बिहार में तीन बैरागी गाँव और अयोध्या 1949 के दो वैष्णव बैरागी संत: क्या कहते हैं दस्तावेज़? | प्रमाण–59

बिहार के तीन गाँव सरकारी जनगणना अभिलेखों में 'बैरागी' नाम से दर्ज हैं। साथ ही 1949 के रामजन्मभूमि घटनाक्रम में महंत अभिराम दास बैरागी और बाबा वृंदावन दास बैरागी के उल्लेखों का दस्तावेज़ी अध्ययन। क्या प्रमाणित है, क्या प्रकाशित विवरण और क्या अभी अप्रमाणित, इसकी स्पष्ट रेखा के साथ प्रमाण–59।

प्रमाण-संग्रह (मुख्य)8 min read

सरकारी अभिलेखों में बैरागी नामधारी गाँव तथा 1949 के रामजन्मभूमि घटनाक्रम में महंत अभिराम दास बैरागी और बाबा वृंदावन दास बैरागी का दस्तावेज़ी अध्ययन
शोधकर्ता: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
लेखक | शोधकर्ता | इतिहासकार
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना

प्रस्तावना
इतिहास-लेखन में स्थान-नाम केवल शब्द नहीं होते। वे बसावट, परंपरा और स्मृति के संकेत होते हैं। भारतीय सभ्यता में बैरागी वैष्णव संतों ने तीर्थों, मठों और जनजीवन पर गहरी छाप छोड़ी है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि बिहार जैसे प्राचीन प्रदेश में बैरागी नाम से जुड़े गाँव किस रूप में अभिलेखों में दर्ज हैं।
इस शोध में सरकारी जनगणना अभिलेखों में ऐसे गाँवों की खोज की गई है। साथ ही 1949 के रामजन्मभूमि घटनाक्रम में उल्लिखित दो संतों, महंत अभिराम दास बैरागी और बाबा वृंदावन दास बैरागी, से संबंधित उपलब्ध सामग्री का अध्ययन किया गया है।
इस शोध का उद्देश्य किसी निष्कर्ष को पहले से निर्धारित करना नहीं है। उद्देश्य है उपलब्ध दस्तावेज़ों और ऐतिहासिक उल्लेखों को उनके वास्तविक स्वरूप में सामने रखना।
शोध-पद्धति और स्रोतों का वर्गीकरण
इस शोध में सामग्री को तीन स्पष्ट श्रेणियों में रखा गया है:
सरकारी अभिलेख: जनगणना और भूमि अभिलेख। ये गाँव के नाम और सरकारी पहचान के प्रमाण हैं।
प्रकाशित विवरण और न्यायिक दस्तावेज़: समाचार रिपोर्टें, पुस्तकें और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अभिलेख। ये उल्लेख हैं, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
अप्रमाणित बातें: जिनके लिए प्राथमिक दस्तावेज़ अभी उपलब्ध नहीं हैं। इन्हें तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं किया गया है।
1. पूर्वी चंपारण: बेलवा राय टोला बैरागी
पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया क्षेत्र में बेलवा राय टोला बैरागी नाम का गाँव सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। पंचायत-स्तरीय सूचियों में यह बेलवा राय टोला पंचायत के अंतर्गत मिलता है, जहाँ इसके साथ बेलवा राय खास और बेलवा राय टोला नरिरवा जैसे गाँव भी दर्ज हैं।
वर्ष 2001 की जनगणना में गाँव का कोड 00199400 दर्ज है।
वर्ष 2011 की जनगणना में इसका कोड 217982 दर्ज है।
वर्ष 2001 के जिला जनगणना विवरण में जनसंख्या 2,962 दर्ज की गई थी।
ये अभिलेख इस स्थान के नाम और जनगणना में इसकी स्वतंत्र पहचान की पुष्टि करते हैं। परंतु गाँव के नाम में ‘बैरागी’ शब्द किस परिवार, संत, मठ या परंपरा के कारण जुड़ा, इसका अंतिम निष्कर्ष पुराने राजस्व अभिलेखों और स्थानीय इतिहास की जाँच के बाद ही संभव है।
2. सारण जिला: बैरागी भुइन
सारण जिले के पानापुर क्षेत्र में बैरागी भुइन नाम का गाँव वर्ष 2011 की जनगणना में दर्ज है। इसका जनगणना गाँव कोड 232880 है। बिहार सरकार के भूमि अभिलेख पोर्टल पर गाँव-स्तर के राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी, खाता और खेसरा संबंधी विवरण देखने की सुविधा उपलब्ध है।
इस गाँव के संबंध में डिजिटल भूमि अभिलेख प्रणाली में 147 ROR रिकॉर्ड का उल्लेख मिला है। यहाँ एक आवश्यक स्पष्टीकरण है: 147 ROR रिकॉर्ड का अर्थ अपने-आप 147 अलग परिवार या 147 स्वतंत्र जमाबंदियाँ नहीं होता। इसके लिए संबंधित राजस्व अभिलेखों का अलग परीक्षण आवश्यक है।
बैरागी भुइन नाम की ऐतिहासिक उत्पत्ति और वहाँ बैरागी परिवारों की पुरानी उपस्थिति की पुष्टि के लिए खाता, खेसरा, खतियान, जमाबंदी और स्थानीय वंशावली का अध्ययन आगे किया जाना चाहिए।
3. पश्चिमी चंपारण: बैरागी डीह
पश्चिमी चंपारण जिले के मझौलिया क्षेत्र में बैरागी डीह नाम का गाँव वर्ष 2011 की जनगणना में दर्ज है। पंचायत-स्तरीय सूची में यह चनैनबंध पंचायत के अंतर्गत मिलता है।
जनगणना गाँव कोड: 217279
जनसंख्या: 479
परिवारों की संख्या: 89
दर्ज क्षेत्रफल: 23 हेक्टेयर
‘डीह’ शब्द बिहार के अनेक क्षेत्रों में पुराने बसावट-स्थलों के नाम के साथ मिलता है। फिर भी इस गाँव के नाम का बैरागी परंपरा से संबंध स्थापित करने के लिए स्थानीय ऐतिहासिक साक्ष्य और राजस्व दस्तावेज़ों की जाँच आवश्यक है।
4. वर्ष 1949 की रामजन्मभूमि घटना और महंत अभिराम दास बैरागी
दिसंबर 1949 की घटनाओं में महंत अभिराम दास बैरागी का नाम प्रमुखता से आता है। प्रकाशित विवरणों के अनुसार:
उनका संबंध बिहार के दरभंगा क्षेत्र से था। Open पत्रिका के एक विवरण में उनका जन्म दरभंगा जिले के राढ़ी गाँव में बताया गया है।
वे वर्ष 1934 में अयोध्या आए और हनुमानगढ़ी से जुड़े निर्वाणी अखाड़े के महंत यमुना दास के शिष्य बने।
अधिकांश प्रकाशित विवरण उन्हें निर्वाणी अखाड़े से जोड़ते हैं। कुछ रिपोर्टों में उनका संबंध निर्मोही अखाड़े से भी बताया गया है। यह अंतर मूल अखाड़ा-अभिलेखों से सुलझाया जाना शेष है।
22–23 दिसंबर 1949 की घटना के बाद अयोध्या थाने में दर्ज प्राथमिकी में उनका नाम था।
उनके शिष्य आचार्य सत्येंद्र दास आगे चलकर रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी बने। प्रकाशित विवरणों के अनुसार महंत अभिराम दास का निधन 3 दिसंबर 1981 को हुआ।
उस रात की घटना को श्रद्धालु जनश्रुति में रामलला के प्रकटीकरण के रूप में देखते हैं, जबकि प्राथमिकी और अनेक प्रकाशित विवरण इसे मूर्ति की स्थापना बताते हैं। इस शोध का विषय इस विवाद का निर्णय करना नहीं है। यहाँ केवल संतों के उल्लेख और उनके बिहार से संबंध का दस्तावेज़ी अध्ययन किया जा रहा है।
उनके जन्मस्थान और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर अंतिम निष्कर्ष के लिए मूल जीवन-वृत्त, मठीय अभिलेख या अन्य प्राथमिक दस्तावेज़ आवश्यक होंगे।
5. बाबा वृंदावन दास बैरागी का उल्लेख
वर्ष 1949 के घटनाक्रम में बाबा वृंदावन दास बैरागी का नाम भी प्रकाशित विवरणों में मिलता है। कुछ विवरणों में उन्हें महंत अभिराम दास बैरागी के साथ इस कार्य के लिए नियुक्त बताया गया है।
मूर्ति के स्रोत के विषय में विवरण भिन्न हैं। कुछ समाचार रिपोर्टों में कहा गया है कि वृंदावन दास के पास रामलला की एक छोटी मूर्ति थी, जिसे उन्होंने महंत अभिराम दास बैरागी को सौंपा। इसके विपरीत, Open पत्रिका में जामवंत क़िले के वर्तमान महंत के हवाले से कहा गया है कि मूर्ति तत्कालीन महंत बलराम दास ने उपलब्ध कराई थी। इन भिन्न विवरणों का निर्णय प्राथमिक दस्तावेज़ों से ही हो सकता है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अयोध्या विवाद संबंधी अभिलेख (खंड 3) में गवाह रामशुभग दास के बयान के अनुवाद में वृंदावन दास का नाम उपस्थित साधुओं के संदर्भ में मिलता है। यह एक गवाह के बयान में आया उल्लेख है। इसे न्यायालय द्वारा वृंदावन दास की भूमिका पर दिया गया स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
उनके अखाड़े के संबंध में भी भिन्नता है। कुछ रिपोर्टें उन्हें निर्वाणी अखाड़े से जोड़ती हैं, जबकि गवाह के बयान में निर्मोही अखाड़े का संदर्भ आता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यह प्रमाणित नहीं किया जा सका है कि बाबा वृंदावन दास बैरागी का जन्म बिहार में हुआ था। इसलिए उन्हें बिहार का निवासी या बिहार में जन्मा संत घोषित करना उचित नहीं होगा।
6. इस शोध से क्या सामने आता है?
प्रमाणित (सरकारी अभिलेख):
पूर्वी चंपारण में बेलवा राय टोला बैरागी नाम का गाँव जनगणना में दर्ज है।
सारण के पानापुर क्षेत्र में बैरागी भुइन नाम का गाँव 2011 की जनगणना में दर्ज है।
पश्चिमी चंपारण के मझौलिया क्षेत्र में बैरागी डीह नाम का गाँव जनगणना में दर्ज है।
प्रकाशित विवरणों में उल्लिखित:
महंत अभिराम दास बैरागी का दरभंगा क्षेत्र से संबंध।
बाबा वृंदावन दास बैरागी का 1949 के घटनाक्रम में नाम, जिसमें मूर्ति के स्रोत पर विवरण भिन्न हैं।
अभी अप्रमाणित:
बाबा वृंदावन दास बैरागी का बिहार में जन्म।
तीनों गाँवों के नामकरण का किसी विशेष बैरागी संत, मठ या परिवार से संबंध।
यह भी स्मरण रहे कि गाँव के नाम में ‘बैरागी’ शब्द होने से यह सिद्ध नहीं होता कि वहाँ के सभी निवासी बैरागी समुदाय के हैं या गाँव की स्थापना किसी बैरागी संत ने की थी। इसके लिए अलग और ठोस ऐतिहासिक प्रमाण चाहिए।
7. आगे किन दस्तावेज़ों की आवश्यकता है?
संबंधित गाँवों के पुराने खतियान और जमाबंदी रजिस्टर।
पुराने बंदोबस्त एवं राजस्व सर्वेक्षण अभिलेख।
गाँवों के नामकरण से संबंधित स्थानीय इतिहास और वंशावली।
पुराने मठों, मंदिरों और अखाड़ों के अभिलेख।
महंत अभिराम दास बैरागी और बाबा वृंदावन दास बैरागी के जीवन से जुड़े प्राथमिक दस्तावेज़।
अयोध्या प्रकरण से संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत मूल गवाही और दस्तावेज़।
निष्कर्ष
बिहार के सरकारी जनगणना अभिलेखों में बैरागी नाम से जुड़े तीन गाँवों की पहचान इस शोध का महत्वपूर्ण पक्ष है। दूसरी ओर, 1949 के घटनाक्रम में महंत अभिराम दास बैरागी और बाबा वृंदावन दास बैरागी के उल्लेख से बिहार और अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों की जाँच का एक गंभीर विषय सामने आता है।
परंतु इतिहास-लेखन में संभावना को प्रमाण और समाचार-विवरण को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इसीलिए इस शोध में प्रमाणित सरकारी प्रविष्टियों, प्रकाशित विवरणों, न्यायिक उल्लेखों और अप्रमाणित तथ्यों के बीच स्पष्ट रेखा खींची गई है। यह शोध आगे भी जारी रहेगा और नए दस्तावेज़ मिलने पर निष्कर्ष उसी के अनुसार संशोधित और विस्तारित किए जाएँगे।
हमारा संकल्प है: दस्तावेज़ पहले बोलेंगे, उसके बाद हम लिखेंगे। झूठ को कभी सच नहीं बनाएँगे।

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
लेखक | शोधकर्ता | इतिहासकार
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना
वेबसाइट: https://www.nareshswaminimbark.in

प्रमुख स्रोत एवं संदर्भ
भारत की जनगणना 2001, पूर्वी चंपारण जिला जनगणना पुस्तिका: https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/20249
भारत की जनगणना 2011, पूर्वी चंपारण जिला जनगणना पुस्तिका: https://censusindia.mha.gov.in/nada/index.php/catalog/6395
भारत की जनगणना 2011, सारण जिला जनगणना पुस्तिका: https://censusindia.mha.gov.in/nada/index.php/catalog/6410
भारत की जनगणना 2011, पश्चिमी चंपारण जिला जनगणना पुस्तिका: https://censusindia.mha.gov.in/nada/index.php/catalog/40882
बिहार भूमि, राजस्व एवं भूमि अभिलेख: https://biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/Default
अयोध्या प्रकरण, इलाहाबाद उच्च न्यायालय (eLegalix), खंड 3: https://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/ayodhyafiles/honsaj-vol-3.pdf
Open पत्रिका, “It Happened One Night” (अभिराम दास का जीवन-विवरण और मूर्ति के स्रोत संबंधी कथन)।
The Wire, “The Untold Story of How the Rama Idol Surfaced Inside Babri Masjid” (अभिराम दास का निधन और शिष्य-परंपरा)।
The Week, 12 अगस्त 2021, “BJP, RSS want to turn Ayodhya into a modern showcase of Hindu piety” (अभिराम दास और ब्रिंदावन दास का उल्लेख)।

Internal linking suggestions
Related posts
प्रमाण संख्या–49: Waterfield की जनगणना रिपोर्ट (1875) में वैष्णव और बैरागी नाम — स्रोत-आधारित अध्ययन
Henry Waterfield की 1875 की पुस्तक Memorandum on the Census of British India of 1871–72 के मुद्रित पृष्ठ 24 और 26 पर ‘Baisnabs’, ‘Baishtabs’ और ‘Bairagces’ का उल्लेख मिलता है। मूल स्रोत, उसकी सीमाएँ और शोध की अनिवार्य शर्तें।
अंग्रेज़ों ने भी दर्ज किया वैष्णव बैरागियों का इतिहास: प्रमाण संख्या–48 का सच
यूरोपीय यात्रियों, ब्रिटिश प्रशासकों और आधुनिक इतिहासकारों ने भी वैष्णव बैरागियों के मठ, अखाड़े और साधु-संगठन का अध्ययन किया। जानिए अध्याय–13 के प्रमाण संख्या–48 का दस्तावेजी साक्ष्य।
प्रमाण नंबर-10: रामनगर गन्नौर से फिनलैंड तक — 20 पुस्तकों में दर्ज सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा की गूंज
रामनगर गन्नौर से फिनलैंड तक — जानें कैसे सेवानिवृत्त सैनिक व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने 9 हिंदी व 11 English मिलाकर 20 पुस्तकों में सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा को प्रमाणों सहित संजोया।