डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह को मानद डॉक्टरेट की उपाधि: 32 वर्षों की साहित्य साधना को अंतरराष्ट्रीय सम्मान, नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दी बधाई

डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह को पत्रकारिता एवं साहित्य सेवा में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि। लेखक एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दी हार्दिक बधाई।

इतिहास एवं साहित्य3 min read

# 32 वर्षों की साहित्य साधना को अंतरराष्ट्रीय सम्मान: डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह को मानद डॉक्टरेट की उपाधि पर नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने दी बधाई

॥ जय श्री सीताराम ॥
॥ जय श्री राधे-राधे ॥

साहित्य, पत्रकारिता, लोककला और इतिहास के क्षेत्र में वर्षों तक निष्ठापूर्वक कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान वास्तव में उनकी सतत साधना का सम्मान होता है। छत्तीसगढ़ के छुईखदान नगर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह जी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने का समाचार अत्यंत प्रसन्नता का विषय है।

हरिभूमि समाचार पत्र में 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार के अनुसार, द लुसियाना रिसर्च यूनिवर्सिटी (यूएसए) द्वारा उन्हें पत्रकारिता एवं साहित्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। नई दिल्ली स्थित द महफिल ग्रैंड में आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय की भारतीय प्रतिनिधि संस्था एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन के माध्यम से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

## तीन दशक से अधिक की पत्रकारिता और साहित्य साधना

डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह जी की पहचान केवल एक पत्रकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक गंभीर साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और इतिहास के प्रति समर्पित लेखक के रूप में भी रही है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, उन्होंने लगभग 32 वर्षों की पत्रकारिता के दौरान समसामयिक घटनाओं की रिपोर्टिंग के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोककला, लोक कलाकारों, साहित्य, संस्कृति और इतिहास पर तथ्यपरक एवं शोधपरक लेखन किया है।

किसी क्षेत्र की वास्तविक पहचान उसके इतिहास, लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और जनजीवन में सुरक्षित रहती है। इन विषयों को दस्तावेजों, ऐतिहासिक तथ्यों और साहित्य के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना महत्वपूर्ण कार्य है। डॉ. सिंह जी का लेखन इसी दृष्टि से उल्लेखनीय है।

## ‘छुईखदान परत दर परत’ : स्थानीय इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज

छुईखदान रियासत और नगर के लगभग 270 वर्षों के इतिहास पर आधारित उनकी पुस्तक ‘छुईखदान परत दर परत’ वर्ष 2020 में प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने स्थानीय इतिहास और ऐतिहासिक विरासत को सामने लाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया है।

स्थानीय रियासतों, उनके शासकों, सामाजिक परिस्थितियों और सांस्कृतिक परंपराओं का इतिहास लिखने के लिए लंबे अध्ययन, ऐतिहासिक सामग्री के संकलन और तथ्यों के व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता होती है। ऐसे प्रयास इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

## मेरा व्यक्तिगत अनुभव और उनके प्रति आभार

मैं, नरेश दास वैष्णव निम्बार्क, लेखक, शोधकर्ता एवं इतिहासकार, डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह जी को इस सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।

मेरी ऐतिहासिक पुस्तक ‘महंत बने महाराजा’ पर शोधकार्य के दौरान छुईखदान बैरागी रियासत और राजनांदगांव रियासत से संबंधित विषयों पर डॉ. सिंह जी ने मुझे महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। ऐतिहासिक शोध में स्थानीय इतिहास की जानकारी रखने वाले साहित्यकारों और जानकार व्यक्तियों का मार्गदर्शन विशेष महत्व रखता है। उनके सहयोग ने मेरे शोधकार्य में सहायता की, जिसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।

पुस्तक के विमोचन एवं उससे संबंधित कार्यक्रम के अवसर पर उन्होंने अपनी साहित्यिक संस्था की ओर से मुझे स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया था। उस कार्यक्रम में उनका सहयोग और स्नेह मेरे लिए अविस्मरणीय है।

मेरे लिए साहित्य का संबंध केवल पुस्तकों के प्रकाशन तक सीमित नहीं है। यह ज्ञान, अनुभव, परस्पर सहयोग और समाज की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की साझा जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। डॉ. सिंह जी के साथ मेरा साहित्यिक परिचय इसी भावना का उदाहरण है।

## सम्मान के साथ हार्दिक शुभकामनाएँ

डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह जी को प्राप्त यह सम्मान उनके दीर्घकालीन साहित्यिक एवं पत्रकारिता संबंधी योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर रचनात्मक सक्रियता की कामना करता हूँ।

ईश्वर उन्हें आगे भी साहित्य, पत्रकारिता, लोककला, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में सार्थक कार्य करने की शक्ति प्रदान करें। उनकी लेखनी समाज की ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करती रहे और नई पीढ़ी को अपने अतीत को समझने की प्रेरणा देती रहे।

डॉ. बीरेंद्र बहादुर सिंह जी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

सादर,

**नरेश दास वैष्णव निम्बार्क**
लेखक | शोधकर्ता | इतिहासकार
जन्मस्थान: ग्राम रामनगर, गन्नौर, सोनीपत, हरियाणा
वेबसाइट: www.nareshswaminimbark.in

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