जय श्रीमन नारायण
स्वर्णप्रस्थ की गाथा
3526 साल बाद पहली बार उद्घाटित
सोनीपत का 3526 वर्ष पुराना अनसुना महाभारतकालीन इतिहास
जिस नगर की माँग स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से की, और दुर्योधन ने कहा — सुई की नोक भर भी नहीं दूँगा। उसी एक हठ से महाभारत का महायुद्ध हुआ। वह नगर था स्वर्णप्रस्थ — आज का सोनीपत। उस पवित्र नगर का 3526 वर्षों का अनसुना इतिहास पहली बार एक पुस्तक में प्रस्तुत है।
वे 9 सत्य जो इतिहास ने छुपाए
सोनीपत — रोम से भी प्राचीन नगर, 1500 ईसापूर्व में स्थापित।
भगवान श्रीकृष्ण ने इसी नगर की माँग दुर्योधन से की थी।
दुर्योधन के हठ ने महाभारत के महायुद्ध को अनिवार्य बना दिया।
यौधेय गणराज्य ने 400 ईसापूर्व से 1000 वर्षों तक अखण्ड शासन किया।
बंदा बैरागी का प्रथम सैनिक मुख्यालय सोनीपत में 21 फरवरी 1709 को स्थापित हुआ।
सतकुंभा कुंड 5000 वर्षों में कभी नहीं सूखा।
हर्षवर्धन की ताम्र मोहर 1871 की खुदाई में सोनीपत से प्राप्त हुई।
खरखोदा — महाभारतकाल से मारुति सुज़ुकी तक की अखण्ड विरासत।
सोनीपत का सम्पूर्ण महाभारतकालीन इतिहास पहली बार एक प्रामाणिक ग्रंथ में।
पुस्तक के विषय में
यह पुस्तक प्राचीन स्वर्णप्रस्थ अर्थात वर्तमान सोनीपत के महाभारतकालीन, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर आधारित एक शोधपरक अध्ययन है। इसमें उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों, लोक परंपराओं, पुराणों एवं महाभारत संदर्भों के आधार पर स्वर्णप्रस्थ की गौरवशाली विरासत का परिचय प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक भारतीय इतिहास, संस्कृति और सनातन परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों एवं शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है।
यह पुस्तक पूर्णतः निःशुल्क है
ज्ञान सबका है, इतिहास सबका है — इसलिए यह पुस्तक 195 देशों में पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है। न कोई मूल्य, न कोई रॉयल्टी। मुक्त पठन, मुक्त अभिगम, मुक्त साझाकरण।
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Internet Archive: https://archive.org/details/sonipat-ka-3526-varso-ka-ansuna-itihas
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Academia.edu: https://independent.academia.edu/NareshDasVaishnavNimbarik
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लेखक परिचय
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना | UN वेटरन
अंतर्राष्ट्रीय लेखक एवं सनातन वैष्णव इतिहास शोधकर्ता
18 वर्षों की शोध यात्रा | 14वीं पुस्तक
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in
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