सनातन कुरुक्षेत्र: सृष्टि, सरस्वती और श्रीकृष्ण की अमर भूमि
जिस मिट्टी पर खड़े होकर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाई, उसकी असली कहानी अब तक किसी ने नहीं बताई।
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की अमरता
हज़ारों साल पहले, कुरुक्षेत्र की उसी धरती पर जहाँ धर्म और अधर्म का सबसे बड़ा युद्ध लड़ा गया था, वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को वह ज्ञान दिया जो आज पूरी दुनिया भगवद्गीता के नाम से जानती है। यह भूमि केवल एक युद्धस्थल नहीं, बल्कि मानवता को कर्तव्य, धर्म और सत्य का बोध कराने वाला वह पावन तीर्थ है जिसने सम्पूर्ण विश्व की चेतना को दिशा दी। परंतु क्या आपने कभी सोचा है — वह भूमि आज ठीक कहाँ स्थित है? सरस्वती नदी, जिसका उल्लेख वेदों में बार-बार मिलता है, क्या सच में लुप्त हो गई, अथवा इतिहास ने उसे विस्मृति के गर्त में धकेल दिया? पुरातात्विक खुदाई में ऐसा क्या प्रकट हुआ, जिसने विद्वानों और इतिहासकारों को भी चकित कर दिया?
एक सैनिक की खोज-यात्रा
इन्हीं अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर खोजने निकले — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार तथा संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक (यूएन पीसकीपर)। सीमा पर चौबीस वर्षों तक अनुशासन, साहस और निष्ठा के साथ देश की रक्षा करने वाले इस सैनिक ने सेवानिवृत्ति के पश्चात कलम को अपना नया शस्त्र बनाया। इसके साथ ही आरम्भ हुई एक ऐसी अथक यात्रा, जो अठारह वर्षों तक अनवरत चलती रही — पुराणों के प्राचीन पन्नों में, पुरातात्विक रिपोर्टों के गहन अध्ययन में, तथा कुरुक्षेत्र की मिट्टी में स्वयं उतरकर सत्य की खोज में। एक सैनिक की अनुशासित दृष्टि और एक शोधार्थी की गहन जिज्ञासा — इन दोनों गुणों के समन्वय ने इस यात्रा को न केवल प्रामाणिक बनाया, बल्कि इसे एक तपस्या का रूप भी दिया।
इस दीर्घ साधना का प्रतिफल है अब तक प्रकाशित अठारह पुस्तकें — आठ हिंदी में तथा दस अंग्रेज़ी में। यह उपलब्धि किसी संस्थागत सहयोग का नहीं, अपितु एक व्यक्ति के दृढ़ संकल्प और परमात्मा के आशीर्वाद का परिणाम है।
शोध-ग्रंथ का सार
उसी अथक तपस्या का सर्वोच्च परिणाम है — "सनातन कुरुक्षेत्र: सृष्टि, सरस्वती और भगवान श्रीकृष्ण की अमर भूमि"। चार सौ चौवालीस पृष्ठों का यह विशाल शोध-ग्रंथ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक ठोस प्रमाण है — कि सनातन धर्म की जड़ें केवल श्रद्धा और आस्था तक सीमित नहीं हैं, अपितु इतिहास, पुरातत्व और भूगर्भीय साक्ष्यों में भी उतनी ही गहराई से स्थापित हैं। इस ग्रंथ में कुरुक्षेत्र की प्राचीन धरोहर का सूक्ष्म विश्लेषण, सरस्वती नदी से जुड़े ऐतिहासिक व वैज्ञानिक साक्ष्य, तथा भगवान श्रीकृष्ण से सम्बद्ध अमर भूमि का विस्तृत एवं प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है — पुराणों, प्राचीन शिलालेखों तथा आधुनिक पुरातात्विक खोजों के ठोस आधार पर।
लेखक ने इस ग्रंथ में केवल पौराणिक कथाओं का पुनर्लेखन नहीं किया, बल्कि प्रत्येक तथ्य को पुरातात्विक उत्खनन रिपोर्टों, प्राचीन ग्रंथों तथा भूगर्भीय अध्ययनों की कसौटी पर परखा है। सैन्य अनुशासन से अर्जित सूक्ष्म निरीक्षण-क्षमता ने इस शोध को एक वैज्ञानिक कठोरता प्रदान की है, जो इसे सामान्य धार्मिक साहित्य से पृथक करती है।
उद्देश्य: व्यावसायिक लाभ नहीं, ज्ञान का संकल्प
सबसे विशेष बात यह है कि इस ग्रंथ को लिखने का उद्देश्य किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है: सनातन ज्ञान को बिना किसी बाधा के, विश्वभर के प्रत्येक पाठक तक निःशुल्क पहुँचाना। यही कारण है कि यह ग्रंथ अनेक अंतरराष्ट्रीय एवं शोध-मंचों पर हिंदी तथा अंग्रेज़ी — दोनों भाषाओं में निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है, ताकि भारत ही नहीं अपितु विश्वभर के इतिहासकार, शोधार्थी और सनातन धर्म में रुचि रखने वाले पाठक इससे लाभान्वित हो सकें।
ऐतिहासिक शोध की प्रासंगिकता
वर्तमान युग में, जब आधुनिक पुरातत्व-विज्ञान और उपग्रह-आधारित सर्वेक्षण तकनीकें प्राचीन नदी-मार्गों तथा लुप्त सभ्यताओं के अवशेषों को नए सिरे से उजागर कर रही हैं, ऐसे समय में यह शोध-ग्रंथ अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह-मार्ग से सम्बन्धित भूगर्भीय साक्ष्य, कुरुक्षेत्र क्षेत्र में हुई पुरातात्विक खुदाइयाँ, तथा वैदिक साहित्य में उल्लिखित भौगोलिक विवरण — इन तीनों का समन्वित अध्ययन इस ग्रंथ को एक बहुआयामी दस्तावेज़ बनाता है। लेखक ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक निष्कर्ष तक पहुँचने से पूर्व सम्बन्धित स्रोतों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाए, जिससे यह ग्रंथ केवल श्रद्धा-आधारित नहीं, अपितु तथ्य-आधारित शोध की श्रेणी में आता है। यही दृष्टिकोण इसे भारतीय इतिहास, प्राचीन भूगोल तथा धार्मिक अध्ययन के क्षेत्र में कार्यरत शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों — सभी के लिए समान रूप से उपयोगी बनाता है।
ग्रंथ की उपलब्धता
यह ग्रंथ निम्नलिखित प्रतिष्ठित मंचों पर उपलब्ध है, हिंदी व अंग्रेज़ी — दोनों भाषाओं में:
Google Play Books (हिंदी संस्करण): https://play.google.com/store/books/details?id=CuL8EQAAQBAJ
Internet Archive — हिंदी संस्करण (निःशुल्क): https://archive.org/details/pdf-hindi-sanatan-kurukshetra-master-manuscript-v-1
Internet Archive — English Edition (Free): https://archive.org/details/pdf-sanatan-kurukshetra-full-book-english
Academia.edu (English, शोधार्थियों हेतु): https://www.academia.edu/171150296/Pdf_Sanatan_Kurukshetra_FULL_BOOK_English
Zenodo (English, स्थायी DOI सहित): https://zenodo.org/records/21757025
Notion Press (Paperback & eBook)
पाठकों से आग्रह
यदि आप सनातन धर्म, भारतीय इतिहास, महाभारत, अथवा कुरुक्षेत्र से जुड़ी ऐतिहासिक सच्चाई जानने में सच्ची रुचि रखते हैं, तो यह ग्रंथ अवश्य पढ़िए। यह न केवल आपकी जिज्ञासाओं का समाधान करेगा, बल्कि आपको उस गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराएगा जिसे समय के साथ विस्मृत किया जाता रहा है। इसे अपने मित्रों, परिवारजनों तथा सामाजिक समूहों में अवश्य साझा कीजिए, ताकि यह अमूल्य ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके और आने वाली पीढ़ियाँ भी अपने इतिहास से जुड़ी रह सकें।
एक सैनिक ने वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा की। अब उसी सैनिक ने सनातन धर्म के इतिहास की रक्षा का बीड़ा उठाया है। आइए, इस संकल्प में साथ दें, और सत्य पर आधारित इस शोध को जन-जन तक पहुँचाने में सहभागी बनें।
वेबसाइट: https://www.nareshswaminimbark.in/books
समाचार लिंक (AIMA Media): https://aimamedia.org/newsdetails.aspx?type=Share&nid=720017
जय हिंद, जय श्रीकृष्ण
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