**18 वर्ष, 40 अंतरराष्ट्रीय मंच, 6 महाद्वीप — एक सेवानिवृत्त फौजी ने अकेले खड़ा किया सनातन इतिहास का साम्राज्य**

रामनगर की धरती से उठी एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की कलम आज 6 महाद्वीपों के 40 अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच चुकी है। अठारह वर्षों के अथक शोध से जन्मी यह यात्रा — "बंदूक से कलम तक" — सनातन धर्म, वैष्णव बैरागी परंपरा और भारतीय इतिहास को विश्व-पटल पर स्थापित कर रही है।

Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition4 min read

18 वर्ष, 40 अंतरराष्ट्रीय मंच, 6 महाद्वीप — एक सेवानिवृत्त फौजी ने अकेले खड़ा किया सनातन इतिहास का साम्राज्य
रामनगर की पावन धरती से उठी एक छोटी-सी कलम की यात्रा आज विश्व-पटल पर अपनी छाप छोड़ चुकी है। जिस रामनगर को हम राम की नगरी के नाम से जानते हैं, उसी धरती से बैठकर पिछले अठारह वर्षों से सनातन धर्म, भारतीय इतिहास और वैष्णव बैरागी परंपरा से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन और शोध का प्रयास किया जा रहा है।
यह यात्रा कभी सुगम नहीं रही। गाँव-गाँव, तीर्थ-तीर्थ, अभिलेखागारों और पुराने ग्रंथों के बीच भटकते हुए, बूँद-बूँद जल की भाँति यह ज्ञान एकत्रित हुआ है। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े संस्थान भी नहीं कर पाते — बिना किसी बड़े प्रकाशन-घराने के सहारे, अपने बलबूते पर सनातन ज्ञान को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाना।
सेना से कलम तक की यात्रा
सैन्य जीवन ने एक बात गहराई से सिखाई — सेवा में कमाई नहीं, कर्तव्य देखा जाता है। सीमा पर देश की रक्षा करते समय कभी लाभ-हानि नहीं गिनी गई; आज कलम से सनातन धर्म की सेवा करते हुए भी वही भावना कायम है। यही कारण है कि इस पूरी यात्रा का शीर्षक ही रखा गया — "बंदूक से कलम तक।"
आज कहाँ पहुँची यह यात्रा
आज इस प्रयास का परिणाम चौंकाने वाला है — कुल 40 अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति, जो 6 महाद्वीपों में फैली हुई है:
एशिया — Notion Press और Academia.edu (निःशुल्क, मूल प्रकाशन-मंच), Flipkart, Amazon.in, Amazon.ae (यूएई), Amazon.jp (जापान), Amazon.sg (सिंगापुर), Yes24 (दक्षिण कोरिया), Scribd (निःशुल्क)
उत्तरी अमेरिका — Amazon.com, Walmart, Barnes & Noble, Books-A-Million, ThriftBooks, Google Play Books, Internet Archive (निःशुल्क), Amazon.ca (कनाडा), Bookshop.org
यूरोप — AbeBooks, Amazon.de (जर्मनी), Waterstones (ब्रिटेन), Medimops, Zenodo (निःशुल्क), Saxo.com (डेनमार्क), Hugendubel.de, Decitre.fr (फ्रांस), IBS.it (इटली), Feltrinelli, Bol.com (नीदरलैंड्स), Adlibris (स्वीडन), Amazon.it, Amazon.es (स्पेन), Amazon.nl
दक्षिण अमेरिका — Amazon.com.br (ब्राज़ील)
अफ्रीका — Exclusive Books, Amazon.co.za (दक्षिण अफ्रीका)
ऑस्ट्रेलिया — Readings, Dymocks, Booktopia, Amazon.com.au
पूर्णतः निःशुल्क मंच — Academia.edu, Internet Archive, Zenodo और Scribd पर उपलब्ध सामग्री बिना किसी शुल्क के पढ़ी व डाउनलोड की जा सकती है। कोई भी पाठक, विद्यार्थी अथवा शोधकर्ता यहाँ से निःशुल्क लाभ उठा सकता है — किसी पुस्तक को खरीदना अनिवार्य नहीं है।
प्रमुख कृतियाँ
इस यात्रा में अब तक कई महत्वपूर्ण शोध-ग्रंथ सामने आए हैं — Sanatan Kurukshetra (FULL BOOK, English, 407 पृष्ठ); सनातन कुरुक्षेत्र (हिंदी संस्करण, 483 पृष्ठ); The Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition: From the Vedic Age to Modern India (English, 208 पृष्ठ); सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा: वैदिक युग से आधुनिक भारत तक (हिंदी, 481 पृष्ठ); The Saga of Swarnprastha: Sonipat's 3,526-Year Untold Mahabharata History (126 पृष्ठ); Ramnagar: 422 Varshon Ka Ansuna Itihaas; Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers; Jagatguru Nimbarkacharya: The Sun of Sanatan Dharma; Mahant Bane Maharaja: Sanatan Vaishnav Bairagi Parampara; Yatra: Bandook Se Kalam Tak; तथा सनातन भारत — नया सवेरा (मासिक ई-पत्रिका, हिंदी व अंग्रेज़ी संस्करण)।
उद्देश्य क्या है
यह प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण है। क्या इन पुस्तकों का उद्देश्य केवल पुस्तक बेचना है? नहीं। हमारा पहला और अंतिम उद्देश्य है — सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार। हम चाहते हैं कि सनातन धर्म, भारतीय इतिहास, तीर्थ परंपरा, वैष्णव बैरागी परंपरा, संत परंपरा और हमारी प्राचीन सभ्यता से संबंधित सामग्री अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।
जो व्यक्ति पुस्तक खरीद नहीं सकता, वह भी उपलब्ध निःशुल्क डिजिटल सामग्री को पढ़ सके। जो विद्यार्थी शोध करना चाहता है, उसे प्रारंभिक सामग्री मिल सके। जो युवा अपने इतिहास को समझना चाहता है, वह पढ़ सके। और जो शोधकर्ता किसी विषय पर आगे काम करना चाहता है, वह मूल संदर्भों तक पहुँचने का प्रयास कर सके।
ज्ञान को बंद अलमारी में नहीं रखना है
कई वर्षों से यह प्रयास रहा है कि जो कुछ अध्ययन किया, जो यात्राओं में देखा, जिन विषयों पर शोध किया और जो सामग्री लिखी — उसे केवल अपने पास सुरक्षित न रखा जाए। ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज तक पहुँचे।
यह कोई दावा नहीं कि हर बात अंतिम सत्य है। बल्कि स्पष्ट मत यही है — इतिहास को पढ़िए, प्रमाण देखिए, अलग-अलग इतिहासकारों के मत समझिए और फिर अपना निष्कर्ष निकालिए। जहाँ प्रमाण मजबूत होंगे, वहाँ प्रमाण प्रस्तुत किए जाएंगे। जहाँ इतिहासकारों के मत अलग होंगे, वहाँ अलग-अलग मत सामने रखे जाएंगे। यही अनुशासन इतिहास-लेखन का धर्म है।
रामनगर से विश्व-मंच तक
यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि से अधिक भारतीय ज्ञान-परंपरा को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का प्रयास है। सैनिक जीवन में सीमा की रक्षा की, अब कलम से सांस्कृतिक सीमाओं की रक्षा का प्रयास है — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों को भूल न जाएँ।
हमारा संकल्प
किताबों का व्यापार नहीं, ज्ञान का प्रचार।
झूठे दावे नहीं, प्रमाण आधारित शोध।
विवाद नहीं, इतिहास की खोज।
व्यक्तिगत प्रसिद्धि नहीं, सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार।
यदि आप इतिहास, सनातन धर्म, वैष्णव परंपरा, निम्बार्क संप्रदाय या प्राचीन भारतीय सभ्यता में रुचि रखते हैं, तो Academia.edu, Internet Archive, Zenodo अथवा Scribd पर नरेश दास वैष्णव निम्बार्क के नाम से प्रोफाइल खोजें। वहाँ उपलब्ध सारी सामग्री पूर्णतः निःशुल्क है।
बंदूक से कलम तक — रामनगर से विश्व-मंच तक।
जय श्रीराम। जय श्री राधे-कृष्ण। जय श्री निम्बार्काचार्य। जय सनातन धर्म। जय हिंद।
www.nareshswaminimbark.in

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