नई दिल्ली | 26 जून 2026 | साहित्य एवं इतिहास
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पुस्तक प्रकाशन विशेष
न मुगल झुका सके, न सल्तनत तोड सकी
सनातन वैष्णव बैरागी शासकों की वह अजेय गाथा जो आज तक अनकही थी
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की अंग्रेजी पुस्तक
"Rosary and Thorns: The Vaishnav Bairagi Rulers" — अब विश्वमंच पर
पुस्तक: Rosary and Thorns: The Vaishnav Bairagi Rulers | लेखक: Naresh Das Vaishnav Nimbark | भाषा: अंग्रेजी
नई दिल्ली, 26 जून 2026
भारत के इतिहास में एक ऐसा गौरवशाली अध्याय है जिसे न पाठ्यपुस्तकों में स्थान मिला, न विश्वविद्यालयों के शोधपत्रों में। वह अध्याय है सनातन वैष्णव बैरागी शासकों का — उन संन्यासियों का जिन्होंने एक हाथ में तुलसी की माला और दूसरे हाथ में राजदंड थामकर सनातन धर्म तथा भारतीय राजसत्ता की रक्षा की। इस विस्मृत इतिहास को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत किया है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने — अपनी नवीनतम अंग्रेजी पुस्तक 'Rosary and Thorns: The Vaishnav Bairagi Rulers' के माध्यम से।
18 वर्षों का अथक शोध
18 वर्षों के अथक शोध, दुर्लभ दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर लिखी गई यह पुस्तक उन वैष्णव बैरागी शासकों का प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करती है जिन्होंने मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक भारत की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक धारा को दिशा दी। माला और शूल — भक्ति और शक्ति का यह अद्भुत संगम ही इन योद्धा-संतों की पहचान थी।
लेखक का वक्तव्य
"जब एक सैनिक कलम उठाता है, तो वह केवल पुस्तक नहीं लिखता — वह आने वाली पीढ़ियों का इतिहास लिखता है।"
— नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना
न्याय का प्रयास
लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने भारतीय सेना में 24 वर्षों तक निष्ठापूर्ण सेवा की और संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। सेवानिवृत्ति के उपरांत उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के ऐतिहासिक शोध एवं दस्तावेजीकरण को समर्पित कर दिया। वे वर्तमान में 'वैश्विक सनातन वैष्णव बैरागी सेवा संगठन' के अध्यक्ष हैं।
यह पुस्तक केवल इतिहास का पुनर्लेखन नहीं है — यह उन लाखों वैष्णव बैरागियों को न्याय दिलाने का प्रयास है जिन्होंने इस देश के लिए जिए, लडे और बलिदान हुए, किन्तु इतिहास के पन्नों से जिन्हें जानबूझकर या अनजाने में मिटा दिया गया।
पुस्तक की विशेषता यह है कि यह शोध-आधारित साक्ष्यों पर टिकी है — लोककथाओं या अनुमानों पर नहीं। इसमें मध्यकालीन भारत के वे वैष्णव बैरागी राजवंश सम्मिलित हैं जिन्होंने दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के दौर में भी सनातन धर्म की ज्योति प्रज्वलित रखी। वीर बन्दा बैरागी से लेकर अनेक अल्पज्ञात बैरागी शासकों तक — यह पुस्तक एक सम्पूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है।
पूर्ण समाचार पढें — AIMA Media
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पुस्तक कहाँ से प्राप्त करें
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लेखक परिचय
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना वेटरन, अंतर्राष्ट्रीय लेखक एवं स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। वे निम्बार्क सम्प्रदाय एवं सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहास पर 18 वर्षों से शोध कर रहे हैं। यह उनकी 14 से अधिक पुस्तकों में से एक है।
सम्पर्क: +91 9013535190 वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इस गौरवशाली इतिहास को विश्वमंच पर स्थापित करने का यह प्रयास निःसंदेह भारतीय इतिहास-लेखन में एक महत्वपूर्ण योगदान है। पाठकों से अनुरोध है कि इस दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहर को अवश्य पढें और अपने परिवार तथा मित्रों तक पहुँचाएं।
— प्रकाशन सेवा समाप्त —
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