१. बंदूक से कलम तक — एक सैनिक-इतिहासकार की वह शपथ जो सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा को अमर रखेगी

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, UN Peacekeeper, लेखक एवं इतिहासकार। 24 वर्षों की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा (1984–2008) के पश्चात् 18 वर्षों से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क सम्प्रदाय और संत-योद्धा परंपरा पर शोध एवं लेखन। 11+ पुस्तकें, 190+ देशों में उपलब्ध। बंदूक से कलम तक — यही मेरा मिशन, यही मेरी पहचान।

निंबार्क संप्रदाय के आचार्य एवं वैष्णव बैरागी संत1 min read

नमस्कार मित्रों,

मैं हूँ नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — भारतीय सेना का सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सेवारत UN Peacekeeper, लेखक एवं इतिहासकार।

24 वर्षों की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा (1984–2008) के पश्चात् मैंने एक नया संकल्प लिया — बंदूक से कलम तक। वर्दी उतारने के बाद कलम उठाई और सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के उस गौरवशाली इतिहास को समाज तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया, जिसे मुख्यधारा के इतिहास ने सदैव अनदेखा किया।

18 वर्षों के अथक शोध में मैंने यह सिद्ध किया कि वैष्णव बैरागी केवल साधु नहीं थे — वे संत भी थे और योद्धा भी। एक हाथ में माला, दूसरे हाथ में तलवार। यही सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा की असली पहचान है।

पहली बार इस पवित्र परंपरा को डिजिटल मंच पर व्यवस्थित, शोध-आधारित रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह आप सभी के स्नेह और प्रोत्साहन से ही सम्भव हुआ है।

मेरी 11 से अधिक पुस्तकें विश्व के 190 से अधिक देशों में Amazon Kindle, Google Play Books, Apple Books एवं Kobo पर उपलब्ध हैं।

राष्ट्र प्रथम — यही मेरा संकल्प, यही मेरी पहचान।

जय हिन्द। जय श्री राधे-कृष्ण।

— नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना
लेखक | इतिहासकार | स्वतंत्र शोधकर्ता
www.nareshswaminimbark.in

Internal linking suggestions