दादा का स्नेह बना उपन्यास: 'प्रहुति' 190 देशों तक पहुँची | प्रमोद रामावत

राष्ट्रीय कवि प्रमोद रामावत 'प्रमोद' का उपन्यास 'प्रहुति' Google Play, Amazon, Pothi, Internet Archive, Zenodo व Academia पर उपलब्ध। संपादक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क।

इतिहास एवं साहित्य2 min read

दादा के स्नेह ने लिया उपन्यास का रूप: ‘प्रहुति’ पहुँची 190 देशों तक, छह प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर पुस्तक प्रकाशित

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अपनी पोती प्रहुति रामावत के प्रति अनूठा प्रेम — अब पाठकों के लिए उपलब्ध है उपन्यास ‘प्रहुति’
एक दादा का अपनी पोती के प्रति प्रेम जब साहित्य की कलम से व्यक्त होता है, तो वह केवल पारिवारिक भावनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक साहित्यिक कृति का रूप लेकर पाठकों तक पहुँचता है। राष्ट्रीय कवि श्री प्रमोद रामावत ‘प्रमोद’ ने अपनी पोती प्रहुति रामावत के प्रति अपने स्नेह को उपन्यास ‘प्रहुति’ के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। यह रचना दादा और पोती के आत्मीय रिश्ते, स्नेह और पारिवारिक भावनाओं का एक विशेष साहित्यिक प्रयास है।
छह प्रमुख प्लेटफॉर्मों पर पुस्तक का प्रकाशन
प्रकाशन के डिजिटल माध्यमों ने इस पुस्तक को देश-विदेश के पाठकों तक पहुँचाने का अवसर दिया है। उपन्यास ‘प्रहुति’ Google Play Books, Amazon, Pothi.com, Internet Archive, Zenodo और Academia.edu जैसे प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध है।
इन विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पुस्तक की वैश्विक पहुँच का लक्ष्य विस्तृत हुआ है। उपलब्ध प्लेटफॉर्मों के व्यापक अंतरराष्ट्रीय पाठक-क्षेत्र को देखते हुए पुस्तक की पहुँच 190 देशों तक बताई जा रही है। यह डिजिटल प्रकाशन के माध्यम से हिंदी साहित्य को अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
घर बैठे पढ़ें और पुस्तक मँगवाएँ
पाठकों की सुविधा के लिए पुस्तक के डिजिटल संस्करण के लिंक नीचे दिए गए हैं। जो पाठक छपी हुई पुस्तक अपने पुस्तकालय या निजी संग्रह में रखना चाहते हैं, वे Pothi.com से हार्डकवर और पेपरबैक संस्करण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। छपी हुई पुस्तक सशुल्क है; उसका मूल्य संबंधित बिक्री पृष्ठ पर देखा जा सकता है।
पुस्तक ‘प्रहुति’ के सभी प्रकाशन लिंक
1. Google Play Books
https://play.google.com/store/books/details/Pramod_Ramawat_Pramod_%E0%A4%AA_%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A4?id=_TcgEgAAQBAJ
2. Amazon
https://amzn.in/d/07hWr7tp
3. Pothi.com — छपी हुई पुस्तक
https://store.pothi.com/book/pramod-ramawat-pramod-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A4/
4. Internet Archive
https://archive.org/details/hindi_paruti
5. Zenodo
https://zenodo.org/records/23559283
6. Academia.edu
https://www.academia.edu/179381950/Hindi_Paruti
लेखक और संपादक
लेखक: राष्ट्रीय कवि श्री प्रमोद रामावत ‘प्रमोद’
पुस्तक का नाम: प्रहुति
संपादक: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
जन्मस्थान एवं संबंध: रामनगर, गन्नौर, सोनीपत, हरियाणा
यह पुस्तक साहित्य, पारिवारिक स्नेह और हिंदी रचनात्मकता का एक सुंदर उदाहरण है। एक दादा ने अपनी पोती के नाम को अपनी साहित्यिक अभिव्यक्ति का केंद्र बनाया और अपनी भावनाओं को उपन्यास के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाया।
पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े सभी सहयोगियों और पाठकों के प्रति हार्दिक आभार। आशा है कि ‘प्रहुति’ पाठकों तक पहुँचेगी और हिंदी साहित्य के प्रति रुचि रखने वाले लोग इस रचना को पढ़कर लेखक के भावनात्मक प्रयास से जुड़ेंगे।
पुस्तक पढ़ें, हिंदी साहित्य को प्रोत्साहित करें और इस साहित्यिक प्रयास को अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचाएँ।
जय श्री राधे-राधे। जय सीताराम।
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