प्रबुद्ध मिलन समारोह 2026 — वैष्णव बैरागी समाज में शिक्षा और संस्कार पर ऐतिहासिक सम्मेलन | नरेश दास वैष्णव निम्बार्क

16 अगस्त 2026 को महलाणा रोड स्थित शेर सिंह बैरागी धर्मशाला में आयोजित प्रबुद्ध मिलन समारोह की रिपोर्ट — शिक्षा, संस्कार और 200 वर्षों के बैरागी इतिहास पर ऐतिहासिक सम्मेलन।

सनातन वैष्णव बैरागी समाज4 min read

बैरागी समाज में पहली बार उठी शिक्षा और संस्कार की ऐसी आवाज़!
200 वर्षों का इतिहास, शिक्षा की बात और संस्कारों का संकल्प — एक मंच पर जुटे समाज के प्रबुद्धजन
16 अगस्त 2026 | आदरणीय शेर सिंह बैरागी धर्मशाला, महलाणा रोड
जय श्री कृष्णा। राधे-राधे।
आज दिनांक 16 अगस्त 2026 को आदरणीय शेर सिंह बैरागी धर्मशाला, महलाणा रोड पर “प्रबुद्ध मिलन समारोह — शिक्षा और संस्कार” का गरिमामय आयोजन किया गया। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि वैष्णव बैरागी समाज में शिक्षा और संस्कार जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पहली बार इस प्रकार का सम्मेलन आयोजित किया गया।
समारोह में समाज के प्रबुद्धजन, इतिहासकार, लेखक, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले सम्मानित व्यक्तित्व एक मंच पर एकत्र हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना।
मंच संचालन की जिम्मेदारी
समारोह का मंच संचालन अंतर्राष्ट्रीय लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंच संचालक द्वारा मुख्य अतिथियों, अध्यक्ष महोदय एवं सभी सम्मानित अतिथियों को मंच पर ससम्मान विराजमान करवाया गया। इसके बाद सभी अतिथियों का माला एवं पटका पहनाकर सम्मान किया गया।
इसके पश्चात विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंच संचालक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दीपक के प्रकाश की महत्ता बताते हुए कहा कि दीपक केवल अंधकार दूर करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, विवेक और सकारात्मक विचारों का प्रतीक भी है।
समारोह की गरिमामय उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ज्ञान सिंह बैरागी जी, प्रधान कुरुक्षेत्र धर्मशाला एवं कैप्टन योगेश बैरागी जी, चेयरमैन हरियाणा सरकार उपस्थित रहे।
समारोह की अध्यक्षता भूतपूर्व कर्नल टेकचंद दहिया जी ने की।
अति विशिष्ट अतिथियों में इतिहासकार चरण सिंह स्वामी जी, मेरठ तथा लेखिका आरुषि स्वामी जी, शुक्रताल उपस्थित रहीं।
विशिष्ट अतिथियों में पूर्व प्रिंसिपल दया सिंह स्वामी जी, महासचिव कुरुक्षेत्र धर्मशाला; विकास स्वामी जी, करनावल, 37 वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर; प्रधान नरेंद्र बैरागी जी, भिवानी धर्मशाला; प्रधान करसन स्वामी जी, भिवानी; देवेंद्र स्वामी जी, उप प्रधान कुरुक्षेत्र धर्मशाला; रामनिवास बैरागी जी, कुरुक्षेत्र धर्मशाला तथा चिराग तोमर स्वामी जी उपस्थित रहे।
शिक्षा और संस्कार पर हुआ सार्थक मंथन
कार्यक्रम में मंचासीन सभी अतिथियों को शिक्षा और संस्कार विषय पर अपने विचार रखने का अवसर दिया गया।
सबसे पहले पूर्व प्रिंसिपल दया सिंह स्वामी जी ने शिक्षा और संस्कार के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने शिक्षा को जीवन निर्माण का आधार बताते हुए संस्कारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इसके बाद मास्टर जगबीर वैष्णव जी ने शिक्षा और संस्कार के विषय पर अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी बातें रखीं।
बैरागी अनिल भारद्वाज जी ने भी अपने मुखारविंद से शिक्षा, संस्कार और समाज के भविष्य से जुड़े विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि ज्ञान सिंह बैरागी जी ने लगभग 5 मिनट तक शिक्षा और संस्कार के विषय पर अपने विचार रखे और समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता पर बल दिया।
भूतपूर्व कर्नल टेकचंद दहिया जी ने भी शिक्षा और संस्कार के महत्व पर अपने विचार रखते हुए समाज के भविष्य को लेकर सार्थक संदेश दिया।
मंच संचालन करते हुए नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने भी लगभग 2 मिनट अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य को ज्ञान देती है, लेकिन संस्कार उस ज्ञान को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।
200 वर्षों के बैरागी राजाओं का इतिहास — निःशुल्क पुस्तक वितरण
समारोह का एक विशेष आकर्षण रहा “महंत बने महाराजा” पुस्तक का निःशुल्क वितरण।
अंतर्राष्ट्रीय लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा उपस्थितजनों को पुस्तकें निःशुल्क प्रदान की गईं। इस पुस्तक में लगभग 200 वर्षों के बैरागी राजाओं के इतिहास को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
इसमें राजनांदगांव बैरागी रियासत और छुईखदान बैरागी रियासत सहित बैरागी राजाओं एवं रियासतों के ऐतिहासिक पक्ष को स्थान दिया गया है।
पुस्तक वितरण का उद्देश्य केवल पुस्तक देना नहीं, बल्कि समाज की नई पीढ़ी को अपने इतिहास और पूर्वजों के गौरव से परिचित कराना रहा।
स्मृति चिन्ह से सम्मान
कार्यक्रम के समापन से पूर्व मंचासीन समस्त अतिथियों को आयोजन समिति की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। यह क्षण समारोह की गरिमा में चार चाँद लगाने वाला रहा, जिसमें आयोजकों ने अतिथियों के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं सम्मान को मूर्त रूप प्रदान किया।
भोजन प्रसाद एवं आत्मीय मिलन
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित समाजबंधुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। भोजन की व्यवस्था अच्छी रही और सभी ने प्रेम एवं आत्मीयता के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
एक समारोह नहीं, एक नई सोच की शुरुआत
आज का यह कार्यक्रम केवल एक सामान्य मिलन समारोह नहीं था। यह शिक्षा, संस्कार, इतिहास और समाज की नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक सोच की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा।
यदि समाज की आने वाली पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपने संस्कार, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान दिया जाए, तो वह आत्मविश्वास के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आज के समारोह का संदेश सरल लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा—
“शिक्षा से भविष्य बनता है,
संस्कार से चरित्र बनता है,
और इतिहास से समाज को अपनी पहचान मिलती है।”
इस ऐतिहासिक एवं विचारपूर्ण आयोजन में उपस्थित सभी सम्मानित अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों और समाजबंधुओं का हृदय से आभार एवं धन्यवाद।
शिक्षित समाज — संस्कारित समाज — सशक्त समाज।
जय श्री कृष्णा। राधे-राधे।

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