दावों से नहीं, दस्तावेज़ों से बोलेगा इतिहास — सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा (वेदों से आधुनिक काल तक)

"दावों से नहीं, दस्तावेज़ों से बोलेगा इतिहास" — इसी उद्देश्य के साथ रचित यह ग्रन्थ सनातन वैष्णव बैरागी समाज के वैदिक कालखण्ड से लेकर आधुनिक भारत तक के गौरवशाली इतिहास को प्रामाणिक स्रोतों — वेद, उपनिषद्, पुराण, पांचरात्र साहित्य, शिलालेख, ताम्रपत्र तथा नृजातीय (ethnographic) अभिलेखों — के आधार पर प्रस्तुत करता है। लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार एवं स्वतंत्र इतिहासकार, ने वर्षों के अनुशासित शोध से इस कृति को समाज को समर्पित किया है। क्या आप चाहेंगे कि मैं इसे थोड़ा और संक्षिप्त (होमपेज बैनर हेतु एक पंक्ति) या और विस्तृत (पूर्ण About Page) रूप में भी तैयार कर दूँ?

(History / Religious Research)5 min read



"दावों से नहीं, दस्तावेज़ों से बोलेगा इतिहास"
सनातन वैष्णव बैरागी समाज की सबसे बड़ी शोध-पुस्तक अब मुफ़्त में उपलब्ध!

सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा — वेदों से आधुनिक काल तक

लेखक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
(सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, इतिहासकार एवं स्वतंत्र शोधकर्ता)

प्रिय समाज बंधुओं,

आज हम अत्यंत गर्व, हर्ष एवं भावुकता के साथ यह सूचित कर रहे हैं कि सनातन वैष्णव बैरागी समाज के गौरवशाली, प्राचीन एवं गौरवमयी इतिहास पर आधारित एक विशाल शोध-ग्रन्थ अब पूरे विश्व के सामने उपलब्ध हो चुका है। वर्षों तक जो इतिहास किताबों के पन्नों में दबा रहा, बिखरे हुए अभिलेखों, धूल खाते ग्रन्थों और भूली-बिसरी स्मृतियों में कैद रहा — वह आज पहली बार व्यवस्थित, प्रामाणिक एवं सुलभ रूप में समाज के हाथों में है।

यह पुस्तक किसी कल्पना, किसी दावे या किसी सुनी-सुनाई परंपरा पर आधारित नहीं है। यह पूर्णतः ठोस, प्रामाणिक एवं सत्यापन-योग्य ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, सरकारी अभिलेखों तथा विश्वविख्यात विद्वानों के शोध-ग्रन्थों पर आधारित है — ताकि समाज का हर सदस्य गर्व के साथ, ठोस आधार पर, अपनी पहचान को समझ सके और आवश्यकता पड़ने पर उसे प्रमाणित भी कर सके।

**पुस्तक के बारे में**

491 पृष्ठों में फैला यह गहन शोध-कार्य किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं, बल्कि दर्जनों प्रामाणिक स्रोतों के गहन अध्ययन का परिणाम है — वेद, उपनिषद्, पुराण, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, पांचरात्र साहित्य, आगम ग्रन्थ, प्राचीन शिलालेख, ताम्रपत्र, फ़ारसी-कालीन इतिवृत्त, राजसी अभिलेख, यूरोपीय यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत, तथा आधुनिक इतिहासकारों का शोध।

इसके साथ ही औपनिवेशिक काल के तीन विश्वप्रसिद्ध नृजातीय (ethnographic) ग्रन्थों — W. Crooke की "The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh" (1896), H.A. Rose की "A Glossary of the Tribes and Castes of the Punjab" (1892), तथा R.V. Russell की "The Tribes and Castes of the Central Provinces of India" (1916) — के विस्तृत उद्धरण भी सम्मिलित किए गए हैं, जो बैरागी समाज को औपचारिक रूप से वैष्णव धार्मिक परंपरा से जोड़ते हैं।

यह पुस्तक सनातन वैष्णव बैरागी समाज की वैदिक कालखण्ड से लेकर आधुनिक भारत तक की अनवरत, अटूट यात्रा को क्रमबद्ध, तथ्यात्मक एवं वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह न केवल समाज के अतीत का दस्तावेज़ है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी सन्दर्भ-ग्रन्थ भी है।

यह स्पष्ट रूप से कहा जाना आवश्यक है कि यह ग्रन्थ किसी भी धर्म, संप्रदाय, समुदाय या जाति के पक्ष अथवा विपक्ष में लिखा गया प्रचार-साहित्य नहीं है। इसका एकमात्र और सर्वोच्च उद्देश्य है — ऐतिहासिक सत्य को प्रामाणिक स्रोतों के माध्यम से पाठकों के समक्ष पूर्णतः निष्पक्ष, संतुलित एवं तथ्य-आधारित रूप में प्रस्तुत करना।

**लेखक के विषय में**

लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सम्मानित नायब सूबेदार रहे हैं। सीमाओं की रक्षा करने वाले हाथों ने वर्षों बाद कलम उठाई और समाज की जड़ों की खोज में निकल पड़े। "बंदूक से कलम तक" की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समूचे समाज की खोई हुई पहचान को पुनः खोजने की यात्रा है। वर्षों के अथक शोध, पुस्तकालयों की खाक छानने, दुर्लभ ग्रन्थों को खंगालने और सरकारी अभिलेखागारों में गहराई से उतरने के बाद यह कृति समाज को समर्पित की गई है।

"History Will Not Speak... The Evidence Will!" — यही इस पूरे कार्य की मूल भावना और प्रेरणा है।

**अब विश्व-स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध (English Edition)**

पुस्तक को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं डिजिटल पुस्तकालय मंचों पर विधिवत प्रकाशित किया जा चुका है, जहाँ से इसे विश्व का कोई भी व्यक्ति, शोधकर्ता, विद्यार्थी, इतिहासकार अथवा समाजजन पूर्णतः निःशुल्क पढ़ या डाउनलोड कर सकता है:

- Zenodo (स्थायी DOI सहित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक उद्धरण-योग्य)
- Internet Archive (विश्व की सबसे बड़ी निःशुल्क डिजिटल लाइब्रेरी)
- Scribd
- Academia.edu (शोधकर्ताओं का वैश्विक मंच)
- Google Play Books

इन पाँचों प्रतिष्ठित मंचों पर एक साथ उपलब्ध होना यह प्रमाणित करता है कि यह कृति कोई साधारण प्रकाशन नहीं, बल्कि एक गम्भीर, सुसंगठित एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध-सामग्री है।

**हिंदी संस्करण — Notion Press पर शीघ्र आ रहा है**

समाज के उन सभी बंधुओं के लिए जो अपनी मातृभाषा हिंदी में पढ़ना पसंद करते हैं, उनकी सुविधा हेतु पुस्तक का सम्पूर्ण हिंदी संस्करण Notion Press के माध्यम से प्रकाशित किया जा रहा है, जो वर्तमान में समीक्षा (review) प्रक्रिया में है और शीघ्र ही उपलब्ध होगा।

कृपया एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना ध्यानपूर्वक पढ़ें: Notion Press पर उपलब्ध होने वाले हिंदी संस्करण के हार्डकवर एवं पेपरबैक (मुद्रित/भौतिक) संस्करण छपाई तथा मुद्रण-व्यय के कारण निःशुल्क नहीं होंगे, बल्कि उचित एवं वास्तविक मूल्य लेकर ही उपलब्ध कराए जाएँगे। यह पुस्तक का व्यावसायिक print-on-demand संस्करण है, जिसमें प्रत्येक प्रति की छपाई, बाइंडिंग एवं वितरण की वास्तविक लागत निहित होती है, अतः इसका वहन पाठकों को स्वयं करना होगा। इसमें संगठन का कोई व्यावसायिक लाभ सम्मिलित नहीं है — यह केवल मुद्रण-व्यय की प्रतिपूर्ति है।

ध्यान रहे — ऊपर दिए गए पाँचों डिजिटल/ऑनलाइन मंचों पर अंग्रेज़ी संस्करण सदैव पूर्णतः निःशुल्क बना रहेगा।

**समाज से हार्दिक अपील**

यह पुस्तक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि या साहित्यिक कृति मात्र नहीं है — यह सम्पूर्ण सनातन वैष्णव बैरागी समाज की साझा, अमूल्य धरोहर है। हमारा हार्दिक अनुरोध है कि इसे अधिक-से-अधिक साझा करें — अपने परिवार में, अपने गाँव-शहर में, अपने सामाजिक समूहों में, अपने रिश्तेदारों एवं मित्रों में — ताकि यह प्रामाणिक इतिहास हर घर, हर पीढ़ी तक पहुँचे, और आने वाली संतानें अपनी जड़ों को, अपने पूर्वजों के त्याग एवं संघर्ष को, गर्व के साथ जान सकें।

समाज की पहचान, गौरवशाली परंपरा एवं ऐतिहासिक संघर्ष को उजागर करने वाला यह महत्वपूर्ण कार्य केवल आपके सहयोग, साझाकरण एवं समर्थन से ही वास्तव में सार्थक और सफल बनेगा। यह समय है जब समाज एकजुट होकर अपने इतिहास को गर्व से अपनाए और उसे संरक्षित करने में अपनी भूमिका निभाए।

"दावों से नहीं, दस्तावेज़ों से इतिहास बोलेगा।"

जय श्री हरि

अधिक जानकारी हेतु वेबसाइट देखें: www.nareshswaminimbark.in
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