाते हुए, मैंने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता की जो अमूल्य शिक्षा अर्जित की, वही आज मुझे प्रत्येक संस्थान का मूल्यांकन उसकी सेवा-भावना के आधार पर करने की सूक्ष्म दृष्टि प्रदान करती है। इसी कसौटी पर जब मैं भगवानदास अस्पताल, सोनीपत को परखता हूँ, तो पाता हूँ कि यह संस्थान न केवल चिकित्सकीय दक्षता में अग्रणी है, अपितु मानवीय संवेदना के धरातल पर भी सर्वथा अनुकरणीय है।
स्थान परिचय
भगवानदास अस्पताल, जी.टी. रोड, कुमासपुर गाँव के सम्मुख, ब्लॉक-ई, सेक्टर-18, ओमैक्स सिटी, शाहपुर तुर्क गाँव के निकट, सोनीपत, हरियाणा-131001 में स्थित है। यह संस्थान वर्ष 2019 से ECHS पैनल पर सेवारत है। इसकी बहन-संस्था भगवती अस्पताल, रोहिणी, दिल्ली में स्वयं संस्थापक डॉ. नरेश पामनानी जी बैठते हैं तथा रोगियों को अपनी प्रत्यक्ष सेवाएँ प्रदान करते हैं।
मेरी 2019 की प्रथम यात्रा
वर्ष 2019 में अस्पताल के पी.आर.ओ. श्री सतीश शर्मा जी से मेरी भेंट हुई। उन्होंने विनम्रता से कहा — "आप एक बार यहाँ भ्रमण करके देखें, हमारे यहाँ बहुत अच्छे चिकित्सक हैं।" इस आग्रह पर जब मैं पहली बार आया, तो इसी अस्पताल का होकर रह गया। एक अन्य पी.आर.ओ. श्री इंदर जी से भी घनिष्ठता स्थापित हुई, जो अब मेरे परम मित्र हैं — जब भी कठिनाई होती है, मैं निःसंकोच उन्हें दूरभाष कर लेता हूँ।

अस्पताल की चिकित्सकीय सुविधाएँ (हृदय-रोग विभाग)
भगवानदास अस्पताल सोनीपत जिले में प्रथम बार ओपन हार्ट सर्जरी (CABG) की सुविधा प्रस्तुत करने वाला संस्थान है, जिसे AIIMS, नई दिल्ली से प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम संचालित करती है:
24 घंटे कार्डियोलॉजिस्ट की उपलब्धता
कोरोनरी एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग द्वारा हार्ट-अटैक का 24 घंटे उपचार
पेसमेकर प्रत्यारोपण की सुविधा
ASD, VSD, PDA डिवाइस क्लोज़र
कलर डॉप्लर, इको, TMT, होल्टर मॉनिटरिंग
सभी प्रकार की हृदय-शल्य चिकित्सा, शिशु हृदय-शल्य चिकित्सा
कोविड आइसोलेशन सेंटर (DCHC) की सुविधा भी संस्थान में स्थापित रही है
आयुष्मान भारत (PM-JAY) योजना पर पैनलबद्ध — ₹5 लाख वार्षिक निःशुल्क उपचार-सुविधा
संस्थान के सुयोग्य चिकित्सक-मंडल (Consultants on Panel)
जनरल मेडिसिन: डॉ. नरेश पामनानी, डॉ. शेखर पामनानी, डॉ. मोहन लाल शर्मा, डॉ. केतन कुमार
जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन: डॉ. मनित कोरपाल, डॉ. आशीष सहगल
प्रसूति एवं स्त्री रोग: डॉ. अंशुल त्रिपाठी
कार्डियोलॉजिस्ट: डॉ. आबिद हुसैन राथर, डॉ. रोहित सिंगला
कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी: डॉ. अरुण कुमार गोयल
नेत्र रोग: डॉ. ईशानी कावत्रा, डॉ. लक्षय दुदेजा
ई.एन.टी.: डॉ. हितेंदर जीत पाल
अस्थि रोग: डॉ. वेद आशीष रवेश
बाल रोग: डॉ. तरुण सिंह, डॉ. आदर्श शर्मा
एनेस्थीसिया: डॉ. डी.के. श्रीवास्तव, डॉ. करिश्मा बंसल, डॉ. मंजू आर्य
रेडियोलॉजी: डॉ. सुमित बिंदल, डॉ. शिखा पामनानी
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी: डॉ. राहुल आर्य, डॉ. अमित तंवर
सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी: डॉ. मयंक जैन
दंत चिकित्सा: डॉ. काज़ल सोही
त्वचा रोग: डॉ. सुभोर नंदवानी
नेफ्रोलॉजी: डॉ. अनंत जोशी
न्यूरोलॉजी: डॉ. सलोनी मित्तल
न्यूरोसर्जरी: डॉ. योगिंदर सिंह
यूरोलॉजी: डॉ. गौरव सिंह रांधावा
प्लास्टिक सर्जरी: डॉ. अजय कपूर
पीडियाट्रिक सर्जरी: डॉ. अंशुमन शर्मा
पल्मोनोलॉजी: डॉ. अविनाश चौहान
फिजियोथेरेपी: सुश्री सीमा
यह विशेषज्ञ-सूची स्वयं इस बात का सुदृढ़ प्रमाण है कि भगवानदास अस्पताल एक बहु-विशेषज्ञता युक्त तृतीयक स्तरीय संस्थान है।

व्यक्तिगत उपचार-अनुभव (जून-जुलाई 2026)
14 जून 2026: रक्तचाप एवं हृदय-गति में अत्यधिक वृद्धि के कारण दाखिला हुआ। तत्काल उपचार के फलस्वरूप 24 जून 2026 को स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुआ।
द्वितीय दाखिला: उच्च रक्त-शर्करा, यकृत-विकार तथा मूत्राशय संक्रमण के कारण ज्वर नियंत्रित नहीं हो रहा था। 26 जून को पुनः भर्ती हुआ; लघु शल्य-क्रिया की आवश्यकता बताई गई। 1 जुलाई को डिस्चार्ज हुआ, परन्तु तबीयत पुनः विचलित होने पर तत्काल पुनः भर्ती होना पड़ा।
3 जुलाई 2026: आज सफल शल्य-क्रिया संपन्न हुई। शल्य-क्रिया के उपरांत वार्ड क्रमांक 408 में डॉ. शेखर पामनानी जी स्वयं तत्काल भेंट हेतु पधारे तथा अत्यंत आत्मीयता से कुशलक्षेम पूछा — "आपका ऑपरेशन कैसे हुआ? आप हमारे बहुत पुराने ग्राहक हैं।" इस सौजन्य ने मेरे हृदय को अत्यंत स्पर्श किया, जिसकी अभिव्यक्ति किसी भी लेखनी से संभव नहीं।
स्नेह-सम्मान का आदान-प्रदान
कृतज्ञता-स्वरूप मैंने अपनी कृतियाँ सादर भेंट कीं — "स्वर्णप्रस्थ की गाथा" (डॉ. शेखर पामनानी जी को) तथा "Rosary & the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers" (RMO डॉ. संजय जी को)। इस शुभ अवसर पर संस्थान के अनेक कर्तव्यनिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे तथा स्मृति-चित्र में सम्मिलित हुए — डॉ. आदित्य, वार्ड इंचार्ज मीनू अंतिल (नर्सिंग असिस्टेंट), नर्सिंग असिस्टेंट सुनील देवी एवं मनीष स्वामी, तथा श्री हर्ष खापरा जी। इन सभी सेवाभावी कर्मियों की तत्परता एवं सौजन्यता ने मेरे उपचार-काल को अत्यंत सुगम बनाया।
चित्र 1: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा डॉ. शेखर पामनानी जी को पुस्तक "स्वर्णप्रस्थ की गाथा" सादर भेंट करते हुए
चित्र 2: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, RMO डॉ. संजय (जिन्हें "Rosary & the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers" पुस्तक भेंट की गई), डॉ. आदित्य, मीनू अंतिल (वार्ड इंचार्ज, नर्सिंग असिस्टेंट), सुनील देवी (नर्सिंग असिस्टेंट), मनीष स्वामी (नर्सिंग असिस्टेंट) एवं हर्ष खापरा जी के साथ स्मृति-चित्र
एक इतिहासकार का दृष्टिकोण
मेरा 18 वर्षों का शोध सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर केंद्रित रहा है — वीर बंदा बैरागी, जगद्गुरु निम्बार्काचार्य जी का इतिहास, वैष्णव बैरागी राजाओं का 200 वर्षों का शासन, तथा 1857 की क्रांति में बैरागी योद्धाओं का योगदान। इस दीर्घ शोध-यात्रा में मैंने अनुभव किया है कि सेवा-भावना केवल अतीत की गाथाओं में सीमित नहीं, अपितु वर्तमान समाज में भी जीवंत है — और भगवानदास अस्पताल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उपसंहार
एक भूतपूर्व सैनिक एवं इतिहासकार के नाते, मैं यह सादर कहना चाहता हूँ कि भगवानदास अस्पताल — तथा इसकी बहन-संस्था भगवती अस्पताल, रोहिणी — केवल चिकित्सा-संस्थान नहीं, अपितु सेवा, अनुशासन और मानवता का संगम हैं। डॉ. नरेश पामनानी जी एवं डॉ. शेखर पामनानी जी के नेतृत्व में, बीस से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, पी.आर.ओ. सतीश शर्मा जी एवं इंदर जी के आत्मीय सहयोग, तथा डॉ. आदित्य, डॉ. संजय, मीनू अंतिल, सुनील देवी, मनीष स्वामी एवं हर्ष खापरा जैसे कर्तव्यनिष्ठ कर्मियों के परिश्रम से, यह संस्थान सोनीपत जिले के जन-मानस की सच्ची सेवा कर रहा है।
यह गाथा सनातन भारत नया सवेरा पत्रिका के 18वें अंक में प्रकाशित की जाएगी, जो विश्व के 190 देशों में निःशुल्क वितरित होती है।
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