बंदूक छोड़ अब बच्चों के हाथ में संस्कार थमा रहे हैं पूर्व सैनिक नरेश दास, देखें कैसे बदली स्कूल की तस्वीर

​"पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने राजकीय उच्च विद्यालय रामनगर में बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सड़क सुरक्षा के गुर सिखाए। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का यह अनूठा मिशन देखें।"

​समाज सेवा2 min read

बंदूक छोड़ अब बच्चों के हाथ में संस्कार थमा रहे हैं पूर्व सैनिक नरेश दास, देखें कैसे बदली स्कूल की तस्वीर
​एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता! वह वर्दी उतारने के बाद भी राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटा रहता है। इसकी जीती-जागती मिसाल पेश की है पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने। कल गन्नौर के रामनगर स्थित राजकीय उच्च विद्यालय (3526) में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने शिक्षा और समाज सेवा की एक नई परिभाषा लिख दी।
​अनुशासन की पाठशाला: जब गूँजी फौजी की आवाज़


​स्कूल के प्रांगण में जब भारतीय सेना के 24 वर्षों के अनुभव के साथ नरेश दास जी ने मोर्चा संभाला, तो विषय 'दुश्मन' नहीं बल्कि 'अज्ञानता' और 'असुरक्षा' था। उन्होंने विद्यार्थियों को 'शिक्षा, संस्कार एवं सड़क सुरक्षा' के वो गुर सिखाए जो अक्सर किताबी पन्नों में छूट जाते हैं।
​उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, "केवल डिग्री हासिल करना शिक्षा नहीं है, बल्कि संस्कारों के साथ एक जिम्मेदार नागरिक बनना ही असली कामयाबी है।" उन्होंने अपने सैन्य जीवन और वर्ष 2000 में सिएरा लियोन (संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन) के दौरान विदेशी धरती पर तिरंगे के मान की गौरवगाथा भी साझा की।
​सड़क सुरक्षा: नियमों का पालन ही जीवन का कवच
​सत्र के दौरान नरेश दास जी ने यातायात के नियमों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बच्चों को 'सड़क सुरक्षा दूत' बनने की शपथ दिलाई ताकि वे अपने परिवार और समाज को भी जागरूक कर सकें।
​21 मेधावी छात्रों का सम्मान और निरंतर सेवा


​कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाने के लिए एक प्रश्नोत्तरी (Quiz) आयोजित की गई। इसमें सही उत्तर देने वाले 21 मेधावी छात्रों को पुरस्कृत किया गया। आपको बता दें कि नरेश दास जी अब तक अपनी इस मुहिम के तहत 724 बच्चों को सम्मानित कर चुके हैं।
​इतिहास और शोध का संगम
​नरेश दास जी केवल एक शिक्षक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक गंभीर शोधकर्ता के रूप में भी समाज की सेवा कर रहे हैं। उनके शोध कार्यों की गहराई को समझने के लिए आप हमारी पिछली पोस्ट ब्रिटिश रिकॉर्ड्स और सनातन वैरागी योद्धाओं का गौरवशाली इतिहास पढ़ सकते हैं, जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ योद्धा परंपरा पर प्रकाश डाला है।
​कार्यक्रम में रही गरिमापूर्ण उपस्थिति
​इस पुनीत कार्य में मुख्य अतिथि के रूप में सरपंच सुदेश कुमारी मौजूद रहीं। साथ ही मुख्य अध्यापक दिनेश भारद्वाज, अध्यापक राजेश बिबयान, सुनील कुमार, दिलबाग सिंह, राजेश छोक्कर और समाजसेवी तुलसी बैरागी ने भी शिरकत की। सभी ने नरेश दास जी द्वारा लिखित पुस्तकों— 'बंदूक से कलम तक' और 'महंत बने महाराजा' की सराहना की।
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​लेखक परिचय:
नरेश दास वैष्णव निंबार्क
पूर्व सैनिक (भारतीय सेना), स्वतंत्र पत्रकार एवं इतिहास शोधकर्ता।
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in
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