"जिनका इतिहास दबा दिया गया" — सनातन वैष्णव बैरागी: गुमनाम योद्धाओं की अमर गाथा

सनातन वैष्णव बैरागी संतों-योद्धाओं की गुमनाम बलिदान-गाथा — जिन्हें इतिहास ने भुला दिया। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के 18 वर्षों के शोध पर आधारित प्रामाणिक इतिहास, निःशुल्क उपलब्ध।

Sanatan History & Heritage6 min read

सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा — यूनाइटेड किंगडम अभियान

दुबई, नेपाल, अमेरिका, कनाडा और जापान के बाद — अब सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का यह ऐतिहासिक अभियान यूनाइटेड किंगडम की धरती पर दस्तक दे रहा है।

पिछले पाँच देशों में जिस उत्साह, सम्मान और अपनत्व के साथ मेरी पुस्तकों को अपनाया गया, वह मेरे 18 वर्षों के निरंतर शोध और 24 वर्षों की सैन्य सेवा — दोनों के लिए एक गौरव का क्षण रहा है। आज बारी है ब्रिटेन की — उस धरती की, जहाँ से कभी हिंदुस्तान पर शासन किया गया था, और आज वहीं के पाठक, शोधकर्ता और प्रवासी भारतीय समुदाय उस दबे हुए इतिहास को जानने के लिए उत्सुक हैं, जिसे मुख्यधारा की किताबों ने कभी जगह नहीं दी।

एक ऐसा ही गुमनाम बलिदान — स्वामी बिरड़ दास बैरागी

1857 की क्रांति में हरियाणा के रोहनात गाँव (तत्कालीन जिला हिसार, अब भिवानी) के वीर सन्यासी स्वामी बिरड़ दास बैरागी ने अपने साथियों के साथ अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया। 29 मई 1857 को इस विद्रोह के नेतृत्व में तोशाम, हांसी और हिसार से अंग्रेजों को खदेड़ा गया, जेलें तोड़ी गईं, खजाना लूटा गया, बंदी कैदी आजाद किए गए — और इस संघर्ष में 11 अंग्रेज़ अधिकारी हांसी में और 12 अधिकारी हिसार में मारे गए। यह केवल एक संख्या नहीं — यह उस साहस की गूंज है, जो अपने गाँव की रक्षा हेतु एक सेना के समक्ष खड़ा हो गया था।

बदले की आग में अंग्रेजों ने गाँव को तोपों से घेर लिया — स्वामी बिरड़ दास बैरागी को तोप के मुँह से बाँधकर उड़ा दिया गया, सबके सामने। उनके साथ पकड़े गए ग्रामवासियों को भी नहीं बख्शा गया। 20 जुलाई 1858 को गाँव के दर्जनों वीरों को जंजीरों में जकड़कर हांसी की सड़क पर रोलर से कुचल दिया गया — यही सड़क आज भी "लाल सड़क" कहलाती है। गाँव की समस्त खेती जब्त की गई, और ब्रिटिश सरकार ने रोहनात को "विद्रोहियों का गाँव" का नाम दे दिया।

1970 में हरियाणा सरकार ने इस गाँव के भूमि-दावे हेतु 64 लाख 32 हज़ार रुपये का दावा भी स्वीकृत किया था, परन्तु दशकों बीतने के बाद भी वह भूमि आज तक वापस नहीं मिल सकी।

यह गाथा मेरी पुस्तक "Yatra: Bandook Se Kalam Tak" में विस्तार से वर्णित है — और आज ब्रिटेन के उन्हीं पाठकों तक पहुँच रही है, जिनके पूर्वजों के शासनकाल में यह बलिदान हुआ था। इतिहास का यह वह न्याय है, जो एक सैनिक अपनी कलम से उस भूमि को देना चाहता है, जिसे एक सेनानी ने अपने रक्त से सींचा था।

21 नवंबर 2023 — रोहनात की पावन भूमि पर श्रद्धांजलि
वैश्विक सनातन वैष्णव बैरागी सेवा संगठन की ओर से 21 नवंबर 2023 को मेरे अपने गाँव रामनगर (गनौर, सोनीपत) से लगभग 110 से 115 किमी दूर स्थित रोहनात गाँव तक मैंने अपने साथियों — मा. जगबीर वैष्णव, तुलसी बैरागी, जगदीश बैरागी एवं समाज के अनेक बंधुओं के साथ यात्रा की। वहाँ स्वामी बिरड़ दास बैरागी के दसवें वंशज रतिराम बैरागी एवं उनके संपूर्ण परिवार को स्मृतिचिन्ह, शॉल, पटका तथा अपनी पुस्तक "Yatra: Bandook Se Kalam Tak" श्रद्धापूर्वक समर्पित की।

हमने वह कुआँ भी देखा, जहाँ अनगिनत निर्दोष ग्रामवासियों को तोप से उड़ा दिया गया था, तथा वह स्थान भी, जहाँ स्वामी बिरड़ दास बैरागी को तोप के मुँह से बाँधकर बलिदान किया गया था। उस पावन बलिदान-भूमि को श्रद्धापूर्वक अपने माथे से लगाया। यह केवल एक समारोह नहीं था — यह एक वादा था, एक सेना की ओर से उस सन्यासी को जो आज तक इतिहास की घूल-मिट्टी में दबा पड़ा था।

मेरी प्रतिज्ञा
यह समस्त सेवा-कार्य आज तक किसी भी व्यक्ति से एक रुपया भी चंदा लिए बिना चलाया गया है — यह पूर्णतः प्रभु की कृपा और मेरी सैन्य पेंशन के सहारे चला है, और आगे भी इसी निष्ठा के साथ चलता रहेगा। इसी से मुझे विश्वास है कि यह कार्य सदा निष्कलंक, प्रामाणिक और राजनीतिक क्षेत्र से परे रहेगा — क्योंकि यह किसी संगठन का नहीं, बल्कि स्वयं सनातन धर्म की सेवा है।

लंदन से लेकर मैनचेस्टर, बर्मिंघम से लेकर लेस्टर तक — जहाँ भी सनातन संस्कृति से जुड़े परिवार बसे हैं, वहाँ अब मेरी पुस्तकें Amazon UK पर उपलब्ध हैं। इनमें से कई पुस्तकें Kindle Unlimited सदस्यता के साथ पूर्णतः निःशुल्क पढ़ी जा सकती हैं — क्योंकि मेरा उद्देश्य कभी व्यापार नहीं रहा, केवल सत्य और गुमनाम बलिदानों को उजागर करना रहा है।

Amazon UK पर उपलब्ध प्रमुख शीर्षक
• Yatra: Bandook Se Kalam Tak — एक सैनिक से साधक बनने की मेरी अपनी सनातन यात्रा, जिसमें स्वामी बिरड़ दास बैरागी जैसे गुमनाम बलिदानों का प्रामाणिक वर्णन है।

• Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers — दिल्ली के बैरागी राजाओं से लेकर वीर बंदा बैरागी, छुईखदान और राजनांदगांव तक की गौरवगाथा।

• Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi — निम्बार्क संप्रदाय की आध्यात्मिक व ऐतिहासिक विरासत पर आधारित शोधपरक कृति।
• Sanatan Vaishnav Bairagi: Warriors and Soldiers — उन वैष्णव सन्यासियों का अल्पज्ञात सैन्य इतिहास, जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा हेतु शस्त्र उठाए।

• The Vaishnav Bairagi Kings of India: Warrior Saints of Sanatan Dharma — भारत के उन बैरागी राजाओं की कहानी, जो संत भी थे और योद्धा भी।

• Ramnagar: 422 Years of Untold History — मेरे अपने पैतृक गाँव रामनगर की 422 वर्षों की अनकही विरासत, Kindle Unlimited पर निःशुल्क।

• The Royal Legacy of the Sanatan Vaishnav Bairagis — दिल्ली के बैरागी शासकों से वीर बंदा बैरागी तक की राजसी विरासत, यह भी निःशुल्क सुलभ है।

• Jagatguru Nimbarkacharya: Sanatan Ke Surya — जगद्गुरु निम्बार्काचार्य जी के जीवन और दर्शन पर आधारित हिंदी कृति।

• Ranbhoomi Se Teerthbhoomi Tak: Ek Sainik Ki Amar Gatha — एक सैनिक की आध्यात्मिक यात्रा की अमर गाथा, Kindle Unlimited पर मुफ्त।

• Mahant Bane Maharaja — वैष्णव बैरागी समुदाय के इतिहास पर केंद्रित यह पुस्तक भी निःशुल्क सुलभ है।

यह सूची केवल पुस्तकों की सूची नहीं — यह स्वामी बिरड़ दास बैरागी जैसे हजारों वैष्णव बैरागी संतों, योद्धाओं और शहीदों को दी गई एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने सनातन धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, परन्तु इतिहास के पन्नों ने उनका नाम तक दर्ज नहीं किया। यही सोच मुझे हर सुबह कलम उठाने की शक्ति देती है — कि जो इतिहास दबा दिया गया, उसे मुख्यधारा में लाना मेरा जीवन-लक्ष्य है।

मुझे विश्वास है कि ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों से जुड़ा शोधकर्ता वर्ग, वहाँ बसा विशाल सनातनी समुदाय, और वे युवा जो अपनी जड़ों को फिर से खोजना चाहते हैं — वे इस प्रामाणिक और स्वतंत्र शोध को अपनाएंगे। यह कार्य किसी प्रकाशन गृह की व्यावसायिक योजना नहीं, बल्कि वैश्विक सनातन वैष्णव बैरागी सेवा संगठन की वह प्रतिज्ञा है, जिसने बंदूक छोड़ने के बाद कलम उठाई — ताकि जो इतिहास दबा दिया गया, वह अब दबा न रहे।

ब्रिटेन के वे पाठक जो अपनी जड़ों की खोज में हैं, वे यह जानकर चकित होंगे कि भारत का इतिहास केवल महलों, सेनापतियों और राजवंशों तक सीमित नहीं, बल्कि उन संन्यासियों, साधुओं और मठों के महंतों तक फैला हुआ है, जिन्होंने अपनी आस्था-भूमि तथा अपने रक्त से इस परंपरा को सींचा रखा।

आइए, इस अभियान का हिस्सा बनें। यदि आप स्वयं ब्रिटेन में हैं, या वहाँ आपके कोई परिचित हैं जो सनातन इतिहास में रुचि रखते हैं — तो उन तक यह संदेश अवश्य पहुँचाएँ। यह कोई व्यापारिक अभियान नहीं, बल्कि सेवा, स्मृति और सत्य की एक सांझी यात्रा है।

सभी पुस्तकों के प्रामाणिक लिंक और निःशुल्क डिजिटल संस्करण मेरी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। लिंक बायो में है।

जय हिन्द। जय सनातन।
— वैश्विक सनातन वैष्णव बैरागी सेवा संगठन की ओर से
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