रामनगर गन्नौर से पेरिस तक — सनातन इतिहास की कलम पहुँची अंतरराष्ट्रीय मंच तक

रामनगर गन्नौर, सोनीपत की धरती से शुरू हुई नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की शोध-यात्रा अब Amazon France तक पहुँच चुकी है। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा पर आधारित उनकी पुस्तकें अब अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक भी पहुँच रही हैं।

इतिहास (History)3 min read

रामनगर गन्नौर से पेरिस तक — सनातन इतिहास की कलम पहुँची अंतरराष्ट्रीय मंच तक
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 18 पुस्तकें प्रकाशित, 19वीं पुस्तक "सनातन अयोध्या" पर कार्य जारी
हरियाणा के सोनीपत जिले के रामनगर गन्नौर की धरती से शुरू हुई एक शोध और लेखन यात्रा आज अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मंचों तक पहुँच चुकी है।
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क द्वारा सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, इतिहास, संस्कृति, संत परंपरा और भारतीय विरासत से जुड़े विषयों पर लगातार लेखन एवं शोध किया जा रहा है।
अब तक 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं—8 हिंदी और 10 अंग्रेज़ी। और इसी यात्रा की अगली कड़ी के रूप में 19वीं पुस्तक "सनातन अयोध्या" पर कार्य लगातार जारी है।
यह केवल पुस्तकों की संख्या नहीं है। प्रत्येक पुस्तक के पीछे अध्ययन, शोध, स्रोतों की खोज, ऐतिहासिक सामग्री का संकलन और वर्षों की मेहनत जुड़ी हुई है।
18 पुस्तकें प्रकाशित—19वीं पर कार्य जारी
8 हिंदी पुस्तकें और 10 अंग्रेज़ी पुस्तकें प्रकाशित होने के बाद अब शोध-यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है—"सनातन अयोध्या"।
अयोध्या भारतीय सभ्यता, श्रीराम की परंपरा और सनातन सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र रही है। इस विषय पर तैयार किया जा रहा शोधग्रंथ भी उसी दृष्टिकोण से गंभीर अध्ययन, संदर्भों और उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
इस प्रयास का उद्देश्य केवल किसी एक दृष्टिकोण को स्थापित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध प्रमाणों और विभिन्न विद्वानों के मतों को समझते हुए विषय को पाठकों के सामने रखना है।
बंदूक से कलम तक
एक सैनिक जीवन से इतिहास और शोध की दुनिया तक पहुँची यह यात्रा अपने आप में एक अलग अनुभव है।
कभी हाथ में बंदूक थी और आज हाथ में कलम है।
इसी भावना को पुस्तक "यात्रा: बंदूक से कलम तक" अपने भीतर समेटे हुए है।
आज वही कलम रामनगर गन्नौर से निकलकर भारत के बाहर भी पाठकों तक पहुँच रही है। Amazon France पर लेखक की अनेक पुस्तकें दिखाई दे रही हैं, जिनमें Rosary and the Throne, Ramnagar: 422 Years of Untold History, Jagatguru Nimbarkacharya, Mahant Bane Maharaja, The Vaishnav Bairagi Kings of India और YATRA: BANDUK SE KALAM TAK जैसी पुस्तकें शामिल हैं।
रामनगर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
इस यात्रा का सबसे बड़ा संतोष यह है कि एक छोटे से गाँव से शुरू हुआ शोध-लेखन अब अंतरराष्ट्रीय पाठकों के सामने पहुँच रहा है।
लेकिन उद्देश्य केवल प्रसिद्धि या पुस्तकों की संख्या बढ़ाना नहीं है।
उद्देश्य है—सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहास, संतों, महंतों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों को लिखित रूप में सुरक्षित करना।
इतिहास के विषय में जहाँ प्रमाण उपलब्ध हैं, वहाँ प्रमाणों को महत्व देना और जहाँ विद्वानों के मत अलग-अलग हैं, वहाँ विभिन्न मतों को निष्पक्ष रूप से सामने रखना—यही शोध-लेखन की मूल भावना है।
18 पुस्तकें पूरी हुईं, 19वीं की यात्रा जारी है
8 हिंदी + 10 अंग्रेज़ी = 18 प्रकाशित पुस्तकें।
और अब—19वीं पुस्तक "सनातन अयोध्या" पर कार्य जारी है।
यह यात्रा अभी रुकी नहीं है। रामनगर गन्नौर की धरती से उठी कलम आगे भी चलती रहेगी।
अधिक जानकारी के लिए
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in
ई-मेल: nareshkumarswami741964@gmail.com
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
इतिहासकार | शोधकर्ता | लेखक
बंदूक से कलम तक—यात्रा जारी है।
रामनगर गन्नौर से विश्व-पटल तक—सनातन इतिहास की कलम जारी है।
जय श्री राधे। जय श्री कृष्ण। जय सनातन धर्म।

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