**अयोध्या धाम में 6 दिसंबर को होगा 'सनातन अयोध्या' के दोनों खंडों का विमोचन**
अयोध्या धाम स्थित बाबा अभिराम दास बैरागी वेद वेदांत शिक्षण प्रशिक्षण विद्यापीठम केंद्र में आगामी 6 दिसंबर 2026 को सनातन संस्कृति एवं इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर मेरी दो ऐतिहासिक पुस्तकों — "सनातन अयोध्या" तथा "सनातन अयोध्या खंड-2" — के हिंदी एवं अंग्रेज़ी संस्करणों का संयुक्त विमोचन किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें देशभर से संत-महंत, विद्वान एवं श्रद्धालुजन सम्मिलित होंगे।
**पुस्तक-1: सनातन अयोध्या**
पहली पुस्तक "सनातन अयोध्या: श्रीराम की जन्मभूमि और भारतीय सभ्यता" (अंग्रेज़ी शीर्षक: Sanatan Ayodhya: The Birthplace of Lord Rama and Indian Civilization) अयोध्या के प्राचीन इतिहास, श्रीराम जन्मभूमि के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा भारतीय सभ्यता के उद्गम पर आधारित एक गहन शोधपूर्ण ग्रंथ है। यह पुस्तक वर्षों के अनुसंधान, मूल अभिलेखों एवं ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है।
**पुस्तक-2: सनातन अयोध्या खंड-2**
दूसरी पुस्तक "सनातन अयोध्या खंड-2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान" (अंग्रेज़ी शीर्षक: Sanatan Ayodhya – Volume 2: Contribution of Vaishnav Bairagi Akharas in the Defence of Ram Janmabhoomi) रामजन्मभूमि की सुरक्षा हेतु वैष्णव बैरागी अखाड़ों के ऐतिहासिक योगदान, संघर्ष एवं सेवा का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। यह ग्रंथ उस अनकहे इतिहास को उजागर करता है, जिसमें बैरागी संत-परंपरा ने शताब्दियों तक श्रीराम जन्मभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित किया।
**मुख्य अतिथि**
इस भव्य आयोजन के मुख्य अतिथि श्री महंत धर्मदास जी महाराज होंगे, जो कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सनातन परंपरा पर अपना उद्बोधन देंगे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
**लेखक परिचय**
इन दोनों पुस्तकों के लेखक श्री नरेश दास वैष्णव निम्बार्क हैं, जो भारतीय सेना में सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार रहे हैं तथा वर्तमान में एक प्रतिष्ठित इतिहासकार एवं शोधकर्ता के रूप में सनातन इतिहास तथा वैष्णव बैरागी संत-परंपरा पर गहन अनुसंधान कर रहे हैं। उनकी शोध-यात्रा सैन्य अनुशासन एवं वैज्ञानिक प्रमाणिकता के समन्वय पर आधारित है।
लेखक का यह दृढ़ मत है कि इतिहास को केवल मौखिक परंपरा अथवा जनश्रुति के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध मूल अभिलेख, न्यायिक रिकॉर्ड, ऐतिहासिक स्रोत तथा धरातलीय शोध के आधार पर ही भावी पीढ़ियों तक पहुँचाया जाना चाहिए। इसी सिद्धांत को उन्होंने अपने संपूर्ण शोध-कार्य का आधार बनाया है, जिसे वे संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त करते हैं — "दस्तावेज़ पहले, निष्कर्ष बाद में।"
**शोध का उद्देश्य**
अयोध्या धाम की इस पावन भूमि पर इन पुस्तकों का विमोचन लेखक के लिए केवल एक साहित्यिक अवसर नहीं है, अपितु श्रीराम जन्मभूमि, अयोध्या एवं सनातन वैष्णव बैरागी संत-परंपरा के इतिहास को शोध, दस्तावेजों तथा प्रमाणों के माध्यम से सुरक्षित रखने की उनकी दीर्घकालिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह प्रयास न केवल ऐतिहासिक सत्य की स्थापना करता है, अपितु राष्ट्रीय गौरव एवं सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करता है।
**कार्यक्रम की विशेषताएँ**
इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा औपचारिक पुस्तक-विमोचन के साथ-साथ सनातन विरासत तथा वैष्णव बैरागी अखाड़ों की भूमिका पर एक विशेष परिचर्चा (पैनल डिस्कशन) का भी आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पारंपरिक पाठ एवं प्रवचन आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जो अयोध्या की ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत यात्रा को समर्पित होंगे।
**कार्यक्रम विवरण**
तिथि: 6 दिसंबर 2026 (सोमवार)
स्थान: बाबा अभिराम दास बैरागी वेद वेदांत शिक्षण प्रशिक्षण विद्यापीठम केंद्र, अयोध्या धाम
समय: प्रातः 10:00 बजे से
मुख्य अतिथि: श्री महंत धर्मदास जी महाराज
यह आयोजन उन समस्त श्रद्धालुओं, इतिहासप्रेमियों एवं शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा जो श्रीराम जन्मभूमि तथा सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के प्रामाणिक इतिहास को जानने-समझने में रुचि रखते हैं। समस्त श्रद्धालुजन एवं गणमान्य अतिथिगण इस पावन अवसर पर सादर आमंत्रित हैं।
जय सीताराम, जय हिंद, जय भारत।
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