॥ जय श्री सीताराम ॥
॥ जय श्री राधे-राधे ॥
**क्या किसी महान आचार्य की जन्मभूमि की परंपरा को समझने के लिए एक पुस्तक के लेखक को सात दिन गोदावरी के तट पर बिताने पड़ते हैं?**
जी हाँ, जब उद्देश्य प्रचार नहीं, प्रमाणों के साथ इतिहास को समझना हो। हरियाणा के सोनीपत जिले के ग्राम रामनगर, गन्नौर से चली एक कलम महाराष्ट्र के मुंगी गाँव तक पहुँची, ताकि जगतगुरु निंबार्काचार्य की जन्मभूमि से जुड़ी परंपरा और ऐतिहासिक विवरणों को निकट से देखा जा सके। यही शोधयात्रा पुस्तक **"जगतगुरु निंबार्काचार्य: सनातन के सूर्य"** की आधारशिला बनी।
## संकल्प से यात्रा तक
लेखक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने महाराष्ट्र के पैठण क्षेत्र के मुंगी गाँव में निंबार्काचार्य के जीवन, दर्शन और परंपरा पर शोधपरक पुस्तक लिखने का संकल्प लिया। परंपरा के अनुसार निंबार्काचार्य का जन्म गोदावरी के तट पर वैदूर्यपत्तनम में हुआ था, जिसकी पहचान आज मुंगी, पैठण (जिला छत्रपति संभाजी नगर) से की जाती है। इसी स्थान को देखने और समझने के लिए यह यात्रा हुई।
## रात एक बजे का स्वागत
यात्रा का एक प्रसंग लेखक के लिए आज भी भावुक है। ट्रेन से छत्रपति संभाजी नगर पहुँचते समय रात के लगभग एक बज चुके थे। मुंबई निवासी पूर्व न्यायाधीश श्री राजेंद्र दास वैष्णव जी स्वयं स्टेशन पर प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने आत्मीयता से लेखक का बैग उठाया और उन्हें अपने साथ ले गए। एक साधारण सैनिक परिवार में जन्मे लेखक को इस व्यवहार में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भाव दिखाई दिया।
## रामानंदाचार्य जयंती और पुस्तकों का विमोचन
छत्रपति संभाजी नगर में महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती रजनी वैष्णव जी द्वारा रामानंदाचार्य जयंती का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें लेखक मुख्य अतिथि रहे। इस अवसर पर उनकी दो पुस्तकों **"यात्रा: बंदूक से कलम तक"** और **"महंत बने महाराजा"** का विमोचन हुआ तथा पुस्तकें निःशुल्क वितरित की गईं।
## मुंगी गाँव में सात दिन
इसके बाद लेखक और पूर्व न्यायाधीश श्री राजेंद्र दास वैष्णव जी लगभग 80 किलोमीटर दूर मुंगी गाँव पहुँचे। गोदावरी तट से जुड़ी निंबार्काचार्य की जन्मभूमि की परंपरा और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों को समझने के लिए दोनों ने लगभग सात दिन शोधकार्य किया। इस शोध का पूरा खर्च न्यायाधीश महोदय ने वहन किया।
इन दिनों में लगभग पचास लोगों ने फ़ोन करके लेखक को भोजन पर आमंत्रित किया। निर्धारित शोधकार्य के कारण वे सभी निमंत्रण स्वीकार नहीं कर सके, पर लोगों का स्नेह और अपनापन उनके लिए अत्यंत भावुक अनुभव रहा।
## निंबार्काचार्य: परंपरा क्या कहती है
परंपरागत विवरणों के अनुसार उनके पिता का नाम अरुण ऋषि और माता का नाम जयंती देवी माना जाता है, यद्यपि कुछ स्रोतों में माता-पिता के नाम भिन्न मिलते हैं। बाल्यकाल का नाम नियमानंद बताया जाता है। उनके काल और जन्मस्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद है, इसलिए पुस्तक में इन विषयों को निर्विवाद तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि परंपरागत मान्यताओं और उपलब्ध विवरणों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
उनके नाम की कथा भी प्रसिद्ध है। परंपरा के अनुसार निंबग्राम में एक संन्यासी अतिथि सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते थे। तब नियमानंद ने नीम के वृक्ष पर सुदर्शन चक्र के प्रभाव से सूर्य जैसा प्रकाश दिखाया। इसी कारण वे **निंब** (नीम) और **अर्क** (सूर्य) से मिलकर **निंबार्क** कहलाए। निंबार्क संप्रदाय का दर्शन द्वैताद्वैत है, जिसमें जीव, जगत और ईश्वर के बीच भेद और अभेद, दोनों की व्याख्या मिलती है। श्रीराधा-कृष्ण की उपासना इस संप्रदाय की विशिष्ट पहचान है।
## 190 देशों तक पहुँच
डिजिटल प्रकाशन मंचों पर उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार लेखक की पुस्तकों की पहुँच 190 देशों तक दर्ज की गई है। इस आँकड़े का सटीक अर्थ संबंधित मंचों के उपलब्ध रिकॉर्ड पर निर्भर करता है। यह पहुँच इस बात का संकेत है कि रामनगर, गन्नौर जैसे एक छोटे गाँव से निकला साहित्य डिजिटल माध्यमों से दुनिया के पाठकों तक पहुँच सकता है।
## निःशुल्क पढ़ें
लेखक की पुस्तकें Google Books, Internet Archive, Academia.edu और Zenodo जैसे मंचों पर निःशुल्क पढ़ी जा सकती हैं। किसी भी मंच पर "Naresh Das Vaishnav Nimbark" लिखकर खोजने से पुस्तकें मिल जाएँगी।
## संकल्प
यह यात्रा गुरुजनों के प्रति सम्मान, मानवीय संवेदना, शोध-समर्पण और सनातन परंपरा के इतिहास को प्रमाणों सहित सामने लाने का एक प्रेरक उदाहरण है। लेखक का संकल्प स्पष्ट है:
**दस्तावेज पहले बोलेंगे, उसके बाद हम लिखेंगे। सच को सच ही लिखेंगे।**
इस पोस्ट को अधिक से अधिक सनातन-प्रेमियों और इतिहास-प्रेमियों तक पहुँचाइए और अपने विचार टिप्पणी में अवश्य लिखिए।
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**नरेश दास वैष्णव निम्बार्क**
लेखक | शोधकर्ता | इतिहासकार
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना
**जन्मस्थान:** ग्राम रामनगर, गन्नौर, सोनीपत, हरियाणा
**वेबसाइट:** www.nareshswaminimbark.in
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