बंदूक से कलम तक: सिएरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सेवारत रहे पूर्व सैनिक ने रचा सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का इतिहास

24 वर्ष 4 दिन की सैन्य सेवा, दो प्रशंसा-पत्र और मानद नायब सूबेदार का सम्मान — अब कलम से समाज-सेवा में समर्पित लेखक की 20 पुस्तकें प्रकाशित

Itihas Shodh8 min read

सैन्य सेवा: सिएरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र मिशन से मानद नायब सूबेदार पद तक

सोनीपत (हरियाणा)। "रणभूमि से तीर्थभूमि तक" और "यात्रा: बंदूक से कलम तक" — इन्हीं दो शीर्षकों में मानो नरेश दास वैष्णव निंबार्क के संपूर्ण जीवन-वृत्त का सार समाहित है। हरियाणा के सोनीपत जिले की तहसील गनौर स्थित गाँव रामनगर के निवासी नरेश दास वैष्णव निंबार्क — जिनका वैधानिक नाम नरेश कुमार है और जिन्होंने आरंभिक साहित्यिक रचनाओं में स्वयं को नरेश कुमार स्वामी निंबार्क के नाम से प्रतिष्ठित किया — ने भारतीय सेना की सेवा कोर (ASC) में 24 वर्ष 4 दिन तक देश की सेवा करने के उपरांत अपनी लेखनी को सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा तथा भारतीय इतिहास के अनुसंधान में समर्पित कर दिया है।

सेवा अभिलेखों के अनुसार 27 नवंबर 1984 को ड्राइवर (DVR) के पद पर भारतीय सेना में सम्मिलित हुए हवलदार नरेश कुमार (आर्मी नंबर 13895240F) ने सेना सेवा कोर में कुल 24 वर्ष 4 दिन की सेवा दी और 30 नवंबर 2008 को सेवानिवृत्त हुए। उनकी सेवा-पुस्तिका में सर्वाधिक उल्लेखनीय अध्याय है — 13 फरवरी 2000 से 16 सितंबर 2000 तक सिएरा लियोन (पश्चिम अफ्रीका) में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के अंतर्गत विदेश सेवा, जहाँ उन्होंने ड्राइवर के पद पर अपना योगदान दिया।

सेवानिवृत्ति के समय उनके चरित्र का आकलन "अनुकरणीय" (Exemplary) श्रेणी में किया गया। उनकी निष्ठा एवं समर्पण को दो पृथक अवसरों पर औपचारिक रूप से सम्मानित भी किया गया —

16 अक्टूबर 2007 — सेना सेवा कोर केंद्र (उत्तर) के कमांडेंट (ब्रिगेडियर) द्वारा प्रशिक्षण स्कंध, एसटीसी में उत्कृष्ट कर्तव्य-निष्ठा हेतु प्रशंसा-पत्र प्रदान किया गया।

21 नवंबर 2008 — महानिदेशक पूर्ति एवं परिवहन (लेफ्टिनेंट जनरल) द्वारा सेवानिवृत्ति की पूर्व संध्या पर दीर्घ एवं निःस्वार्थ सेवा हेतु दूसरा प्रशंसा-पत्र प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 2009 के अवसर पर उन्हें सेना सेवा कोर के आदेशानुसार मानद नायब सूबेदार (Honorary Naib Subedar) के सम्मानजनक पद से अलंकृत किया गया — यह सम्मान भूतपूर्व सैनिकों में गिने-चुने लोगों को ही प्राप्त होता है।

सेवानिवृत्ति के पश्चात भी उनका राष्ट्र-हित का यह भाव थमा नहीं। वर्ष 2011 में दिल्ली के बुराड़ी स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षक (इंस्ट्रक्टर) के रूप में उन्होंने करनाल पुलिस तथा सोसायटी फॉर इंडियन ऑटोमोटिव फिटनेस एंड एन्वायरनमेंट्स (SEFA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यातायात जागरूकता शिविरों में सैकड़ों वाहन चालकों, थ्री-व्हीलर व ट्रक चालकों, पुलिसकर्मियों तथा स्वयंसेवकों को यातायात नियमों का प्रशिक्षण दिया। राष्ट्रीय यातायात सप्ताह के दौरान आयोजित एक जागरूकता कैंप में तो उन्होंने यातायात के तत्कालीन 95 से बढ़कर 96 हुए नियमों की जानकारी सैकड़ों प्रतिभागियों को दी — यह कार्य दैनिक भास्कर तथा अमर उजाला जैसे प्रमुख समाचार-पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ।

इतिहासकार व लेखक के रूप में नवीन पहचान

अठारह वर्षों के सतत शोध के उपरांत नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने अब तक कुल 20 पुस्तकें प्रकाशित की हैं — जिनमें 9 हिंदी तथा 11 अंग्रेजी भाषा की कृतियाँ सम्मिलित हैं। ये समस्त पुस्तकें भारतीय सभ्यता, महाभारतकालीन इतिहास तथा सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर केंद्रित हैं।

हिंदी में प्रकाशित पुस्तकें (9):
1. सनातन अयोध्या: श्रीराम की जन्मभूमि और भारतीय सभ्यता
2. स्वर्णप्रस्थ की गाथा: 3526 वर्षों का अनसुना इतिहास
3. सनातन कुरुक्षेत्र: सृष्टि, सरस्वती और भगवान श्रीकृष्ण
4. जगतगुरु निंबार्काचार्य: सनातन के सूर्य
5. सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा — वेदों से आधुनिक भारत तक
6. रामनगर: 422 वर्षों का अनसुना इतिहास
7. रणभूमि से तीर्थभूमि तक: एक सैनिक की अमर गाथा
8. यात्रा: बंदूक से कलम तक
9. महंत बने महाराजा

अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तकें (11):
1. Sanatan Ayodhya: The Birthplace of Sri Ram
2. Sanatan Kurukshetra: Creation, Saraswati and Lord Krishna
3. Ramnagar: 422 Years of Untold History
4. The Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
5. The Saga of Swarnprastha
6. Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers
7. Jagatguru Nimbarkacharyaji: Sanatan Ke Surya
8. The Royal Legacy of the Sanatan Vaishnav Bairagis
9. The Vaishnav Bairagi Kings of India
10. Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
11. Sanatan Vaishnav Bairagi: Warriors and Soldiers

"महंत बने महाराजा" का ऐतिहासिक विमोचन

लेखक की नवीनतम कृति "महंत बने महाराजा" का प्रथम विमोचन 25 मई 2025 को सोनीपत के स्वतंत्रता सेनानी भवन, गोहाना रोड में हुआ, जिसकी अध्यक्षता मुंबई के भामाशाह हरीश वैष्णव बारवा ने की तथा मुख्य आतिथ्य नीमच के नाथूलाल बैरागी का रहा। इस अवसर पर पुस्तक की 200 प्रतियाँ उपस्थित जनसमुदाय को निःशुल्क वितरित की गईं।

तत्पश्चात इसी पुस्तक का एक भव्य विमोचन समारोह 21 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की पूर्व बैरागी रियासत छुईखदान (जिला राजनांदगांव) के मंगल भवन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ आयोजित हुआ। यह पुस्तक छुईखदान रियासत के इतिहास पर आधारित है, जिसकी स्थापना महंत रूपदास जी ने वर्ष 1750 में की थी। लेखक ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि भारत की 562 देशी रियासतों में केवल छुईखदान तथा राजनांदगांव ही ऐसी रियासतें थीं जहाँ बैरागी वंश ने शासन किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पंचायत छुईखदान की अध्यक्ष रानी नम्रता देवी वैष्णव रहीं, जबकि अध्यक्षता छुईखदान रियासत के राजा एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गिरिराज किशोर वैष्णव ने की। इस अवसर पर समाज एवं साहित्य सेवा में योगदान हेतु नौ विभूतियों को "नवरत्न सम्मान" से अलंकृत किया गया, जिसमें लेखक नरेश कुमार स्वामी निंबार्क सहित प्रमोद रामावत (नीमच), विजय प्रकाश शर्मा (भुवनेश्वर), लखन लाल वैष्णव (रायपुर), वीरेंद्र बहादुर सिंह (छुईखदान) आदि साहित्यकार व समाजसेवी सम्मिलित थे। साथ ही अखिल भारतीय वैष्णव ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल जितेंद्र किशोर वैष्णव ने तीन साहित्यकारों को विशेष स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। यह कार्यक्रम दैनिक भास्कर, नांदगांव टाइम्स, अमृत संदेश सहित अनेक समाचार-पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ।

बाद में 17 जुलाई 2025 को रायपुर में आयोजित बैठक के दौरान अखिल भारतीय वैष्णव ब्राह्मण सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध श्री दुग्धाधारी मठ मंदिर के दर्शन के अवसर पर "महंत बने महाराजा" पुस्तक की प्रति का अवलोकन किया, जिसकी हरिभूमि समाचार-पत्र ने सराहनापूर्ण चर्चा की।

22 जून 2026 को रामनगर (सोनीपत) की चौपाल में लेखक की छह पुस्तकों — "यात्रा: बंदूक से कलम तक", "महंत बने महाराजा", "रामनगर: 422 वर्षों का अनसुना इतिहास", "रणभूमि से तीर्थभूमि तक", "जगतगुरु निंबार्काचार्यजी" तथा "स्वर्णप्रस्थ की गाथा" — का सामूहिक विमोचन भाजपा के वरिष्ठ नेता दिनेश स्वामी के मुख्य आतिथ्य तथा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ईश्वर कश्यप की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। श्री कश्यप ने कहा कि उनकी पुस्तकें सनातन संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र-चेतना को संरक्षित करने का संदेश देती हैं — इसे हरिभूमि तथा एक्शन इंडिया समाचार-पत्रों ने प्रकाशित किया।

वैष्णव बैरागी समाज की पहचान हेतु ऐतिहासिक पहल

समाज-सेवा के क्षेत्र में भी नरेश दास वैष्णव निंबार्क सक्रिय रहे हैं। वे वैश्विक सनातन वैष्णव बैरागी सेवा संगठन (पंजीकृत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसी हैसियत से 1 जनवरी 2026 को उन्होंने चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी तथा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को एक विधिसम्मत ज्ञापन सौंपा, जिसमें "बैरागी" जाति के साथ उसकी ऐतिहासिक पहचान दर्शाने हेतु "वैष्णव" शब्द जोड़े जाने की मांग रखी गई — यह मांग किसी नई जाति के निर्माण से नहीं, अपितु पूर्वस्थापित परंपरा के शासकीय अभिलेखीकरण से संबद्ध है, तथा संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 पर आधारित है। यह भी अवगत कराया गया कि दिल्ली, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में "बैरागी (वैष्णव)" पहले से ही शासकीय अभिलेखों में मान्य है। मुख्यमंत्री ने इस विषय को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया, तथा आयोग के चेयरमैन ने फरीदाबाद व पलवल में सरकारी सर्वे कराने की बात कही।

इसके अतिरिक्त लेखक सामाजिक सरोकारों में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं — रामनगर स्थित जीवीएम कन्या महाविद्यालय के एनएसएस शिविर में उन्होंने स्वयंसेविकाओं को सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों की जानकारी दी, तो हरियाली तीज उत्सव (जुलाई 2025) के अवसर पर खरखौदा के बंदा वीर बैरागी धर्मशाला में पौधारोपण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व हरियाली, समृद्धि और रिश्तों की मिठास का प्रतीक है तथा प्रकृति से जुड़ाव एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा देने हेतु हर व्यक्ति को पौधे लगाने चाहिए।

विगत पाँच वर्षों से वे क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने का कार्य भी कर रहे हैं, जिसे वे शिक्षा के प्रति अपने सामाजिक दायित्व का अंग मानते हैं। इसका एक जीवंत उदाहरण 20 अप्रैल को गन्नौर स्थित रामनगर के राजकीय उच्च विद्यालय में देखने को मिला, जहाँ शिक्षा, संस्कार तथा सड़क सुरक्षा विषय पर आयोजित एक विशेष जागरूकता सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद आवश्यक है। इस सत्र में उन्होंने अपने सिएरा लियोन स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के अनुभव भी विद्यार्थियों से साझा किए, तथा इसी विषय पर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले 21 विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि सरपंच सुदेश कुमारी की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम को दैनिक जागरण तथा पंजाब केसरी समाचार-पत्रों ने प्रकाशित किया।

कलम अब कर्तव्य है

एक पूर्व सैनिक के रूप में देश-सेवा के पश्चात अब कलम के माध्यम से समाज-सेवा में जुटे नरेश दास वैष्णव निंबार्क का मानना है कि इतिहास का दस्तावेज़ीकरण भी उतना ही आवश्यक कर्तव्य है जितना सीमा की रक्षा। उनकी पुस्तकें सनातन संस्कृति, इतिहास तथा राष्ट्र-चेतना के संरक्षण का संदेश देती हैं, तथा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।

(सम्पर्क: www.nareshswaminimbark.in)

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