31 अक्टूबर 2026 | हनुमानगढ़ी में अर्जी से रामजन्मभूमि में प्रभु श्रीराम के चरणों तक
मेरी पाँचवीं अयोध्या यात्रा: एक सैनिक की प्रार्थना, संतों का आशीर्वाद और 6 दिसंबर 2026 के पुस्तक विमोचन की तैयारियाँ
सुबह 5 बजे: सबसे पहले अयोध्या के रक्षक हनुमान जी के दर्शन
31 अक्टूबर 2026 की सुबह अयोध्या धाम में मेरे जीवन की अविस्मरणीय सुबह थी।
सुबह लगभग 5 बजे मैं और मेरे भाई तुलसी बैरागी, होटल से तैयार होकर, सबसे पहले अयोध्या के रक्षक श्री हनुमान जी महाराज के दर्शन के लिए हनुमानगढ़ी की ओर निकल पड़े।
हनुमानगढ़ी पहुँचकर श्रद्धापूर्वक दर्शन किए और उनके चरणों में अपनी अर्जी लगाई। मन में एक ही प्रार्थना थी:
हे संकटमोचन हनुमान जी महाराज! 6 दिसंबर 2026 को बाबा श्री महंत अभिराम दास जी बैरागी वेद-वेदांत विद्यालय एवं गौशाला में होने वाले हमारी पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम को सफल बनाना। संतों को एकत्रित करना, सभी व्यवस्थाएँ ठीक रखना और हमें सेवा करने की शक्ति देना। इस आयोजन में आप ही संयोजक हैं। आपकी कृपा और आशीर्वाद से ही यह सेवा सफल हो सकती है।
हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना करके मैं और तुलसी बैरागी रामजन्मभूमि में प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए चल पड़े।
रामजन्मभूमि के दर्शन: जीवन का अविस्मरणीय क्षण
हनुमानगढ़ी से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुँचते ही मन प्रसन्नता से भर गया।
यह मेरी अयोध्या धाम की पाँचवीं यात्रा थी। मुख्य द्वार पर जगतगुरु रामानंदाचार्य जी का विशाल स्वरूप देखकर विशेष आनंद हुआ। सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा की महान गुरु-परंपरा और उसके ऐतिहासिक विस्तार का स्मरण हो आया।
जहाँ तक मोबाइल ले जाने की अनुमति थी, वहाँ तक मैंने फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से दर्शन और इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार का प्रसारण किया। इसके बाद निर्धारित काउंटर पर जूते और मोबाइल जमा कराकर मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
प्रभु श्रीराम के मंदिर की सुंदरता का वर्णन हज़ारों शब्दों में भी पूरी तरह नहीं किया जा सकता। मैंने अपना जीवन देश की सेवा, विश्व के विभिन्न मंदिरों के दर्शन और ऐतिहासिक शोध यात्राओं में लगाया है, परंतु मेरे लिए यह मंदिर अत्यंत अद्भुत और मनमोहक अनुभव रहा।
जब मैं और मेरे भाई तुलसी बैरागी प्रभु श्रीराम के चरणों में पहुँचे और अर्जी लगाई, उस समय मन में जो आनंद, शांति और प्रसन्नता थी, उसे शब्दों में व्यक्त करना मेरे लिए संभव नहीं है।
वहीं प्रभु के सामने 6 दिसंबर 2026 के कार्यक्रम की सफलता के लिए भी प्रार्थना की। मैंने मन ही मन कहा:
हे प्रभु श्रीराम! मैं तो भारतीय सेना में सेवा करने वाला एक साधारण सैनिक हूँ। इतिहास और लेखन के क्षेत्र में जो कुछ भी कर पाया हूँ, वह आपकी कृपा से ही संभव हुआ है। अयोध्या और रामजन्मभूमि पर, तथा उसकी रक्षा में सनातन वैष्णव बैरागी अखाड़ों के योगदान पर, पुस्तकें लिखने का अवसर भी आपकी ही कृपा है। इन पुस्तकों में मेरा कोई अहंकार या व्यक्तिगत श्रेय नहीं है। जो कुछ लिखा गया है, वह आपके आशीर्वाद और उपलब्ध दस्तावेज़ों एवं प्रमाणों के आधार पर लिखने का एक विनम्र प्रयास है।
6 दिसंबर 2026 का कार्यक्रम सफल बनाइए। संतों का आशीर्वाद बना रहे और यह आयोजन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम की सेवा और सनातन इतिहास के प्रति समर्पित रहे।
वेद-वेदांत विद्यालय में संतों का आशीर्वाद
प्रभु श्रीराम के दर्शन करके जब हम बाहर निकले तो लगभग 8:30 बज चुके थे। इसके बाद हम वैष्णव परंपरा के एक होटल में पहुँचे, चाय और नाश्ता किया और फिर सीधे बाबा श्री महंत अभिराम दास जी बैरागी वेद-वेदांत विद्यालय एवं गौशाला पहुँचे।
वहाँ परम पूज्य बालक दास जी महाराज से भेंट हुई और उन्होंने आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद हम छात्रावास पहुँचे, जहाँ 6 दिसंबर को पुस्तक विमोचन कार्यक्रम होना है। हॉल का निरीक्षण किया और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को समझा।
बालक दास जी महाराज से लगभग आठ मिनट का विशेष साक्षात्कार भी लिया। इसमें वेद विद्यालय की स्थापना, उसकी गतिविधियों और उनके दादागुरु बाबा श्री महंत अभिराम दास जी बैरागी के संबंध में बातचीत हुई।
हमारा उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक स्थान, संत-परंपरा और वेद शिक्षा के कार्य को भी लोगों तक पहुँचाना है।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का निरीक्षण
विद्यालय का निरीक्षण करने के बाद हम टेंट हाउस संचालक को साथ लेकर वापस विद्यालय पहुँचे। टेंट, कुर्सियों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई।
इसके बाद हम दोनों भाई श्री महंत धर्मदास जी महाराज के पास हनुमानगढ़ी, निर्वाणी अखाड़ा पहुँचे।
श्री महंत धर्मदास जी महाराज से विशेष भेंट
श्री महंत धर्मदास जी महाराज को 6 दिसंबर 2026 के कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र भेंट किया और उनसे लगभग 15 मिनट का विशेष साक्षात्कार लिया।
इस बातचीत का विशेष महत्व इसलिए है कि मेरी पुस्तक सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान के शोध में महंत धर्मदास जी महाराज ने लगभग 205 प्रमाण उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उनके सहयोग के बिना इस शोध कार्य को इस स्तर तक पहुँचाना कठिन होता।
उनसे रामजन्मभूमि के इतिहास, संतों की भूमिका और 6 दिसंबर के आयोजन के विषय में विस्तार से चर्चा हुई।
श्री महंत धर्मदास जी महाराज का पूरा साक्षात्कार (यूट्यूब): https://youtu.be/WN_iKiFNv70
चाय-नाश्ते के दौरान भोजन-प्रसाद की व्यवस्था पर भी बात हुई। महंत जी ने सुझाव दिया कि भोजन वेद विद्यालय में ही तैयार कराया जाए, भोजन सादा और सात्त्विक हो तथा कार्यक्रम में भी सादगी बनी रहे। यह विचार मुझे बहुत अच्छा लगा। हमारा उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि संतों का सम्मान, पुस्तक विमोचन और इतिहास के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाना है।
संतों को निमंत्रण और आयोजन की तैयारियाँ
इसके बाद हम दोनों भाई संतों को निमंत्रण पत्र देने निकल पड़े। श्री महंत राजू दास जी महाराज तथा श्री महंत रामकुमार दास जी महाराज सहित अन्य संतों को कार्यक्रम में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया। निर्वाणी अखाड़े के संतों और अन्य संत-महात्माओं को आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई।
इसके बाद हम गोलाघाट स्थित आर.के. टेंट हाउस पहुँचे, जहाँ कुर्सियों, मेज़ों, साउंड सिस्टम, लेक्चर स्टैंड और माइक आदि की व्यवस्था के लिए अग्रिम राशि जमा कराई। फिर वापस वेद विद्यालय पहुँचकर भोजन-प्रसाद की व्यवस्था के लिए बालक दास जी महाराज को सहयोग राशि भेंट की।
इसके बाद 6 दिसंबर के कार्यक्रम में आने वाले साथियों के ठहरने के लिए होटल में पूरा होटल बुक कराया और अग्रिम राशि जमा कराई। इस प्रकार एक-एक करके आवश्यक व्यवस्थाएँ आगे बढ़ती रहीं।
6 दिसंबर 2026: चार पुस्तकों का विमोचन
इस आयोजन में हिंदी और अंग्रेज़ी में दो-दो, कुल चार पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा।
हिंदी पुस्तकें
सनातन अयोध्या: श्रीराम की जन्मभूमि और भारतीय सभ्यता
सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान
अंग्रेज़ी पुस्तकें
Sanatan Ayodhya: The Birthplace of Sri Ram and Indian Civilisation
Sanatan Ayodhya – Volume 2: Contribution of Vaishnav Bairagi Akharas in the Defence of Ram Janmabhoomi
कार्यक्रम के आयोजक: प्रभु श्रीराम जी
कार्यक्रम के संयोजक: अयोध्या के रक्षक श्री हनुमान जी महाराज
मुख्य अतिथि: परम पूज्य श्री महंत धर्मदास जी महाराज बैरागी, हनुमानगढ़ी, निर्वाणी अखाड़ा, अयोध्या
आयोजन स्थल: बाबा श्री महंत अभिराम दास जी बैरागी वेद-वेदांत विद्यालय एवं गौशाला, अयोध्या
यह आयोजन किसी व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित एक विनम्र सेवा है। हम सभी तो केवल निमित्त मात्र हैं।
यात्रा अभी जारी है
31 अक्टूबर का दिन यहीं समाप्त नहीं हुआ। अभी कुछ निमंत्रण पत्र संतों तक पहुँचाने शेष हैं। सरयू में स्नान करना है, हनुमानगढ़ी में पुनः दर्शन करने हैं और अयोध्या के अन्य मंदिरों में माथा टेकना है। हम दोनों भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार 6 दिसंबर के आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं।
एक सैनिक के जीवन में अनुशासन और ज़िम्मेदारी का विशेष महत्व होता है। सेना में रहकर देश की सेवा की, और अब जीवन के इस पड़ाव पर दस्तावेज़ों, इतिहास और लेखन के माध्यम से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के योगदान को सामने लाने का प्रयास कर रहा हूँ।
मुझे किसी पद, प्रतिष्ठा या प्रसिद्धि की इच्छा नहीं है। मेरी एक ही प्रार्थना है कि इतिहास के साथ न्याय हो, संतों का सम्मान बना रहे और आने वाली पीढ़ियों तक सही जानकारी पहुँचे।
दस्तावेज़ पहले बोलेंगे, उसके बाद हम लिखेंगे। झूठ को कभी सच नहीं बनाएँगे।
हे प्रभु श्रीराम! 6 दिसंबर 2026 का कार्यक्रम सफल बनाइए। अयोध्या के रक्षक श्री हनुमान जी महाराज अपनी कृपा बनाए रखें। सभी संत-महात्माओं को अपना आशीर्वाद देकर इस सेवा में सहभागी बनाइए। यह सब आपकी कृपा है। हम तो केवल निमित्त मात्र हैं।
लेखक एवं शोधकर्ता: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना
वेबसाइट: https://www.nareshswaminimbark.in
॥ आयोजक: प्रभु श्रीराम जी ॥
॥ संयोजक: श्री हनुमान जी महाराज ॥
॥ जय श्री सीताराम ॥ जय श्री राधे-राधे ॥
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