गरीब किसान का बेटा — पूर्व फ़ौजी — जिसने कलम से इतिहास बदल दिया

हरियाणा के छोटे से गाँव रामनगर में एक गरीब वैष्णव किसान परिवार में जन्मे नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 24 वर्ष भारतीय सेना में देश की सेवा की। UN Veteran के रूप में विश्व-मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। सेवानिवृत्ति के बाद 18 वर्षों तक गाँव-गाँव, मठ-मठ, तीर्थ-तीर्थ भटककर सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के उस इतिहास को खोजा — जिसे सदियों से भुला दिया गया था। आज उनकी चार पुस्तकें अमेरिका में प्रकाशित होकर विश्व के हर कोने में पहुँच चुकी हैं।

पुस्तकें (Books)1 min read

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें सनातन
वैष्णव बैरागी परम्परा के उन गौरवशाली अध्यायों
को उजागर करती हैं जिन्हें इतिहास में उचित स्थान
नहीं मिल सका। 18 वर्षों के गहन शोध, गाँव-गाँव,
मठ-मठ और तीर्थ-तीर्थ की यात्राओं पर आधारित ये
पुस्तकें प्रमाणिक तथ्यों, दस्तावेज़ों और संत-परम्परा
की गहन व्याख्या का अद्वितीय संगम हैं।

यात्रा : बंदूक से कलम तक
सिएरा लियोन में UN Mission के दौरान उग्रवादियों
द्वारा बंदी बनाए जाने के उस क्षण की गाथा — जब
बंदूक छोड़कर कलम उठाने का संकल्प लिया गया।
यह एक सैनिक की आत्मकथा है जो देश की सेवा के
बाद सनातन परम्परा की सेवा में समर्पित हो जाता है।

रामनगर : 422 वर्षों का अनसुना इतिहास
हरियाणा के ग्राम रामनगर का वह इतिहास जो आज
तक किसी पुस्तक में नहीं था। 422 वर्षों की
गौरवशाली अनसुनी गाथा — दस्तावेज़ों और
स्मृतियों में क़ैद एक प्राचीन विरासत — पहली बार
प्रकाश में आई।

जगतगुरु निम्बार्काचार्य : सनातन के सूर्य
निम्बार्क संप्रदाय के संस्थापक जगतगुरु
निम्बार्काचार्य के जीवन, दर्शन, उपासना-पद्धति
और परम्परा पर आधारित सम्पूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ।
श्री राधा-कृष्ण की उपासना और द्वैताद्वैत दर्शन
को सरल भाषा में प्रस्तुत करती यह पुस्तक
निम्बार्क परम्परा का अमूल्य दस्तावेज़ है।

महंत बने महाराजा
सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा के उन महंतों की
गाथा जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए राजसी वैभव
को भी अपना साधन बनाया। यह पुस्तक भारतीय
इतिहास, आध्यात्मिक वंश-परम्पराओं और वैष्णव
बैरागी समाज की वीरता का जीवंत प्रमाण है।

ये पुस्तकें हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में
हार्डकवर, पेपरबैक एवं Kindle प्रारूप में Amazon,
Flipkart, Google Play Books तथा Notion Press
पर उपलब्ध हैं।

www.nareshswaminimbark.in

Internal linking suggestions
Related posts
"120 प्रमाण, 492 पृष्ठ, 7 देश — सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर बना ऐतिहासिक शोध अब दक्षिण अफ्रीका में भी"
120 प्रमाणों और 492 पृष्ठों में समाहित सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का ऐतिहासिक शोधग्रंथ अब सात देशों की यात्रा तय कर दक्षिण अफ्रीका पहुँच चुका है। लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क का यह ग्रंथ वैदिक युग से आधुनिक भारत तक की प्रामाणिक गाथा प्रस्तुत करता है।
वेदों से ब्रिटिश अभिलेखों तक — वो सबूत जो अब तक कोई नहीं दिखा सका
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर 100+ ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित शोध-ग्रंथ अब जर्मनी पहुँचा। पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 18 वर्षों की खोज — इसी महीने प्रकाशित।
169 साल बाद भी गुमनाम: 1857 के शहीद रामप्रसाद बैरागी को अब मिली वैश्विक पहचान, सुबाथू में स्मारक अब भी अधूरा
1857 में सुबाथू के राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी रामप्रसाद बैरागी ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रांतिकारियों के लिए गुप्त संदेश-तंत्र तैयार किया था, जिसकी कीमत उन्हें फाँसी देकर चुकानी पड़ी। 169 साल बाद भी उनका स्मारक अधूरा है — पर एक सेवानिवृत्त सैनिक की 18 साल की मुहिम से आज उनकी गाथा 190 देशों के पाठकों तक पहुँच चुकी है।