नेपाल में सनातन का प्रकाश
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें — नेपाल में उपलब्ध
14 पुस्तकें | 190 देश | सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा
नेपाल — सनातन धर्म का दूसरा हृदय
भारत और नेपाल — दो देश, एक संस्कृति, एक धर्म, एक परंपरा।
नेपाल विश्व का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था। पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, जानकी मंदिर — यह तीर्थ भारत के किसी भी तीर्थ से कम पावन नहीं। नेपाल की धरती पर वैष्णव बैरागी परंपरा सदियों से जीवित है।
श्रीआचार्य परम्परा परिचय ग्रंथ में स्पष्ट उल्लेख है कि निम्बार्क संप्रदाय के स्वभूरामदेवाचार्य जी के शिष्य नेपाल के राणा महाराज भी थे। उन्होंने वैष्णवी दीक्षा ली और संप्रदाय का प्रसार नेपाल तक किया।
स्रोत: श्रीआचार्य परम्परा परिचय — पं. श्रीकिशोरदासजी, निम्बार्कतीर्थ, सलेमाबाद
निम्बार्क संप्रदाय का नेपाल से अटूट नाता
निम्बार्क संप्रदाय — जो वैष्णव चतुःसंप्रदाय में सर्वाधिक प्राचीन है — उसके अनुयायी केवल भारत में नहीं, नेपाल में भी हजारों वर्षों से विद्यमान हैं।
नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में भी वैष्णव बैरागी साधु सेवा करते हैं। मुक्तिनाथ तीर्थ — जो हिमालय की गोद में है — वहाँ भी वैष्णव परंपरा की जीवंत धारा प्रवाहित है। जानकी मंदिर जनकपुर में — माता सीता की जन्मभूमि पर — वैष्णव भक्ति का महासागर लहराता है।
यह वह परंपरा है जिस पर हरियाणा के एक गरीब किसान के बेटे ने 18 वर्षों का शोध किया और 14 पुस्तकें लिखीं।
कौन हैं नरेश दास वैष्णव निम्बार्क?
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — हरियाणा के सोनीपत जिले के छोटे से गाँव रामनगर गन्नौर से हैं। एक गरीब किसान परिवार में जन्म। परंतु संकल्प असाधारण था।
1999 — कारगिल:
कारगिल की बर्फीली चोटियों पर Operation Vijay में वीरतापूर्वक लड़े। तिरंगे की रक्षा की।
2000 — सिएरा लियोन:
UN शांतिसेना के अंतर्गत सिएरा लियोन, पश्चिम अफ्रीका में RUF उग्रवादियों द्वारा बंदी बनाए जाने की विकट परिस्थिति का साहसपूर्वक सामना किया।
24 वर्ष — सेना:
भारतीय सेना में 24 वर्षों की सेवा। नायब सूबेदार पद से सेवानिवृत्त।
27 मार्च 2015 — कोमा से वापसी:
एक भीषण सड़क दुर्घटना में कोमा में चले गए। मृत्यु के द्वार तक गए। परंतु लौटे। और लौटकर कलम उठाई।
"जो मृत्यु के द्वार से लौटकर इतिहास लिखे — उसकी कलम में साधारण स्याही नहीं होती। उसमें ईश्वर का अनुग्रह होता है।"
14 पुस्तकें — एक सैनिक की कलम से
हिंदी — 6 पुस्तकें:
यात्रा: बंदूक से कलम तक
महंत बने महाराजा
स्वर्णप्रस्थ की गाथा
रामनगर: 422 वर्षों का अनसुना इतिहास
जगतगुरु निम्बार्काचार्यजी: सनातन के सूर्य
रणभूमि से तीर्थभूमि तक
English — 8 Books:
Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi
Sanatan Vaishnav Bairagi: Forgotten Warriors and Soldiers
The Vaishnav Bairagi Kings of India: Warrior Saints
The Royal Legacy of Sanatan Vaishnav Bairagis
Rosary and the Throne: The Vaishnav Bairagi Rulers
Ramnagar: 422 Years of Untold History
The Saga of Swarnprastha
Ranbhoomi se Teerthbhoomi Tak
नेपाल में उपलब्धता
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की पुस्तकें नेपाल में निम्नलिखित माध्यमों से उपलब्ध हैं:
Amazon Kindle — नेपाल के पाठक Amazon Global Store से eBook डाउनलोड कर सकते हैं
Notion Press — Print-on-demand के माध्यम से नेपाल में पेपरबैक पुस्तक मंगाई जा सकती है
Google Play Books — नेपाल में उपलब्ध। निःशुल्क एवं सशुल्क दोनों
Internet Archive — archive.org पर निःशुल्क उपलब्ध
Scribd — विश्वभर के पाठकों के लिए
कुल 190 देशों में उपलब्ध — नेपाल सहित
नेपाल के पाठकों के लिए विशेष संदेश
नेपाल और भारत की संस्कृति एक है। हमारे वेद एक हैं। हमारे तीर्थ एक हैं। हमारी परंपरा एक है।
जब हरियाणा के एक सैनिक ने वैष्णव बैरागी परंपरा का इतिहास लिखा — तो वह केवल भारत का इतिहास नहीं था। वह नेपाल का भी इतिहास था। क्योंकि यह परंपरा हिमालय के उस पार भी उतनी ही जीवंत है।
नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में जो वैष्णव साधु सेवा करते हैं — उनकी परंपरा की जड़ें इन्हीं पुस्तकों में हैं। जनकपुर के जानकी मंदिर में जो भक्ति लहराती है — उसी भक्ति की गाथा इन पुस्तकों में है।
"नेपाल के भाइयों और बहनों से निवेदन है — इस सनातन इतिहास को पढ़ें। अपनी जड़ों को जानें। अपनी परंपरा को पहचानें।"
15वीं कृति — सनातन कुरुक्षेत्र
अब आ रही है 15वीं ऐतिहासिक कृति —
सनातन कुरुक्षेत्र
सृष्टि, सरस्वती और श्रीकृष्ण की अमर भूमि
48 वर्षों (1978 से 2026) की प्रत्यक्ष तीर्थयात्रा पर आधारित
वेद एवं विज्ञान दोनों से प्रमाणित — NASA, ISRO, IIT कानपुर
300 से 400 पृष्ठों का महाग्रंथ
शीघ्र नेपाल सहित 190 देशों में उपलब्ध
एक सैनिक का संकल्प
"बंदूक से कलम तक — यह यात्रा ईश्वर की इच्छा से हुई।"
"कारगिल में जो तिरंगा थामा — वही संकल्प कलम में उतरा।"
"सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा का गौरवशाली इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना ही मेरा जीवन लक्ष्य है।"
— नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
नायब सूबेदार (से.नि.) | कारगिल योद्धा | UN वेटरन | सनातन इतिहासकार
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