44 साल बाद हॉकी स्वर्ण: वैष्णव बैरागी समाज की बेटी ज्योति रामावत ने रचा इतिहास

भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 वर्ष बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। इस ऐतिहासिक टीम में वैष्णव बैरागी समाज की बेटी, सोनीपत की ज्योति रामावत भी शामिल हैं। पिता के निधन, आर्थिक अभाव और माँ के त्याग से स्वर्ण तक पहुँची उनकी प्रेरक कथा।

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**44 साल बाद हॉकी स्वर्ण: वैष्णव बैरागी समाज की बेटी ज्योति रामावत ने रचा इतिहास**

भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में यह दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में 44 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद स्वर्ण पदक जीतकर देश का मस्तक ऊँचा कर दिया है। इस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा सोनीपत की बेटी ज्योति रामावत भी हैं, जो वैष्णव बैरागी समाज से संबंध रखती हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं है। यह संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की वह कथा है, जो हर बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

**कठिन परिस्थितियों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक**

ज्योति ने बहुत कम आयु में अपने पिता को खो दिया। द इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार उनके पिता नरेंद्र सिंह की मृत्यु वर्ष 2009 में एक सड़क दुर्घटना में हुई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कठिन थी और पिता के जाने के बाद चुनौतियाँ और बढ़ गईं। एक समय ऐसा भी आया जब ज्योति की स्कूल फीस चुकाना तक कठिन हो गया था।

ऐसे समय में उनकी माँ सरोज ने परिवार को संभाला। अमर उजाला की रिपोर्ट में ज्योति ने स्वयं बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के दौरान उनकी माँ ने घरों में काम करके उनके खेल को जारी रखा। साथ ही प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच ने उन्हें हॉकी का प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर दिया। एक साधारण परिवार की बेटी को अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मंच तक पहुँचाने में यही संघर्ष और यही मार्गदर्शन निर्णायक सिद्ध हुआ।

**माँ के त्याग को नमन**

ज्योति की सफलता के पीछे उनकी माँ का त्याग खड़ा है। जिस माँ ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में बेटी की फीस और खेल की आवश्यकताओं के लिए परिश्रम किया, उसी की बेटी ने आज अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मैदान में भारत का गौरव बढ़ाया है। इसलिए यह कथा केवल पदक की नहीं है। यह एक माँ के संघर्ष और एक बेटी की मेहनत की साझी कथा है, जिसमें हर अभावग्रस्त परिवार अपनी आशा देख सकता है।

**राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य**

ज्योति ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीता। यह उपलब्धि हॉकी इंडिया के आधिकारिक अभिलेख में स्पष्ट रूप से दर्ज है। उस समय हॉकी इंडिया ने ज्योति को सोनीपत की खिलाड़ी बताते हुए उनके पहले राष्ट्रमंडल खेलों और कांस्य पदक की उपलब्धि पर विशेष बातचीत भी प्रकाशित की थी। आज वही खिलाड़ी भारतीय महिला हॉकी की अनुभवी अंतरराष्ट्रीय सदस्य बन चुकी हैं। जून 2026 में उन्होंने अपना 100वाँ अंतरराष्ट्रीय मैच भी पूरा किया।

**वर्षों की मेहनत का परिणाम**

हॉकी इंडिया के अभिलेख के अनुसार ज्योति की अंतरराष्ट्रीय यात्रा में कई उपलब्धियाँ दर्ज हैं:

- राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य पदक
- एशिया कप 2022 में कांस्य पदक
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 में स्वर्ण पदक
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2024 में स्वर्ण पदक

अब 2026 में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक उनके इस सफर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ता है। यह क्रम बताता है कि यह सफलता किसी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों की निरंतर साधना का फल है।

**15 अगस्त 2022 की वह स्मृति**

मेरे लिए ज्योति रामावत की आज की सफलता इसलिए भी विशेष है कि उनसे मेरा संबंध केवल आज की इस खबर तक सीमित नहीं है। 15 अगस्त 2022 को कुरुक्षेत्र स्थित बैरागी धर्मशाला में मेरी पुस्तक "यात्रा: बंदूक से कलम तक" के विमोचन समारोह के अवसर पर मुझे ज्योति का सम्मान करने का सौभाग्य मिला था। उन्हें स्मृति-चिह्न एवं प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया गया था।

उस समय ज्योति भारतीय हॉकी में अपनी पहचान बना रही थीं और उसी वर्ष बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतकर लौटी थीं। आज 2026 में वही बेटी एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा रही है, तो उस दिन की तस्वीर मेरे लिए और भी अनमोल हो गई है। तब एक होनहार बेटी का सम्मान किया था, आज उसी बेटी की ऐतिहासिक सफलता पर गर्व हो रहा है।

[यहाँ 15 अगस्त 2022 के सम्मान समारोह की मूल फोटो लगाएँ]

फोटो कैप्शन: 15 अगस्त 2022, बैरागी धर्मशाला, कुरुक्षेत्र। पुस्तक "यात्रा: बंदूक से कलम तक" के विमोचन अवसर पर ज्योति रामावत का सम्मान।

**समाज और देश को गर्व**

ज्योति की सफलता वैष्णव बैरागी समाज के लिए विशेष गौरव का विषय है। हमारी परंपरा में साधना, अनुशासन और सेवा का जो भाव रहा है, वह खेल के मैदान में भी दिखाई देता है। जिस समाज ने कभी धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना योगदान दिया, उसी समाज की बेटी आज खेल के माध्यम से तिरंगे का मान बढ़ा रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी विशेष परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। उसे केवल अवसर, मार्गदर्शन और परिवार का साथ चाहिए।

सोनीपत की बेटी ज्योति रामावत को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। आपने कठिन परिस्थितियों से निकलकर जिस ऊँचाई को प्राप्त किया है, वह आने वाली पीढ़ियों की बेटियों के लिए प्रेरणा है। वैष्णव बैरागी समाज को अपनी इस होनहार बेटी पर गर्व है। हरियाणा को अपनी बेटी पर गर्व है। और भारत को अपनी खिलाड़ी पर गर्व है।

ज्योति जी, आपकी सफलता की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहे, यही शुभकामना है।

**नरेश दास वैष्णव निम्बार्क**
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना | इतिहासकार | शोधकर्ता | लेखक
www.nareshswaminimbark.in

जय हिंद, जय भारत
जय श्री राधे-राधे

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